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अब बिल्डर की भूमिका में PWD: तीन अरब के रिडेंसिफिकेशन प्रोजेक्ट्स से हाउसिंग बोर्ड को देगा टक्कर

अब बिल्डर की भूमिका में PWD: तीन अरब के रिडेंसिफिकेशन प्रोजेक्ट्स से हाउसिंग बोर्ड को देगा टक्कर

पांच पाइंट में समझे खबर

  • सड़क-फ्लाईओवर के बाद अब PWD भी संभालेगा रिडेंसिफिकेशन प्रोजेक्ट।
  • शाहजहांनाबाद के रामनगर में 3 अरब से होगी पहले प्रोजेक्ट की शुरूआत।
  • लीज-फ्री होल्ड विवाद खत्म करने डेवलपर को मिक्स यूज टेंडर देने की तैयारी।
  • हाउसिंग प्रोजेक्ट में घाटे से बचने के लिए पीपी मोड पर काम कराने की रणनीति।
  • हाउसिंग बोर्ड को आवासीय परियोजना में चुनौती देने वाली दूसरी सरकारी एजेंसी।

अब PWD सिर्फ सड़क और पुल निर्माण तक सीमित नहीं रह गया बल्कि भोपाल में हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में भी किस्मत आजमाने वाला है। सरकार की रिडेंसिफिकेशन पॉलिसी के तहत पीडब्ल्युडी भी घनी बसाहट वाले क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारतें बनाएगा। इसकी शुरुआत पुराने भोपाल के शाहजहांनाबाद स्थित रामनगर से हो रही है। हाउसिंग बोर्ड की तरह इन परियोजनाओं में घाटा न हो इसको लेकर भी विभाग ने तैयारी की है।

विभाग अपने पहले प्रोजेक्ट पर तीन अरब रुपए खर्च करने से पहले फिजिबिलिटी स्टडी करा रहा है। इसके बाद प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार कराई जाएगी। वहीं डीपीआर के आधार पर चार माह में टेंडर प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी भी कंसल्टेंट एजेंसी को दी गई है।

पुराने पुलिस क्वार्टरों की जगह बनेंगे नए सरकारी घर

MP में अब PWD घर भी बनाएगा। उसे रोडेंसिफिकेशन पॉलिसी के तहत हाउसिंग बोर्ड की तरह चलाया जाएगा। मकसद है पुराने सरकारी क्वार्टर तोड़कर जमीन का बेहतर इस्तेमाल। पहले फेज में 3 अरब खर्च होंगे। शुरुआत भोपाल के शाहजहांनाबाद, रामनगर से होगी। वहां पुराने पुलिस क्वार्टरों की जगह नए सरकारी घर बनेंगे। BDA ने 15 साल पहले कोशिश की थी।

विवाद और जमीन के पेंच में काम अटक गया। ठेकेदार को पैसा भी नहीं मिला। नई पॉलिसी में प्राइवेट डेवलपर को घर और दुकान दोनों मिलेंगे। इससे प्रोजेक्ट फायदे का सौदा बनेगा। बिल्डर की दिलचस्पी बढ़ेगी। सरकार को बदले में मॉडर्न इंफ्रा मिलेगा। ऐसे प्राजेक्ट पर MPHIDB पहले से काम कर रहा है। बोर्ड भोपाल सहित प्रदेश भर में 28 रिडेंसिफिकेशन प्रोजेक्ट संभाल रहा है। वहीं 65 हाउसिंग प्रोजेक्ट पाइपलाइन में हैं।

बिल्डर की भूमिका में लोक निर्माण विभाग

अब तक PWD का नाम आते ही डामर, गिट्टी, पुल याद आते थे। अब विभाग अपनी भूमिका को विस्तार दे रहा है। सरकार की रिडेंसिफिकेशन पॉलिसी के सहारे लोक निर्माण विभाग अब बिल्डर की भूमिका में नजर आएगा। यानी घनी आबादी में स्थित पुराने सरकारी मकानों को तोड़कर मल्टीस्टोरी बिल्डिंग, ऑफिस, कॉम्प्लेक्स और दुकानें भी बनाएगा।

इसकी शुरूआत शाहजहांनाबाद के रामनगर में खंडहर हो चुके पुलिस क्वार्टर से हो रही है। इन आवासों को तोड़कर सरकारी जमीन पर रिडेंसीफिकेशन नीति के तहत आवास, दुकान, ऑफिस तैयार कराए जाएंगे। विभाग द्वारा इसके लिए जमीनी परीक्षण और जरूरतों का अध्ययन कराया जा रहा है। इसी के आधार पर डीपीआर बनेगी।

घाटे से बचने पुराने विवादों से नसीहत

राजधानी भोपाल के टीटीनगर क्षेत्र में सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट लीज-फ्री होल्ड के झगड़े में उलझ गया था। इस प्रोजेक्ट के कारण सालों तक बिल्डर के करोड़ों रुपए भी उलझे रहे। जिसके कारण बिल्डर ऐसे सरकारी प्रोजेक्ट से किनारा बनाकर चल रहे थे। ऐसे विवाद और होने वाले घाटे से बचने लोक निर्माण विभाग ने काफी तैयारी की है।

इसी वजह से सरकार की नई पॉलिसी में पीपीपी मॉडल के पेंच दूर किए गए हैं। अब डेवलपर को जमीन के बदले ऐसे प्रोजेक्ट में आवासीय और व्यावसायिक अधिकार मिलेंगे। यानी बिल्डर आवासीय प्रोजेक्ट के साथ व्यावसायिक इंफ्रा के रूप में दुकानें भी बनाएंगे। इससे उन्हें होने वाले नुकसान की आशंका कम होगा।

हाउसिंग बोर्ड के पास ओवर प्रोजेक्ट

रिडेंसिफिकेशन की रेस में अब तक हाउसिंग बोर्ड इकलौता दौड़ रहा था। उसके एक दो प्रतिस्पर्धी के रूप में भोपाल और इंदौर की सरकारी एजेंसियां ही थीं। प्रदेश के 20 जिलों में MPHIDB के 28 प्रोजेक्ट चल रहे हैं। वहीं 65 प्रोजेक्ट जमीन पर उतारने की तैयारी है। दोनों को मिलाकर बोर्ड के पास 17 हजार करोड़ के आवासीय प्रोजेक्ट हैं। आवासीय परियोजनाओं के हजारों करोड़ के निवेश ने ही लोक निर्माण विभाग को लुभाया है। हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट से मुनाफे के बड़े आंकड़े से आकर्षित पीडब्ल्युडी के अधिकारी भी उसी राह पर चल पड़े हैं।

भोपाल से नए सफर की शुरूआत

पीडब्ल्युडी अपने पहले प्रोजेक्ट की शुरूआत भोपाल से करने जा रहा है। राजधानी में बीडीए ने करीब 15 साल पहले रामनगर में जमीन पर कब्जे और दूसरी उलझनों के कारण प्रोजेक्ट छोड़ दिया था। इसका खामियाजा ठेकेदार को उठाना पड़ा था। पीडब्ल्युडी ने इसी अधूरे प्रोजेक्ट को अपना पहला काम बनाया है। नई रिडेंसीफिकेशन नीति के कारण पुरानी उलझनें सुलझने से इस प्रोजेक्ट पर काम करना आसान हो गया है।

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