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बेटियों की बोली नहीं लगेगी, सूचना आयोग ने नाता प्रथा पर MP-UP और राजस्थान से मांगी कार्रवाई रिपोर्ट

बेटियों की बोली नहीं लगेगी, सूचना आयोग ने नाता प्रथा पर MP-UP और राजस्थान से मांगी कार्रवाई रिपोर्ट

NEWS IN SHORT

  • मध्यप्रदेश, राजस्थान और UP में नाता प्रथा के नाम पर लड़कियां बेची जाती हैं।

  • इस प्रथा में लड़कियों की कीमत 50 हजार से 3 लाख रुपए तक होती है।

  • केंद्रीय सूचना आयोग ने तीनों राज्यों को नोटिस दिया है।

  • आयोग ने कार्रवाई रिपोर्ट सार्वजनिक करने का आदेश दिया है।

  • पोक्सो मामलों में बार-बार बेल मिलने पर भी आयोग ने नाराजगी जताई।

NEWS IN DETAIL

नाता प्रथा: बिकती हैं बेटियां

मध्यप्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की धरती पर सदियों से एक कुप्रथा (बाल विवाह) चली आ रही है। इसका नाम है "नाता प्रथा"। इसमें महिलाओं और लड़कियों को पैसे लेकर दूसरे पुरुष को सौंप दिया जाता है।

यह परंपरा खासतौर पर कुछ आदिवासी और पिछड़े समुदायों में आज भी जिंदा है। केंद्रीय सूचना आयोग (Central Information Commission) ने अब इस मुद्दे पर तीनों राज्यों को जवाबदेह बनाने की कोशिश शुरू कर दी है।

आयोग के पास RTI (Right to Information Act) के तहत एक याचिका पहुंची थी। इस पर सुनवाई करते हुए आयोग ने मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकार को आदेश दिया कि वे नाता प्रथा के खिलाफ हुई कार्रवाई की "कार्रवाई रिपोर्ट" (Action Taken Report) सार्वजनिक करें।

50 हजार से 3 लाख में बिकती हैं लड़कियां

रिपोर्ट के मुताबिक इन राज्यों में नाता प्रथा के नाम पर छोटी लड़कियों को 50 हजार रुपए से लेकर 3 लाख रुपए तक में बेचा जाता है। यह किसी एक जिले या गांव की बात नहीं है। यह प्रथा कई जिलों में फैली हुई है और इसके पीड़ित ज्यादातर वंचित तबके की महिलाएं और बच्चियां हैं।

आयोग ने माना कि इस शोषण के सामने आने के बाद भी राज्य सरकारों ने इसे रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए। यही वजह है कि अब आयोग ने रिपोर्ट सार्वजनिक करने का आदेश दिया है ताकि पारदर्शिता आ सके।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को निर्देश

केंद्रीय सूचना आयोग ने इस मामले में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women and Child Development) को भी निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा कि मंत्रालय राज्यों पर दबाव बनाए और यह सुनिश्चित करे कि नाता प्रथा के खिलाफ ठोस और दस्तावेजी कदम उठाए जाएं।

सुनवाई में आयुक्त अनुराग रमेश ने कहा कि RTI याचिकाकर्ता इस जानकारी को अभी नहीं पा सकते, लेकिन खामोश शिकायतकर्ता को ढूंढने और परिवारों से निजी जानकारी लेने में यह रिपोर्ट मददगार हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस प्रथा की कार्रवाई रिपोर्ट सार्वजनिक हो। आयोग ने इस मुद्दे को रियल टाइम यानी तत्काल महत्व का विषय माना।

पॉक्सो मामलों पर बार-बार बेल पर आपत्ति

आयोग ने इस मामले में एक और गंभीर बात कही। POCSO (Protection of Children from Sexual Offences Act) के तहत दर्ज मामलों में आरोपियों को बार-बार जमानत मिल जाती है। आयोग ने इस पर गहरी नाराजगी जताई। कहा कि पोक्सो जैसे संवेदनशील मामलों में जमानत पर सख्त नजर रखनी चाहिए।

आयोग का यह भी मानना है कि जब तक इन मामलों में कठोर कार्रवाई नहीं होती, तब तक नाता प्रथा जैसी कुरीतियां बंद नहीं होंगी।

मानव तस्करी और पॉलिसी पर विशेष ध्यान

आयोग ने इस मसले को मानव तस्करी (Human Trafficking) की श्रेणी से जोड़ा है। आयोग ने सिफारिश की है कि राज्य सरकारें नाता प्रथा को रोकने के लिए ठोस नीतियां बनाएं। जहां भी नाबालिगों को इसमें शामिल करने की जानकारी मिले, वहां तुरंत कड़ी कार्रवाई हो।

राजस्थान में तो इससे पहले भी एनएचआरसी (National Human Rights Commission) और संबंधित राज्य सरकारों के बीच इस मुद्दे पर पत्राचार हो चुका है। राजस्थान में बार-बार ऐसे मामले सामने आते रहे हैं, जिनमें एनएचआरसी ने नाबालिगों से जुड़े एक गंभीर मामले का जिक्र किया।

खबर क्यों जरूरी है?

यह खबर इसलिए अहम है क्योंकि नाता प्रथा सिर्फ एक सामाजिक कुरीति नहीं, बल्कि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 23 (मानव तस्करी पर प्रतिबंध) का सीधा उल्लंघन है।

लड़कियों को पैसे में बेचना उनकी गरिमा और मानवाधिकारों का हनन है। डिजिटल युग में जब सूचना का अधिकार एक शक्तिशाली हथियार बन चुका है, तब सूचना आयोग का यह आदेश बताता है कि पारदर्शिता और जवाबदेही से ही बदलाव आएगा।

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