समझें क्या है पूरा मामला...
- कटनी में 10 हजार 400 वर्गफीट कमर्शियल जमीन की असली कीमत 3.86 करोड़ रुपए थी।
- निधि पाठक ने जमीन को दो हिस्सों में बांटकर अलग-अलग रजिस्ट्री कराई थी।
- जांच में 27.43 लाख स्टांप शुल्क और 2.90 लाख पंजीयन शुल्क चोरी पाई गई है।
- कुल 28.53 लाख रुपए की राजस्व हानि का पता चला है।
- कोर्ट ने ब्याज और दंड सहित 59 लाख रुपए जुर्माना लगाया है।
विधायक पत्नी पर स्टांप चोरी के आरोप
मध्य प्रदेश के कटनी जिले से एक बड़ा मामला सामने आया है। खनन कारोबार से जुड़े विजयराघवगढ़ के भाजपा विधायक संजय पाठक का परिवार राजस्व चोरी के मामले में फंस गया है। आरोप है कि उनकी पत्नी निधि पाठक ने करोड़ों की व्यावसायिक जमीन खरीदी, लेकिन स्टांप और पंजीयन शुल्क बचाने के लिए एक चाल चली। जमीन के दो टुकड़े कर अलग-अलग रजिस्ट्री कराई गई थी।
शहर की सबसे महंगी जमीन पर सौदा
यह मामला कटनी शहर के सबसे महंगे और व्यावसायिक इलाकों में से एक से जुड़ा है। खसरा नं. 289/8, 289/9 और 289/23 की 10 हजार 400 वर्गफीट जमीन का सौदा किया गया था। यह जमीन महाराणा प्रताप वार्ड में है। करोड़ों की इस एकमुश्त व्यावसायिक जमीन को चार दिनों में दो हिस्सों में बांटकर अलग-अलग रजिस्ट्री करा ली गई थी।
पंजीयन विभाग की जांच में सामने आया कि जमीन की वास्तविक गाइडलाइन मूल्य तीन करोड़ 86 लाख रुपए था। वहीं, दस्तावेजों में सिर्फ 96 लाख रुपए ही दिखाए गए थे। यह असली कीमत से चार गुना कम था।
कैसे हुई गाइडलाइन की हेरफेर?
जांच में जो बात निकलकर आई, वह और भी चौंकाने वाली है। जमीन का बड़ा हिस्सा मुख्य सड़क से जुड़ी श्रेणी में था। इस श्रेणी में गाइडलाइन 6,600 रुपए प्रति वर्गमीटर थी।
लेकिन दस्तावेज 39 लाख रुपए में लिखे गए, यानी गाइडलाइन को 40 हजार रुपए प्रति वर्गमीटर की बजाय महज छह हजार 600 रुपए पर दिखाया गया था। बेनामी 57 लाख रुपए में अंजाम दिया गया है।
चार दिन बाद 24 दिसंबर 2020 को आगे का 1050 वर्गफीट का हिस्सा खरीदा गया था। यहां कम गाइडलाइन वाली जमीन की तरह पेश किया गया था। 20 दिसंबर 2021 को पीछे का 9350 वर्गफीट हिस्सा भी खरीदा गया था।
सुनवाई में चार मौके, निधि नहीं आईं
मामले में कोर्ट ने सुनवाई के चार मौके दिए थे। 16 और 28 जनवरी, 10 और 25 फरवरी 2026 की तारीखें दी गईं थी। वहीं, निधि पाठक न तो डाक पर जवाब दे पाईं और न ही किसी सुनवाई में उपस्थित हुईं।
कलेक्टर ऑफ स्टांप ने जांच में स्टांप चोरी सही पाई है। कोर्ट ने वसूली के लिए बकाया रकम जमा करने का आदेश दिया है। 27 लाख 43 हजार स्टांप शुल्क चोरी और 2.90 लाख पंजीयन शुल्क चोरी दर्ज की गई है। इस तरह कुल 28 लाख 53 हजार राजस्व हानि प्रमाणित हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक ब्याज और दंड जोड़ने के बाद विधायक पत्नी को 59 लाख रुपए देने होंगे।
FAQ
Q. स्टांप ड्यूटी चोरी क्या होती है और इसमें क्या सजा हो सकती है? A. स्टांप ड्यूटी वह शुल्क है जो संपत्ति की खरीद-बिक्री के समय सरकार को चुकाना होता है। इसकी गणना जमीन की गाइडलाइन मूल्य के आधार पर होती है। जब कोई जानबूझकर जमीन की कीमत कम दिखाता है या जमीन को टुकड़ों में तोड़कर रजिस्ट्री कराता है ताकि कम शुल्क लगे, तो यह स्टांप चोरी कहलाती है। Indian Stamp Act और Registration Act के तहत ऐसे मामलों में चोरी की गई राशि, ब्याज और जुर्माना मिलाकर कई गुना वसूली हो सकती है। गंभीर मामलों में आपराधिक कार्रवाई भी संभव है।
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