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ब्रिटेन के राजा को छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी का पत्र; शिवाजी महाराज के वाघ नख और जगदंबा तलवार' पर ठोंका दावा

ब्रिटेन के राजा को छत्तीसगढ़ सिविल सोसायटी का पत्र; शिवाजी महाराज के वाघ नख और जगदंबा तलवार' पर ठोंका दावा

NEWS IN SHORT

  • भारत की प्राचीन धरोहर की वापसी का कड़ा अल्टीमेटम
  • ब्रिटिश संग्रहालय में रखी कलाकृतियां भारत की अस्मिता का हिस्सा
  • छत्रपति शिवाजी महाराज की कलाकृतियों की वापसी की मांग
  • सोसायटी ने 6 जून 2026 तक वापसी न होने पर ICJ जाने की दी धमकी
  • भारत की 211 बेशकीमती धरोहरों की वापसी की मांगी गई है

NEWS IN DETAIL

Raipur।छत्तीसगढ़ सिविल सोसाइटी ने ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय को एक कड़ा पत्र भेजा है। पत्र में भारत की प्राचीन धरोहरों की वापसी के लिए छह जून 2026 तक का समय दिया गया है।

ब्रिटिश संग्रहालय में रखी कलाकृतियां भारत की पहचान हैं

सिविल सोसायटी के संयोजक कुलदीप सोलंकी ने पत्र में कहा कि ब्रिटिश संग्रहालय में रखी भारतीय कलाकृतियां सिर्फ वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि ये भारत की अस्मिता का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब भारत उन धरोहरों को वापस ले, जो औपनिवेशिक शासन के दौरान बलपूर्वक या धोखे से ब्रिटेन ले ली गईं।

छत्रपति शिवाजी महाराज की कलाकृतियों की वापसी की मांग

पत्र में विशेष रूप से छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़ी कलाकृतियों की वापसी की मांग की गई है। इनमें छत्रपति शिवाजी महाराज का वाघ नख, जगदंबा तलवार शामिल हैं। साथ ही उनके तैल चित्र की भी वापसी की बात की गई है।

आईसीजे में जाएगी सोसायटी

सोसायटी ने यह स्पष्ट किया कि अगर छह जून 2026 तक इन धरोहरों की भारत को सम्मानजनक वापसी नहीं की जाती, तो वे अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) का दरवाजा खटखटाएंगे। इसके साथ ही इन वस्तुओं के प्रदर्शन से ब्रिटेन द्वारा अर्जित किए गए राजस्व और ब्याज सहित 5 लाख ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक हर्जाने का दावा किया जाएगा।

211 बेशकीमती धरोहरों की वापसी की मांग

पत्र में कुल 211 बेशकीमती धरोहरों का उल्लेख किया गया है, जिनकी वापसी की मांग की गई है। इनमें प्रमुख हैं:

अमरावती स्तूप के अवशेष (लगभग 2,000 साल पुराने मार्बल्स)
होयसल कला की मूर्तियां (12वीं-13वीं शताब्दी)
शिव नटराज की कांस्य प्रतिमाएं (चोल काल)
सम्राट अशोक के शिलालेख (ब्राह्मी लिपि में अंकित)
मुगल-राजपूत लघु चित्र (दरबारी जीवन और शौर्य गाथाएं)
धार्मिक मूर्तियां (भगवान गणेश, दुर्गा, सूर्य देव, विष्णु, और जैन तीर्थंकरों की प्राचीन प्रतिमाएं)

सोसायटी का कहना है कि ये धरोहरें भारत की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा हैं, और उन्हें सम्मानपूर्वक लौटाया जाना चाहिए।

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