समझें क्या है पूरा मामला
सीबीएसई 12वीं बोर्ड में ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम पर विवाद खड़ा हो गया है।
परीक्षा में शामिल हर चौथे छात्र ने अपनी आंसर शीट की स्कैन कॉपी मांगी है।
करीब 4 लाख छात्रों ने रिकॉर्ड 4.3 लाख कॉपियों के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है।
शिक्षकों पर दबाव के कारण धुंधली और ब्लर कॉपियों को ही जांचने का आरोप लगा है।
पोर्टल हैक होने के दावों को खारिज करते हुए बोर्ड ने सारा डेटा सुरक्षित बताया है।
सीबीएसई OSM सिस्टम पर मचा भारी बवाल
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई की 12वीं परीक्षा के नतीजों के बाद हंगामा खड़ा हो गया है। इस बार बोर्ड ने डिजिटल तरीके से कॉपियों की जांच के लिए नया सिस्टम लागू किया था। इसे ऑन स्क्रीन मार्किंग या ओएसएम (OSM) सिस्टम कहा जाता है।
लेकिन इस नए सिस्टम को लेकर छात्रों की बहुत ही परेशान करने वाली प्रतिक्रिया सामने आई है। परीक्षा में शामिल होने वाले हर चौथे छात्र ने कॉपियों के मूल्यांकन पर आपत्ति जताई है। देश के किसी भी एजुकेशन बोर्ड के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है।
चार लाख से ज्यादा छात्रों ने मांगी अपनी शीट
बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस साल परीक्षा में 17 लाख 68 हजार 962 छात्र बैठे थे। इनमें से 4 लाख 4 हजार यानी करीब 22.85% छात्रों ने अपनी कॉपियों की स्कैन कॉपी मांगी है। इन सभी छात्रों ने कुल मिलाकर 4 लाख 31 हजार 964 आंसरशीट के लिए आवेदन किया है।
यह संख्या पिछले साल के मुकाबले पूरे चार गुना ज्यादा है। बोर्ड ने बताया कि मंगलवार शाम तक 3,98,244 आंसरशीट छात्रों को भेजी जा चुकी हैं। कॉपियों की इतनी भारी मांग देखकर खुद शिक्षा विशेषज्ञ भी हैरान हैं।
गड़बड़ी से अटके आवेदन 27 मई तक होंगे साफ
सीबीएसई की वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक के कारण कुछ तकनीकी दिक्कतें भी सामने आई हैं। इसके चलते कई छात्रों के आवेदन और पेमेंट वेरिफिकेशन की प्रक्रिया बीच में ही अटक गई थी। बोर्ड ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि परेशान होने की जरूरत नहीं है।
पेंडिंग पड़े सभी आवेदनों को 27 मई तक हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा। इसके ठीक बाद यानी 29 मई से पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) की मुख्य प्रक्रिया शुरू होगी। अंतिम आंसरशीट जारी होने के दो दिन बाद तक छात्र इसके लिए अप्लाई कर सकेंगे।
शिक्षकों ने जांच दीं धुंधली कॉपियां
इस पूरे विवाद के पीछे एक बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। डिजिटल सिस्टम में धुंधली या ब्लर कॉपी को रिजेक्ट करने का एक साफ विकल्प मौजूद था। लेकिन दो दिन के अतिरिक्त काम से बचने के लिए शिक्षकों ने ऐसा नहीं किया।
शिक्षकों ने कंप्यूटर स्क्रीन पर दिख रही धुंधली कॉपियों को ही फटाफट जांच डाला। इस वजह से कई छात्रों को या तो जीरो नंबर मिले या बहुत ही कम मार्क्स दिए गए। कुछ शिक्षकों ने तो अपने मन से ही नंबर चढ़ा दिए।
मैन्युअल क्रॉस चेकिंग न होना बनी वजह
शिक्षकों का कहना है कि इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया बहुत देरी से शुरू की गई थी। पहले कॉपियां परीक्षा खत्म होने के 40 दिन के भीतर जांच ली जाती थीं। लेकिन इस बार शिक्षकों को एक महीने की देरी से बुलाया गया।
इस देरी से शिक्षकों पर रोजाना 12 से 15 कॉपियां चेक करने का भारी दबाव आ गया। इसके अलावा, पुरानी व्यवस्था की तरह इस बार कॉपियों की मैन्युअल क्रॉस-चेकिंग भी नहीं की गई। सिर्फ कुछ रैंडम कॉपियों की ही जांच सीनियर स्तर पर की गई।
पोर्टल हैक होने के दावे को बोर्ड ने पूरी तरह नकारा
इसी बीच सोशल मीडिया पर एक और सनसनीखेज दावा सामने आया है। निसर्ग अधिकारी नाम के एक 19 साल के लड़के ने दावा किया कि उसने बोर्ड का ओएसएम पोर्टल हैक कर लिया था। इस दावे के बाद इंटरनेट पर कई तरह की खबरें चलने लगीं।
हालांकि, सीबीएसई ने इस मामले पर तुरंत कड़ा रुख अपनाते हुए बयान जारी किया है। बोर्ड ने साफ कहा कि कॉपियों की जांच के लिए इस्तेमाल होने वाला असली पोर्टल बिल्कुल अलग और सुरक्षित है। सुरक्षा में किसी भी तरह की सेंधमारी नहीं हुई है।
राहुल गांधी ने किया ट्वीट
*pointer-events-auto R6Vx5W_threadScrollVars scroll-mb-[calc(var(--scroll-root-safe-area-inset-bottom,0px)+var(--thread-response-height))] scroll-mt-[calc(var(--header-height)+min(200px,max(70px,20svh)))]" dir="auto" data-turn-id="request-WEB:5a4866f3-204b-4955-9db9-ebdab5caa686-16" data-turn-id-container="request-WEB:5a4866f3-204b-4955-9db9-ebdab5caa686-16" data-testid="conversation-turn-20" data-scroll-anchor="false" data-turn="assistant">राहुल गांधी ने CBSE विवाद पर ट्वीट किया है कि परीक्षा परिणाम में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है, जिससे लाखों छात्रों और उनके माता-पिता चिंतित हैं।
उन्होंने COEMPT कंपनी की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए, जिसे पहले तेलंगाना में Globarena नाम से विवादों में देखा गया था। उन्होंने न्यायिक जांच और SIT की तत्काल मांग की है ताकि वास्तविक दोषियों को उजागर किया जा सके और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा हो।
पिछले साल के मुकाबले इस बार स्थिति ज्यादा गंभीर
अगर साल 2025 के रिकॉर्ड देखें तो तब 1 लाख 34 हजार छात्रों ने 2 लाख 82 हजार कॉपियां मांगी थीं। उनमें से 50 हजार छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए फॉर्म भरा था। तब केवल 3 हजार छात्रों के नंबर बढ़े थे और कुछ के कम हुए थे।
लेकिन इस बार कॉपियों की डिजिटल स्कैनिंग और ओएसएम सिस्टम ने पूरी कहानी बदल दी है। छात्र अब अंकों के वेरिफिकेशन और प्रति सवाल पुनर्मूल्यांकन के लिए तेजी से आगे आ रहे हैं। बोर्ड अब पूरे मामले को शांत करने की कोशिश में जुटा है।
FAQ
Q. सीबीएसई का ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम क्या है और इस पर क्या विवाद है? A. सीबीएसई का ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) एक डिजिटल मूल्यांकन सिस्टम है। इस बार विवाद यह है कि कॉपियां बहुत देरी से जांची गईं और शिक्षकों ने अतिरिक्त काम से बचने के लिए शिक्षकों ने धुंधली (Blur) कॉपियों को ही जांच दिया, जिससे छात्रों के नंबर कम हो गए। Q. उत्तरपुस्तिका की स्कैन कॉपी और पुनर्मूल्यांकन के लिए सीबीएसई का नया शेड्यूल क्या है? A. बोर्ड के अनुसार, वेबसाइट पर तकनीकी गड़बड़ी के कारण जो आवेदन अटके हुए थे, उन्हें 27 मई तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद 29 मई से पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो जाएगी। Q. क्या सोशल मीडिया पर सीबीएसई ओएसएम पोर्टल हैक होने का दावा सच है? A. नहीं, सीबीएसई ने पोर्टल हैक होने के दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सोशल मीडिया पर एक 19 वर्षीय युवक निसर्ग अधिकारी ने दावा किया था कि उसने 26 फरवरी को सीबीएसई का मार्किंग पोर्टल हैक कर लिया था।
CBSE Three-Language Policy: सीबीएसई के नए नियम से बच्चों पर बढ़ा दबाव, पैरेंट्स नाराज
SSC GD Exam 2026: NEET और CBSE के बाद अब SSC GD में भारी लापरवाही, कई केंद्रों पर हंगामा
CBSE री-इवैल्युएशन की लास्ट डेट आज, पोर्टल पर 100 की जगह 8 हजार दिख रही फीस

