समझें क्या है पूरा मामला
सीबीएसई के नए डिजिटल ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) पर भारी विवाद छिड़ गया है।
खराब स्कैनिंग और कॉपियां बदलने के आरोपों के बाद पुराना सिस्टम लागू करने की मांग उठी है।
विवादों के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस डिजिटल व्यवस्था का खुलकर समर्थन किया है।
सीबीएसई के पुनर्मूल्यांकन पोर्टल पर साइबर हमला हुआ जिससे फीस की राशि में गड़बड़ी दिखी।
बोर्ड 1 जून 2026 से कॉपियों की दोबारा जांच के लिए नया पोर्टल खोलने जा रहा है।
सीबीएसई डिजिटल मार्किंग सिस्टम पर नया विवाद?
सीबीएसई बोर्ड परीक्षा के नतीजों के बाद एक नया डिजिटल संकट खड़ा हो गया है। बोर्ड ने इस बार पहली बार ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम (OSM) का इस्तेमाल किया था। लेकिन इस नए सिस्टम को लेकर छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
लाखों छात्रों का आरोप है कि इस नए तरीके से कॉपियों की सही जांच नहीं हुई। कॉपियां डाउनलोड करने पर खराब स्कैनिंग और पन्ने गायब होने जैसी गड़बड़ियां सामने आईं। कुछ छात्रों को तो किसी दूसरे बच्चे की उत्तर पुस्तिका थमा दी गई।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया बचाव
इस बढ़ते विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने इस डिजिटल मार्किंग सिस्टम का खुलकर बचाव और समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यह बच्चों के हित में लिया गया एक प्रगतिशील कदम है।
शिक्षा मंत्री के अनुसार दुनिया के कई बड़े शिक्षण संस्थान इस तकनीक को अपना रहे हैं। भारत की भी अनेक यूनिवर्सिटी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। यह सिस्टम पूरी तरह पारदर्शी है और इससे गड़बड़ियां रोकने में मदद मिलेगी।
1 जून से खुलेगा नया पोर्टल
साइबर हमले और गड़बड़ी के बाद बोर्ड ने तुरंत कड़े सुरक्षा कदम उठाए हैं। सीबीएसई अब 1 जून 2026 से एक नया 'पोस्ट-रिजल्ट एक्टिविटीज' पोर्टल शुरू करने जा रहा है। इस पोर्टल को पूरी तरह सुरक्षित और एरर-फ्री बनाया गया है।
छात्र इस नए सुरक्षित पोर्टल पर जाकर पारदर्शिता के साथ आवेदन कर सकेंगे। बोर्ड का लक्ष्य है कि मूल्यांकन के उच्चतम मानकों का पूरी तरह पालन हो। छात्रों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
40 करोड़ से ज्यादा पेजों की डिजिटल स्कैनिंग
शिक्षा मंत्री ने परीक्षा के विशाल आंकड़ों को देश के सामने मजबूती से रखा। उन्होंने बताया कि इस बार परीक्षा में करीब 17 लाख विद्यार्थी शामिल हुए थे। इन सभी छात्रों की कुल कॉपियों की संख्या लगभग 98 लाख थी।
इसका मतलब है कि मूल्यांकन के लिए करीब 40 करोड़ पेजों की स्कैनिंग की गई। इतनी बड़ी संख्या में पहली बार डिजिटल काम होने से कुछ शुरुआती दिक्कतें आई हैं। सरकार इन सभी विसंगतियों को दूर करने के लिए लगातार काम कर रही है।
4 लाख से ज्यादा छात्रों ने किया दोबारा आवेदन
इस गड़बड़ी के बाद करीब 4 लाख से ज्यादा छात्र कॉपियों की दोबारा जांच करवा रहे हैं। इन छात्रों की लगभग 11 लाख कॉपियां री-इवैल्युएशन (CBSE Revaluation) के दायरे में आ चुकी हैं। सरकार ने इस काम के लिए देश की सर्वश्रेष्ठ तकनीकी एजेंसियों को लगाया है।
भारत सरकार की टेक्नोलॉजी को सर्टिफाई करने वाली बड़ी एजेंसियां भी जांच में जुटी हैं। शिक्षा मंत्री ने भरोसा दिया कि किसी भी छात्र की शिकायत को अनसुना नहीं किया जाएगा। हर एक बच्चे की जिज्ञासा का पूरा समाधान किया जाएगा।
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