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CGPSC Scam : 50 की फाइल 152 में खरीदी, सोनवानी पर लगा एक और बड़ा आरोप

CGPSC Scam : 50 की फाइल 152 में खरीदी, सोनवानी पर लगा एक और बड़ा आरोप

समझें क्या है पूरा मामला

सीजीपीएससी के पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी पर नया आरोप लगा है। उन्होंने विभागीय जांच में दोषी पाए गए अफसर को दोषमुक्त कर दिया। नियमों को ताक पर रखकर उस अधिकारी को प्रमोशन भी दिया गया।

दोषी को बचाने के लिए 73 निर्दोष अधीक्षकों से वसूली का आदेश दिया। इस पूरे मामले की शिकायत अब सीबीआई और ईओडब्ल्यू तक पहुंच गई है।

सोनवानी पर नया आरोप

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। जेल में बंद पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी पर नया आरोप लगा है। उन पर नियमों को ताक पर रखने का आरोप है।

उन्होंने एक दागी अधिकारी को अनुचित लाभ पहुंचाया। साथ ही निर्दोष कर्मचारियों पर वित्तीय जुर्माना ठोक दिया। यह मामला अब सीबीआई (CBI) तक पहुंच चुका है।

यह मामला आदिम जाति विकास विभाग से जुड़ा हुआ है। उस समय भूपेंद्र कुमार राजपूत रायगढ़ में सहायक आयुक्त थे। वर्ष 2020 में छात्रावासों के लिए रजिस्टर खरीदे गए थे।

वसूली प्रस्ताव पर अध्यक्ष का खेल

बाजार में 50 रुपए की पंजी 152 रुपए में खरीदी गई। इस खरीदी में भारी वित्तीय अनियमितता पाई गई थी। मामला सामने आने पर विभागीय जांच बैठाई गई थी।

जांच में गड़बड़ी की पुष्टि हुई थी। आयोग के नामांकित सदस्य सुकृत लाल साव ने रिपोर्ट दी थी। उन्होंने भूपेंद्र राजपूत से 50 प्रतिशत राशि वसूली की सिफारिश की थी।

इसके साथ ही उनके खिलाफ निंदा का प्रस्ताव रखा गया था। कुल 1,48,920 रुपये की वसूली का अभिमत दर्ज हुआ था। लेकिन तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने नियम बदल दिए। आयोग नियमावली के अनुसार अध्यक्ष अकेले फैसला नहीं ले सकते। मतभेद होने पर मामला पूर्ण आयोग के पास जाता है।

अध्यक्ष ने इस नियम को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने अकेले टिप्पणी लिखकर दंडात्मक प्रस्ताव निरस्त कर दिया। आरोपी अधिकारी को पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया गया।

73 निर्दोष अधीक्षकों पर वसूली का बोझ

आरोपी अफसर को बचाने के लिए नया रास्ता निकाला गया। आयोग ने 73 छात्रावास अधीक्षकों से वसूली की सिफारिश कर दी। इन कर्मचारियों का इस गड़बड़ी से कोई लेना-देना नहीं था।

उन्हें अपनी बात रखने का मौका भी नहीं मिला। टामन सिंह ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह फैसला सुनाया। इससे निर्दोष कर्मचारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

इस अवैध अनुशंसा के दम पर दागी अफसर को फायदा मिला। भूपेंद्र कुमार राजपूत को प्रमोट कर अतिरिक्त संचालक बनाया गया। वर्तमान में वे मंत्रालय में संयुक्त सचिव पद पर तैनात हैं।

आरटीआई (RTI) कार्यकर्ता आशीष देव सोनी ने इसका खुलासा किया है। उन्होंने दस्तावेजों के आधार पर शिकायत दर्ज कराई है। मामले की शिकायत सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) से भी की गई है। मुख्य सचिव विकासशील से भी लिखित शिकायत की गई है।

शिकायत में अवैध परामर्श पत्र को निरस्त करने की मांग है। दोषी अधिकारियों से राशि की रिकवरी करने की मांग उठी है। पूरे मामले की नए सिरे से समीक्षा की अपील की गई है।


FAQ
Q. छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) क्या है और इसका क्या काम है? A. उत्तर: सीजीपीएससी छत्तीसगढ़ सरकार का एक संवैधानिक निकाय है। इसका मुख्य काम राज्य प्रशासनिक सेवाओं, डिप्टी कलेक्टर, डीएसपी और अन्य श्रेणी-1 व श्रेणी-2 के सरकारी पदों के लिए भर्ती परीक्षाएं और साक्षात्कार आयोजित करना है। Q. भारत में आरटीआई (RTI) एक्ट क्या है और यह नागरिकों को क्या अधिकार देता है? A. उत्तर: सूचना का अधिकार (RTI) कानून 2005 में लागू हुआ था। यह भारत के नागरिकों को किसी भी सरकारी विभाग से सवाल पूछने और उसके कामकाज से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज व जानकारी मांगने का कानूनी अधिकार देता है। Q. सीबीआई (CBI) और ईओडब्ल्यू (EOW) में क्या अंतर है? A. उत्तर: सीबीआई (Central Bureau of Investigation) केंद्र सरकार की प्रमुख जांच एजेंसी है जो देशभर के बड़े और अंतरराज्यीय अपराधों की जांच करती है। वहीं, ईओडब्ल्यू (Economic Offences Wing) राज्य पुलिस की एक विशेष शाखा होती है जो केवल वित्तीय धोखाधड़ी और आर्थिक अपराधों की जांच करती है।

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