समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों और शालाओं के युक्तियुक्तकरण की नीति को सही ठहराया है। इस नीति के खिलाफ दायर 24 से ज्यादा याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं।
कोर्ट ने कहा कि यह फैसला बड़े जनहित में है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि किसी कर्मचारी को एक ही जगह जमे रहने का कानूनी अधिकार नहीं है। इस नीति से करीब 16 हजार शिक्षकों और प्राचार्यों पर सीधा असर पड़ेगा। बिलासपुर स्थित हाईकोर्ट में यह सुनवाई हुई। यह फैसला प्रदेशभर के शिक्षा विभाग के लिए बड़ा माना जा रहा है।
किसने दायर की थीं याचिकाएं
छत्तीसगढ़ विद्यालयीन शिक्षक कर्मचारी संघ सहित प्रदेशभर के कई शिक्षकों ने युक्तियुक्तकरण नीति के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था। कुल 24 से अधिक याचिकाएं दायर हुई थीं। इन सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई। कोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए सरकार की नीति को बरकरार रखा।
कोर्ट ने क्या कहा
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि स्कूलों में शिक्षकों का असमान वितरण एक बड़ी समस्या रही है। इसे सुधारने के लिए सरकार का यह कदम जरूरी और जनहित में है।कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रांसफर और पोस्टिंग सरकार के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का हिस्सा हैं। किसी भी सरकारी कर्मचारी को एक ही जगह पर बने रहने का कोई संवैधानिक या कानूनी अधिकार नहीं है।
कितने शिक्षकों पर पड़ेगा असर
प्रदेश के ग्रामीण और अंदरूनी इलाकों में कई स्कूल शिक्षक विहीन या एकल-शिक्षकीय हालत में हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत 16,165 शिक्षकों और प्राचार्यों को शामिल किया गया है। राज्य की कुल 10,463 शालाओं में यह प्रक्रिया लागू हो रही है। इनमें से ज्यादातर एक ही परिसर में संचालित हो रहे स्कूल हैं।
सरस्वती वंदना और गायत्री मंत्र वाली याचिका भी खारिज
इसी दौरान एक और अहम मामले में हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया। सरकारी स्कूलों में रोज सरस्वती वंदना, गायत्री मंत्र और भोजन मंत्र पढ़ाए जाने के सरकारी आदेश के खिलाफ याचिका दायर हुई थी। यह आदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने 12 जून 2026 को जारी किया था। याचिकाकर्ताओं ने इसे संविधान के अनुच्छेद 28 की भावना के खिलाफ बताया था। साथ ही अनुच्छेद 14, 21 और 25 के उल्लंघन का भी दावा किया गया था।कोर्ट ने इस याचिका को भी खारिज कर दिया। इस तरह सरकार का यह आदेश फिलहाल बरकरार रहेगा।
आगे क्या असर पड़ेगा
युक्तियुक्तकरण नीति पर मुहर लगने के बाद अब हजारों शिक्षकों का स्थानांतरण तय माना जा रहा है। इससे ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर होने की उम्मीद है। वहीं दूसरी याचिका खारिज होने के बाद स्कूलों में मंत्र और वंदना पाठ को लेकर फिलहाल कोई कानूनी अड़चन नहीं रहेगी। दोनों फैसलों से शिक्षा विभाग को बड़ी राहत मिली है।
FAQ
Q. हाईकोर्ट ने शिक्षक युक्तियुक्तकरण पर क्या फैसला दिया? A. हाईकोर्ट ने युक्तियुक्तकरण नीति के खिलाफ दायर सभी याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि यह नीति जनहित में है। कर्मचारी को एक जगह जमे रहने का अधिकार नहीं है। Q. युक्तियुक्तकरण से कितने शिक्षक प्रभावित होंगे? A. इस प्रक्रिया से 16,165 शिक्षकों और प्राचार्यों पर असर पड़ेगा। कुल 10,463 शालाओं में यह लागू हो रहा है। ज्यादातर एक ही परिसर के स्कूल इसमें शामिल हैं। Q. मंत्र-वंदना वाली याचिका का क्या हुआ? A. सरकारी स्कूलों में गायत्री मंत्र और सरस्वती वंदना के खिलाफ दायर याचिका भी खारिज कर दी गई। याचिकाकर्ताओं ने इसे अनुच्छेद 28 का उल्लंघन बताया था। कोर्ट ने यह दलील स्वीकार नहीं की।
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