Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला, आरटीआई में पर्सनल डेटा देना गैरकानूनी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला, आरटीआई में पर्सनल डेटा देना गैरकानूनी

समझें क्या है पूरा मामला

  • मैरिज रजिस्ट्रेशन और निजी दस्तावेज अब आरटीआई में नहीं मिलेंगे।
  • बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, प्राइवेसी पर दिया अहम आदेश।
  • आरटीआई में नहीं मिलेगी दूसरों की पर्सनल जानकारी, जाने नियम।
  • सूचना आयोग को हाईकोर्ट की फटकार, अब 90 दिन में फैसला।
  • धारा 8(1)(जे) का हवाला, व्यक्तिगत निजता की सुरक्षा सबसे ऊपर।

निजता का अधिकार सबसे ऊपर

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि आरटीआई का मकसद पारदर्शी प्रशासन बनाना है। लेकिन इसके साथ ही व्यक्तिगत निजता की रक्षा भी जरूरी है। कानून की धारा 8(1)(जे) में इसका स्पष्ट प्रावधान मौजूद है। मैरिज रजिस्ट्रेशन आवेदन में नाम, पता और फोटो होते हैं। इसमें जन्मतिथि और पहचान पत्र जैसा गोपनीय डेटा भी होता है।

यदि कोई व्यक्ति बड़ा जनहित साबित नहीं करता, तो सूचना नहीं मिलेगी। भ्रष्टाचार उजागर करने या पद के दुरुपयोग का सबूत देना होगा। ऐसा न करने पर जानकारी देना निजता पर हमला माना जाएगा। कोर्ट ने इसी आधार पर दो याचिकाएं खारिज कर दी हैं।

अंबिकापुर के याचिकाकर्ता का मामला

अंबिकापुर निवासी डीके सोनी ने हाईकोर्ट में याचिकाएं लगाई थीं। पहली याचिका सूरजपुर जिले से जुड़ी हुई थी। उन्होंने अपर कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत मैरिज रजिस्ट्रेशन दस्तावेज मांगे थे। कपिल देव पैकरा और लवकेश कुमार पैकरा के आवेदन मांगे गए थे।

सूरजपुर के जन सूचना अधिकारी ने जानकारी देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि यह न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है। आवेदक इस मामले में थर्ड पार्टी है। नियम के तहत यह गोपनीय डेटा किसी को नहीं दिया जा सकता।

सूचना आयोग को लगी फटकार

मामला राज्य सूचना आयोग रायपुर पहुंचा था। आयोग ने 10 अक्टूबर 2019 को अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा। तीसरी याचिका में डीपीएस (DPS – Delhi Public School) तिवारी के खिलाफ शिकायत की कॉपियां मांगी गई थीं। जांच लंबित होने का हवाला देकर सूचना देने से मना किया गया था।

राज्य सूचना आयोग ने अधिकारियों को ट्रेनिंग देने की सलाह देकर मामला बंद कर दिया। हाईकोर्ट ने इस रवैये पर भारी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि आयोग राज्य की अंतिम अपीलीय संस्था है। केवल प्रक्रियात्मक कमियों पर टिप्पणी करना आयोग का काम नहीं है।

आयोग को तय करना चाहिए कि जानकारी दी जा सकती है या नहीं। कोर्ट ने आयोग के आदेश को निरस्त कर दिया। अब 90 दिनों के भीतर दोनों पक्षों को सुनकर फैसला देना होगा।


FAQ
Q. क्या आरटीआई के तहत किसी दूसरे व्यक्ति का मैरिज सर्टिफिकेट मिल सकता है? A. उत्तर: नहीं, हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार किसी दूसरे व्यक्ति का मैरिज रजिस्ट्रेशन या निजी दस्तावेज आरटीआई में नहीं मिल सकता। इसके लिए बड़ा जनहित या भ्रष्टाचार साबित करना अनिवार्य होगा। Q. आरटीआई कानून की धारा 8(1)(जे) क्या कहती है? A. उत्तर: धारा 8(1)(जे) व्यक्तिगत निजता की सुरक्षा का प्रावधान करती है। इसके तहत ऐसी किसी भी व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजनिक करने से छूट मिलती है जिसका जनहित से कोई संबंध न हो। Q. हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग को क्या निर्देश दिया है? A. उत्तर: हाईकोर्ट ने सूचना आयोग के पुराने आदेश को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने आयोग को निर्देश दिया है कि वह 90 दिनों के भीतर दोनों पक्षों को सुनकर कानूनन फैसला पारित करे।

यह खबरें भी पढ़ें...

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: d sutr