छत्तीसगढ़ के संयुक्त सचिव प्रमील वर्मा को प्रधानमंत्री मोदी की चिट्ठी आई है। इस विशेष प्रशंसा-पत्र में पीएम नरेंद्र मोदी ने उनके काम और सक्रियता की सराहना की है। यह पत्र उन्हें 'कर्मयोगी' पहल के अंतर्गत प्रशिक्षण और सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए मिला है।
बता दे कि iGOT कर्मयोगी केंद्र सरकार के विजन प्लान का माध्यम है। इसके जरिए केंद्र सरकार के सभी अधिकारी कर्मचारियों को आधुनिक और अपडेट करना चाह रही है। साथ ही इस पहल से पूरे देश के कर्मचारी और अधिकारियों के कामों में एकरुपता आएगी।
पीएमओ से हो रही मॉनिटरिंग
लॉगइन के दौरान उपलब्ध ई-मेल आईडी के माध्यम से पीएमओ तक उनकी जानकारी पहुंची, जिसके बाद यह प्रशंसा संदेश भेजा गया। पत्र में न केवल उनकी उपलब्धियों की सराहना की गई है, बल्कि आगे के विकास के लिए प्रेरित भी किया गया है।
10 सवाल भी पूछे गए है
प्रधानमंत्री द्वारा भेजे गए इस पत्र में अधिकारियों से उनकी योग्यता, क्षमता, कार्यक्षेत्र और कार्यकुशलता को लेकर 10 महत्वपूर्ण सवाल भी पूछे गए हैं। इन सवालों का उद्देश्य अधिकारियों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करना है, ताकि वे अपने काम के तरीके में सुधार कर सकें और बेहतर प्रशासनिक सेवाएं दे सकें। यह पहल ‘निरंतर सीखने’ की संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
डिजिटल माध्यम से प्रशिक्षित कर रहे
आईगॉट कर्मयोगी प्लेटफॉर्म के तहत केंद्र सरकार अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को डिजिटल माध्यम से प्रशिक्षित कर रही है। इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले कर्मचारियों को कम से कम तीन कोर्स पूरे करना अनिवार्य है। इन कोर्स को विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया है ताकि वे व्यवहारिक और उपयोगी साबित हों। खास बात यह है कि इनमें से एक कोर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित है, जो आधुनिक प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शामिल किया गया है।
ओएसडी हैं प्रमील
प्रमील वर्मा वर्तमान में संस्कृति एवं पर्यटन विभाग में संयुक्त सचिव के साथ-साथ ओएसडी (विशेष कर्तव्य अधिकारी) के रूप में भी अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि को विभाग के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की पहल न केवल व्यक्तिगत स्तर पर प्रेरणा देती है, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे को अधिक सक्षम और जवाबदेह बनाने में मदद करती है।
नई उर्जा का संचार होता है
विशेषज्ञों के अनुसार, कर्मयोगी मिशन का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि एक ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करना है। जिसमें अधिकारी लगातार सीखते रहें और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढाल सकें। प्रमील वर्मा का कहना है कि प्रधानमंत्री की ओर से सीधे संवाद और प्रशंसा मिलने से नई ऊर्जा और उत्साह का संचार होता है।
प्रशासनिक तंत्र को महबूत बनाने का काम
मिशन कर्मयोगी के जरिए केंद्र सरकार प्रशासनिक तंत्र को तकनीकी रूप से सशक्त, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। प्रमील वर्मा को मिला यह पत्र इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा माना जा रहा है, जो अन्य अधिकारियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
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