5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- मैहर कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी ने सिविल अस्पताल का निरीक्षण किया।
- वहां एक महिला मिली जिसने अभी-अभी अपने पांचवें बच्चे को जन्म दिया था।
- कलेक्टर ने कहा कि 2026 में पांच बच्चों को सोचना बहुत बड़ी लापरवाही है।
- एक गर्भवती महिला का हीमोग्लोबिन (Haemoglobin) सिर्फ 6 मिला, जो जानलेवा है।
- कलेक्टर ने ANM और आशा कार्यकर्ताओं को फेल बताया।
जब कलेक्टर अस्पताल पहुंची तो रुक गईं
मैहर जिला कलेक्टर आईएएस बिदिशा मुखर्जी रूटीन निरीक्षण के लिए सिविल अस्पताल पहुंची थीं। प्रसूता विभाग (Maternity Ward) में घूमते वक्त एक महिला का मामला उनकी नजर में आया। उस महिला ने अभी-अभी अपने पांचवें बच्चे को जन्म दिया था।
यह देखकर कलेक्टर रुक गईं। उन्होंने महिला से बातचीत की और समझाइश दी। उन्होंने सीधे कहा कि आज के जमाने में पांच बच्चों के बारे में सोचना बहुत बड़ी लापरवाही है। पास में खड़ी जेठानी को भी टोकते हुए कहा कि वह अपनी देवरानी को समझाएं।
"हमारी पूरी मशीनरी फेल है"
अस्पताल से बाहर आने के बाद कलेक्टर मीडिया के सामने आईं और बिना लाग-लपेट के बोलीं। उन्होंने कहा कि हम 2026 में जी रहे हैं, लेकिन समाज में आज भी बेटे की चाहत खत्म नहीं हुई है। यही सोच महिलाओं को बार-बार मां बनने पर मजबूर करती है।
कलेक्टर ने साफ शब्दों में कहा कि अगर हम लोगों को फैमिली प्लानिंग (Family Planning) के बारे में नहीं समझा पा रहे तो ANM, आशा कार्यकर्ता और सुपरवाइजर के तौर पर हमारी पूरी मशीनरी फेल है। उनका यह बयान अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
हीमोग्लोबिन 6, जान का खतरा
निरीक्षण के दौरान एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। कलेक्टर ने एक गर्भवती महिला को देखा जिसका हीमोग्लोबिन स्तर मात्र 6 था। यह बेहद खतरनाक स्थिति है क्योंकि डॉक्टर 12 से कम हीमोग्लोबिन को ही एनीमिया (Anaemia) मानते हैं।
डिलीवरी के वक्त हीमोग्लोबिन इतना कम होना जानलेवा साबित हो सकता है। कलेक्टर ने सवाल किया कि गर्भावस्था की शुरुआत में ही यह क्यों नहीं पकड़ा गया। आशा और ANM कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे नियमित जांच करें और जरूरत पड़ने पर महिला को अस्पताल भेजें।
धीरेंद्र शास्त्री के बयान से उठी बहस
यह मामला ऐसे वक्त सामने आया है जब बागेश्वर बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री) का एक बयान देशभर में बहस का विषय बना हुआ है। उन्होंने नागपुर में कथा के दौरान हिंदुओं से चार बच्चे पैदा करने और उनमें से एक बच्चा RSS (Rashtriya Swayamsevak Sangh) को सौंपने की अपील की थी।
मैहर कलेक्टर की सोच इस बयान से बिल्कुल अलग दिशा में है। एक तरफ धार्मिक मंच से अधिक बच्चों की अपील हो रही है, दूसरी तरफ जमीन पर काम करने वाला एक जिला प्रशासन पांचवें बच्चे की हकीकत से जूझ रहा है।
महिलाएं आगे हैं, सोच पीछे क्यों?
कलेक्टर ने एक दिलचस्प तथ्य भी रखा। उन्होंने बताया कि आज मध्य प्रदेश में (mp ias news) 31 फीसदी कलेक्टर महिलाएं हैं। महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं लेकिन ग्रामीण समाज में अभी भी पुरानी सोच हावी है। बेटे की चाहत में महिलाओं की सेहत और जिंदगी दांव पर लग जाती है।
कलेक्टर ने निर्देश दिए कि इस सोच को बदलने के लिए जिले में एक बड़ा जागरूकता अभियान चलाया जाए। साथ ही उन्होंने मैहर जिले को सिकल सेल एनीमिया (Sickle Cell Anaemia) से पूरी तरह मुक्त करने का संकल्प भी दोहराया। यह एक आनुवांशिक बीमारी है जो आदिवासी बहुल इलाकों में ज्यादा पाई जाती है।
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