Digital Will Benefits: क्या है डिजिटल वसीयत और ये आपके लिए क्यों जरूरी ह
- दुनिया के 70 प्रतिशत लोग ऑनलाइन डेटा को लेकर हमेशा परेशान रहते हैं।
- केवल 10 से 15 प्रतिशत लोग ही अपनी डिजिटल वसीयत बनाते हैं।
- डिजिटल विल से आपके ऑनलाइन पैसों और सोशल मीडिया को सुरक्षा मिलती है।
- इसके बिना आपके परिवार को कानूनी पचड़ों का सामना करना पड़ता है।
- गूगल और एप्पल जैसी कंपनियां अकाउंट्स के लिए लेगेसी फीचर्स देती हैं।
Digital Will Benefits: आज के समय में हम सब डिजिटल दुनिया से पूरी तरह घिरे हैं। हम अपनी जमीन, मकान और बैंक खातों के लिए नॉमिनी चुनते हैं। वहीं, हम अपनी कीमती डिजिटल प्रॉपर्टी के बारे में सोचना भूल जाते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि आपके बाद आपके डेटा का क्या होगा?
आपके ई-मेल, यूट्यूब चैनल और पेटीएम वॉलेट का असली मालिक कौन बनेगा? इन सभी जरूरी सवालों का इकलौता जवाब डिजिटल वसीयत है। हाल ही में McAfee का डिजिटल आफ्टरलाइफ सर्वे सामने आया है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 70% लोग इसे लेकर काफी चिंतित हैं। वे अपने ऑनलाइन डेटा की सुरक्षा को लेकर फिक्रमंद रहते हैं। इसके बावजूद सिर्फ 10 से 15% लोग ही डिजिटल वसीयत तैयार करते हैं। लोग इस जरूरी काम को अक्सर कल पर टाल देते हैं। ये लापरवाही भविष्य में उनके परिवार पर भारी पड़ती है। आइए इसे थोड़ा डिटेल से जानें...
क्या होती है डिजिटल विल
डिजिटल विल एक बेहद जरूरी कानूनी डॉक्यूमेंट है। इसके जरिए आप अपनी मौत के बाद का फैसला खुद करते हैं। आप तय करते हैं कि आपके ऑनलाइन डेटा का क्या होगा। आप अपनी डिजिटल प्रॉपर्टी किसी भरोसेमंद व्यक्ति को सौंप सकते हैं। इसे मुख्य रूप से तीन बड़ी कैटेगरी में बांटा जा सकता है। चलिए इन तीनों कैटेगरी को समझते हैं।
पहली कैटेगरी वित्तीय संपत्ति यानी फाइनेंशियल एसेट्स की होती है। इसमें आपकी क्रिप्टोकरेंसी और ऑनलाइन बैंकिंग के क्रेडेंशियल्स शामिल होते हैं। इसके साथ ही आपके ई-वॉलेट्स जैसे Paytm और PhonePe भी आते हैं। आपके ऑनलाइन ट्रेडिंग अकाउंट्स जैसे जीरोधा और ग्रो भी इसी का हिस्सा हैं। इनमें आपका गाढ़ा पैसा और इन्वेस्टमेंट सुरक्षित रहता है। वसीयत न होने पर यह सारा फंड ब्लॉक हो सकता है।
दूसरी कैटेगरी बौद्धिक संपदा यानी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (साइबर फ्रॉड से बचाव) की होती है। इसमें आपके खुद के बनाए ब्लॉग और वेबसाइट डोमेन नेम आते हैं। इसके अलावा आपके कमाई करने वाले यूट्यूब चैनल्स भी इसी में आते हैं।
तीसरी कैटेगरी आपके पर्सनल डेटा और सोशल मीडिया अकाउंट्स (ऑनलाइन फ्रॉड) की है। इसमें आपका फेसबुक, इंस्टाग्राम और लिंक्डइन प्रोफाइल शामिल होता है। साथ ही गूगल ड्राइव, आईक्लाउड, ईमेल और आपकी तस्वीरें आती हैं।
क्यों जरूरी है डिजिटल विल
अगर आप डिजिटल विल नहीं बनाते हैं तो बड़ा नुकसान हो सकता है।
सबसे पहला और बड़ा खतरा आपके परिवार को वित्तीय नुकसान का होता है। क्रिप्टो वॉलेट का पासवर्ड न मिलने पर पैसा हमेशा के लिए लॉक हो जाता है।
दूसरा बड़ा खतरा पहचान की चोरी और साइबर फ्रॉड का होता है। आपके बंद पड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स को हैकर्स निशाना बना सकते हैं। वे आपके पुराने प्रोफाइल का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।
इसके अलावा यह आपकी खूबसूरत यादों को सुरक्षित रखने का जरिया है। आपके जाने के बाद आपकी निजी तस्वीरें और ईमेल सुरक्षित रहेंगे। आपका परिवार उन्हें बहुत ही सम्मानजनक तरीके से सहेज सकता है।
डिजिटल वसीयत आपके परिवार को अदालती कानूनी विवादों से भी बचाती है। परिजनों को टेक कंपनियों से डेटा हासिल करने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उन्हें कोर्ट-कचहरी के लंबे चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
ये पूरी प्रक्रिया कैसे काम करती है
जब कोई यूजर इस दुनिया में नहीं रहता तो कंपनियों को कैसे पता चलता है? टेक कंपनियों और हमारे कानूनी सिस्टम के पास इसके दो तरीके हैं।
पहला तरीका पूरी तरह से तकनीकी होता है। गूगल जैसे बड़े प्लेटफॉर्म आपकी ऑनलाइन एक्टिविटी को लगातार ट्रैक करते हैं। इसमें आपका लॉगिन स्टेटस, ईमेल भेजना और यूट्यूब देखना शामिल होता है। यदि लंबे समय तक कोई हलचल नहीं होती तो सिस्टम एक्टिव होता है। आमतौर पर यह समय सीमा तीन महीने तय की जाती है।
इस ड्यूरेशन के बाद सिस्टम आपके बैकअप ईमेल पर अलर्ट भेजता है। आपके फोन नंबर पर भी लगातार कई मैसेज भेजे जाते हैं। जब यूजर की तरफ से कोई जवाब नहीं मिलता तो सिस्टम एक्शन लेता है। सिस्टम मान लेता है कि अकाउंट होल्डर अब इस दुनिया में नहीं है। इसके बाद आपके लेगेसी कॉन्टैक्ट को डेटा डाउनलोड लिंक मिल जाता है।
दूसरा तरीका पूरी तरह से कानूनी और कागजी होता है। एप्पल और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म खुद से कोई कदम नहीं उठाते हैं। इन मामलों में मृतक के परिवार को कंपनी से संपर्क करना पड़ता है। इसके लिए कानूनी वारिस को कंपनी के ऑनलाइन पोर्टल पर जाना होता है।
वहां उन्हें मृत व्यक्ति का डेथ सर्टिफिकेट अपलोड करना पड़ता है। साथ ही वसीयत का सीक्रेट कोड यानी एक्सेस की देनी होती है। कंपनी इन सभी दस्तावेजों की बारीकी से जांच करती है। सब कुछ सही पाए जाने पर मृतक का अकाउंट लॉक कर दिया जाता है। इसके बाद सारा डेटा कानूनी वारिस के हवाले कर दिया जाता है।
बिना डिजिटल विल के हुए बड़े नुकसान
इतिहास में ऐसे कई मामले दर्ज हैं जो हमें सचेत करते हैं। ऐसा ही एक बड़ा मामला कनाडा के क्रिप्टो एक्सचेंज क्वाड्रिगासीएक्स का है। साल 2018 में कंपनी के मेजर जेराल्ड कॉटन की अचानक मौत हो गई थी। उनके पास कोई डिजिटल वसीयत या पासवर्ड का बैकअप नहीं था।
नतीजा ये हुआ कि इन्वेस्टर्स के 1804 करोड़ रुपए हमेशा के लिए लॉक हो गए। इस भारी नुकसान के बाद वो कंपनी दिवालिया हो गई। ऐसा ही एक और मामला यूनाइटेड किंगडम से सामने आया था। वहां राहेल नामक महिला के पति की अचानक मृत्यु हो गई थी।
पति ने अपने एप्पल अकाउंट में लेगेसी कॉन्टैक्ट सेट नहीं किया था। पति की मौत के बाद एप्पल कंपनी ने डेटा देने से मना कर दिया। कंपनी ने यूजर की प्राइवेसी का हवाला देकर अकाउंट ब्लॉक कर दिया। पत्नी को पारिवारिक तस्वीरें पाने के लिए महीनों केस लड़ना पड़ा।
डिजिटल विल बनाने का आसान तरीका
डिजिटल वसीयत बनाने की प्रक्रिया बेहद सरल है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकीलों के मुताबिक, आपको पांच स्टेप्स फॉलो करने चाहिए।
सबसे पहले अपनी सभी डिजिटल संपत्तियों की एक सूची बनाएं। ध्यान रखें कि इस सूची में कभी भी अपने पासवर्ड न लिखें।
पासवर्ड लिखना सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। सूची बनाने के बाद दूसरा कदम एक सही उत्तराधिकारी (सक्सेसर) चुनना है। आपको किसी ऐसे व्यक्ति को चुनना चाहिए जो तकनीक को समझता हो।
डिजिटल दुनिया की समझ रखने वाला व्यक्ति ही आपके डेटा को संभाल पाएगा। इसके बाद हर डिजिटल एसेट के लिए साफ निर्देश लिखें। आप स्पष्ट रूप से बताएं कि कौन सी चीज किसे सौंपनी है। इसके बाद चौथा स्टेप बहुत ही महत्वपूर्ण है। आपको गूगल, फेसबुक और एप्पल पर जाकर लेगेसी फीचर सेट करना चाहिए।
अंतिम स्टेप में इन सभी बातों को एक कागज पर लिखें। दो गवाहों की मौजूदगी में उस कागज पर अपने हस्ताक्षर करें। इसके बाद सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जाकर इसका रजिस्ट्रेशन जरूर करवा लें।
लोगों की सोच और उनकी पसंद
ट्रस्ट एंड विल्स की एनुअल स्टेट प्लानिंग रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इसके अनुसार 40% लोग चाहते हैं कि उनके बाद उनका डेटा डिलीट हो जाए। वे अपने सोशल मीडिया अकाउंट को हमेशा के लिए बंद करना चाहते हैं। सिर्फ 7% लोग चाहते हैं कि कोई दूसरा उनका अकाउंट चलाए। वहीं 32% लोग अपनी चैट को परिवार से भी छिपाकर रखना चाहते हैं।
वे अपनी प्राइवेसी के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहते हैं। इस मामले में पुरानी और नई पीढ़ी की सोच में बड़ा अंतर है। पुरानी पीढ़ी के 55% लोग अपने अकाउंट को तुरंत डिलीट करना चाहते हैं। वे इंटरनेट पर अपना कोई भी निशान नहीं छोड़ना चाहते हैं। इसके ठीक विपरीत आज की युवा जेन जी पीढ़ी की सोच अलग है।
वे अपने ऑनलाइन डेटा और यादों को हमेशा के लिए सहेजना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि उनके जाने के बाद भी उनकी डिजिटल मौजूदगी बनी रहे। तकनीक के इस दौर में डिजिटल वसीयत अब विलासिता नहीं बल्कि जरूरत है। आज ही जागरूक बनें और अपनी डिजिटल अमानत को सुरक्षित करें। यह छोटा सा कदम आपके परिवार को बड़े संकट से बचा सकता है।
FAQ
Q. डिजिटल वसीयत क्या है और इसमें किस प्रकार की संपत्तियों को शामिल किया जाता है? A. डिजिटल वसीयत एक वैलिड कानूनी डॉक्यूमेंट है जो यह तय करता है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी ऑनलाइन या डिजिटल संपत्तियों का प्रबंधन कौन करेगा। इसमें मुख्य रूप से तीन प्रकार की संपत्तियों को शामिल किया जाता है: पहली वित्तीय संपत्तियां, दूसरी बौद्धिक संपदा और तीसरी व्यक्तिगत डेटा। Q. गूगल और एपल जैसी बड़ी कंपनियां किसी यूजर की मृत्यु के बाद उसके डेटा को कैसे मैनेज करती हैं? A. ये कंपनियां दो तरीकों से काम करती हैं - तकनीकी और कानूनी। तकनीकी तरीके के तहत गूगल जैसे प्लेटफॉर्म यूजर की ऑनलाइन एक्टिविटी को ट्रैक करते हैं। यदि तय समय सीमा तक अकाउंट लॉगिन नहीं होता, तो सिस्टम बैकअप फोन और ईमेल पर अलर्ट भेजता है। कोई जवाब न मिलने पर सिस्टम उसे मृत मानकर यूजर द्वारा पहले से तय किए गए लेगेसी कॉन्टैक्ट को डेटा डाउनलोड करने का लिंक भेज देता है। Q. कानूनी रूप से डिजिटल विल बनाने की सही प्रक्रिया क्या है? A. कानूनी रूप से सुरक्षित डिजिटल वसीयत बनाने के लिए पांच महत्वपूर्ण चरण होते हैं। सबसे पहले अपनी सभी डिजिटल संपत्तियों की एक विस्तृत सूची तैयार करें। दूसरा, किसी तकनीकी समझ रखने वाले भरोसेमंद व्यक्ति को अपना डिजिटल उत्तराधिकारी चुनें। तीसरा, हर डिजिटल एसेट के लिए स्पष्ट निर्देश लिखें कि उसे किसे सौंपना है या डिलीट करना है। चौथा, सभी प्रमुख ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जाकर इन-बिल्ट लेगेसी कॉन्टैक्ट फीचर को सेटअप करें। पांचवां, इन सभी निर्देशों को कागज पर लिखकर दो गवाहों की उपस्थिति में हस्ताक्षर करें और कानूनी रूप से पक्का करने के लिए सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में इसका रजिस्ट्रेशन करवाएं।
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