समझें क्या है पूरा मामला
- कई शिक्षक स्कूल छोड़कर दूसरे विभागों में काम कर रहे हैं।
- भोपाल में ऐसे एक दर्जन से अधिक शिक्षक हैं।
- डीपीआई ने संबंधित शिक्षकों का वेतन रोकने को कहा।
- अब वेतन केवल ई-अटेंडेंस के आधार पर मिलेगा।
- शिक्षक मंत्रालय और एसडीएम कार्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं।
ई-अटेंडेंस बनी शर्त
डीपीआई यानी ( लोक शिक्षण संचालनालय ) ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को आदेश भेजा है। इसमें कहा गया है कि अब वेतन सिर्फ ई-अटेंडेंस के आधार पर बनेगा। यू-डायस पोर्टल पर हर दिन ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना जरूरी होगा। अगर कोई शिक्षक किसी दिन उपस्थिति दर्ज नहीं करेगा तो उसे अनुपस्थित माना जाएगा। उस दिन का वेतन भी नहीं मिलेगा। यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब कोई ढील नहीं मिलेगी। हर स्कूल और हर शिक्षक को इस नियम का पालन करना होगा।
प्राचार्यों की भी जिम्मेदारी तय
जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र अहिरवार ने इस आदेश की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्कूल प्राचार्यों और संकुल प्रभारियों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। वेतन बिल बनाने से पहले उन्हें ई-अटेंडेंस की जांच करनी होगी। बिना सत्यापन के किसी का भी वेतन नहीं बनेगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि गड़बड़ी की गुंजाइश न बचे। अब हर स्तर पर जांच पड़ताल जरूरी होगी।
17 साल से जमे शिक्षक
भोपाल में कुछ शिक्षक तो बरसों से स्कूल से बाहर हैं। प्राथमिक शिक्षक ताहिर अमीन पिछले 17 साल से दूसरे संकुल में काम कर रहे हैं। माध्यमिक शिक्षक सीसा शर्मा तीन साल से एसडीएम कार्यालय कोलार में जमी हैं। शिक्षक मनीष शर्मा भी करीब 17 साल से मंत्रालय में तैनात बताए जाते हैं।
डीपीआई ने साफ कहा है कि स्कूलों में शिक्षकों की मौजूदगी जरूरी है। इसलिए अटैचमेंट व्यवस्था पर अब सख्त कार्रवाई होगी। लंबे समय से चली आ रही यह प्रथा अब खत्म होने की कगार पर है।
सीधी में भी शुरू हुई जांच
यह सख्ती सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं है। सीधी जिले में भी शिक्षा विभाग ने निगरानी तेज कर दी है। जो शिक्षक ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कर रहे, उनका रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। विभाग ने ऐसे शिक्षकों की सूची भी तैयार की है।
सरकारी निर्देशों के बावजूद कई शिक्षक अब तक नियमित ई-अटेंडेंस दर्ज नहीं कर रहे। यह बात शुरुआती जांच में सामने आई है।
सीधी के आंकड़े क्या कहते हैं
सीधी जिले में शुरुआती आंकड़े चौंकाने वाले हैं। यहां करीब 620 शिक्षक ऐसे हैं जिनकी उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज नहीं हो रही। जिले में कुल मिलाकर करीब 4,300 शिक्षक और कर्मचारी पदस्थ हैं। इनमें से लगभग 200 लिपिक और दफ्तरी कर्मचारी हैं।
इन पर फिलहाल ई-अटेंडेंस नियम लागू नहीं होता। बाकी बचे शिक्षकों में से ज्यादातर ने ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना शुरू कर दिया है। लेकिन करीब 14 प्रतिशत शिक्षक अभी भी इस दायरे से बाहर हैं। आने वाले दिनों में इन पर भी कार्रवाई की उम्मीद है।
FAQ
Q. शिक्षकों का वेतन अब किस आधार पर बनेगा? A. अब शिक्षकों का वेतन सिर्फ ई-अटेंडेंस के आधार पर बनेगा। यू-डायस पोर्टल पर रोजाना उपस्थिति दर्ज करनी होगी। बिना उपस्थिति के वेतन नहीं मिलेगा। Q. भोपाल में कितने शिक्षक अटैच होकर काम कर रहे हैं? A. भोपाल में एक दर्जन से अधिक शिक्षक अन्य दफ्तरों में सेवाएं दे रहे हैं। कुछ शिक्षक तो 17 साल से बाहर तैनात हैं। ये मंत्रालय और एसडीएम कार्यालय जैसी जगहों पर हैं।
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