छत्तीसगढ़ में नकटी पर बवाल मचा हुआ है। बीजेपी के लिए यह डैमेज कंट्रोल नहीं बल्कि डिजास्टर मैनेजमेंट बन गया है। बीजेपी के लिए यह नाक बचाने की बात हो गई है। सत्ता और संगठन के लोग इस डिजास्टर मैनेजमेंट में लग गए हैं।
सरकार की तरफ से मंत्री तो संगठन की तरफ से महामंत्री इस विषय पर सफाई दे रहे हैं। लेकिन बीजेपी में मची इस हड़बड़ाहट में सबसे बयान अलग-अलग आ रहे हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट का अहम पार्ट हाउसिंग बोर्ड भी है।
बोर्ड के अध्यक्ष जो बीजेपी नेता हैं, वे भी मैदान में कूदे और वे भी अपनी तरफ से कुछ-कुछ बता गए। इन बयानों का विरोधाभास से सवाल पैदा होता है कि मंत्री बड़े हैं या फिर हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष।
कुल मिलाकर सबके बयान में एक चीज कॉमन है। सबने इसका पूरा ठीकरा कांग्रेस पर फोड़ दिया है जबकि बुलडोजर बीजेपी सरकार के प्रशासन ने चलाए हैं। इस पूरे विवाद की कड़ियां आपको बताते हैं।
कड़ी नंबर एक : विधायकों के लिए नकटी में जमीन :
यह पूरा मामला शुरु होता है विधानसभा से। बीजेपी विधायक धर्मजीत सिंह ने राजस्व मंत्री से एक सवाल किया। सवाल था कि क्या सरकार के पास विधायकों और सांसदों के आवास के लिए जमीन देना का कोई प्रस्ताव है।
इस सवाल का जवाब देने के लिए राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा खड़े हुए। उन्होंने कहा कि विधायकों के आवास के लिए अभी जमीन चिन्हित नहीं की गई है देख रहे है। तभी उनके बगल में बैठे वित्त मंत्री ओपी चौधरी उनसे कुछ कहते हैं जाहिर है उन्होंने नकटी में जमीन चिन्हित करने की बात की।
इसके बाद टंकराम वर्मा ने आगे कहा कि नकटी में देख रहे हैं यह प्रक्रियाधीन है। इससे यह तय है कि इस जमीन के बारे में राजस्व मंत्री को नहीं पता था जबकि आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी इस बारे में जानते थे।
कड़ी नंबर 2 : विधायकों के आवास का विषय ही नहीं :
नकटी में रातों रात घर उजाड़ दिए गए। इस बुलडोजर कार्रवाई पर बबाल मचा। लोगों ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया तो कलेक्टर पिछले रास्ते से ग्रिल कटवाकर निकल गए। पीड़ितों ने मंत्री ओपी चौधरी के बंगले का भी घेराव किया।
इस बवाल के बाद हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन अनुराग सिंह देव मैदान में उतरे उन्होंने इसे ऑर्गनाइज्ड अतिक्रमण बता दिया। अनुराग सिंहदेव ने कहा कि अतिक्रमण हुआ वह 2022 और 2023 का है।
उन्होंने कहा कि विधायक आवास के लिए यह अतिक्रमण हटाए जाने की बात कह कर नैरेटिव सेट करने का प्रयास किया गया है। सिंहदेव ने कहा कि आज की स्थिति में वह भूमि राजस्व विभाग के खाते में है किसी भी अन्य विभाग के खाते में नहीं। सिंहदेव ने कहा कि यह जो नैरेटिव बना कि यह जमीन विधायक आवास के लिए खाली कराई गई है यह विषय कहां से आया।
निश्चित रूप से यह विषय एक बड़े फेक नैरेटिव पर आधारित है। अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही जिला प्रशासन ने अपने अतिक्रमण विरोधी मुहिम के अंतर्गत की।
कड़ी नंबर 3 : हाउसिंग बोर्ड के पास प्रस्ताव :
इसके बाद वन मंत्री केदार कश्यप प्रेस कान्फ्रेंस लेने आए। केदार कश्यप ने कहा कि जिस भूमि को लेकर आज कांग्रेस राजनीति कर रही है, उसके आबंटन की प्रक्रिया 1 सितंबर 2020 से तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में प्रारंभ हुई थी।
केदार कश्यप ने कहा कि हाउसिंग बोर्ड के पास विधायकों को जमीन देने का प्रस्ताव है। अब बोर्ड तय करेगा कि वह कहां जमीन देगा। वहीं बीजेपी के महामंत्री नवीन मार्कंडेय ने कहा कि यह सब कांग्रेस का किया हुआ है।
वहीं सांसद बृजमेाहन अग्रवाल ने इस कार्रवाई का विरोध किया और इसे रोकने के लिए मंत्री ओपी चौधरी को चिट्ठी लिखी। उन्होंने कहा कि वे नकटी के गांव वालों के साथ हैं।
कड़ी नंबर 4 : झूठ बोल रही बीजेपी :
वहीं कांग्रेस ने झूठ की राजनीति बताया है। संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि बीजेपी के लोगों के आपस में ही बयान एक जैसे नहीं हैं। कांग्रेस के समय यह प्रस्ताव आया था लेकिन तत्कालीन सरकार ने इसे वापस लौटा दिया था।
भूपेश बघेल ने कहा कि यह सारा मामला ओपी चौधरी का है। लोगों ने बृजमोहन अग्रवाल से कहा जिनकी चल नहीं रही यदि ओपी चौधरी से कहते तो बुलडोजर रुक जाता।
निष्कर्ष :
कुल मिलाकर यह मामला बीजेपी के लिए मुश्किल पैदा कर रहा है। बीजेपी में हर नेता के अलग अलग बयान सामने आ रहे हैं। बीजेपी कई धड़ों में बंट गई है। एक धड़ा सरकार का है, एक संगठन का और एक बृजमेाहन अग्रवाल का।
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