समझें क्या है पूरा मामला
बलरामपुर जिले में पुलिस विभाग की बड़ी किरकिरी हुई है। 2018 में पुलिस के जेल वाहन की टक्कर से दो युवकों की मौत हुई थी। हाईकोर्ट ने 48 लाख से ज्यादा मुआवजा देने का आदेश दिया था।
लेकिन पुलिस विभाग ने 3 दिसंबर 2025 तक भी यह राशि नहीं दी। इसके बाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने पुलिस विभाग का एक बोलेरो और एक मिनी ट्रक यानी जेल वाहन जब्त कर लिया। जिले में इस तरह का यह पहला मामला है।
2018 में हुआ था यह हादसा
यह मामला वर्ष 2018 का है। वाड्फनगर थाना अंतर्गत पुलिस का एक वाहन कैदियों को लेकर वाड्फनगर सुनवाई में आया था।
3 जुलाई 2018 की शाम कैदियों को लेकर रामानुजगंज जेल वापस जाते समय मेंढारी के जंगल में हादसा हो गया। जेल वाहन की टक्कर से बाइक सवार दो युवकों ग्राम विमलापुर निवासी राकेश कुमार यादव और उपेंद्र यादव की मौत हो गई।
परिजनों ने लड़ी कोर्ट की लड़ाई
मृतक युवकों के परिजनों ने हाईकोर्ट में वाद दायर कर मुआवजे की मांग की। परिजनों की तरफ से अधिवक्ता आरके पटेल ने मोटर दुर्घटना क्लेम कोर्ट में दाखिल किया।
सुनवाई के बाद कोर्ट ने राकेश के मामले में 10 लाख 38 हजार और उपेंद्र के मामले में 7 लाख 79 हजार रुपए क्षतिपूर्ति राशि देने का आदेश किया।
हाईकोर्ट ने बढ़ाई राशि
इस आदेश के बाद नारायण यादव के वकील आरके पटेल ने उच्च न्यायालय के फैसले का हवाला देते हुए जिला एवं सत्र न्यायालय में सुनवाई के लिए आग्रह किया।
उच्च न्यायालय के आदेश को वैध मानते हुए 3 सितंबर 2021 को जिला एवं सत्र न्यायालय ने नया आदेश दिया। इसमें राकेश को 20 लाख 10 हजार 700 रुपए और उपेंद्र को 13 लाख 95 हजार 200 रुपए देने का आदेश हुआ।
साथ ही 11 दिसंबर 2018 से उक्त राशि पर 6 प्रतिशत ब्याज देने का भी आदेश था। ब्याज सहित यह राशि 48 लाख से अधिक हो गई।
2025 तक भी नहीं मिला मुआवजा
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद पुलिस विभाग ने 3 दिसंबर 2025 तक पीड़ित पक्ष नारायण यादव को 48 लाख की राशि नहीं दी।
इसके बाद पीड़ित पक्ष के वकील आरके पटेल ने हाईकोर्ट में अपील की। हाईकोर्ट ने इस पर आदेश दिया।
कोर्ट ने जब्त किए वाहन
जुर्माने की राशि न भरने के कारण जिला सत्र न्यायालय ने पुलिस विभाग का एक बोलेरो और एक जेल वाहन यानी मिनी ट्रक जब्त करवाया।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विश्व दीपक त्रिपाठी ने बताया कि वाहन जब्ती का यह जिले का पहला मामला है। पीड़ित पक्ष के वकील आरके पटेल ने भी इसकी पुष्टि की।
FAQ
Q. बलरामपुर में पुलिस विभाग के वाहन क्यों जब्त किए गए? A. हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सड़क हादसे में मृत दो युवकों के परिजनों को करीब 48 लाख रुपये मुआवजा नहीं दिया गया था। भुगतान में देरी होने पर जिला एवं सत्र न्यायालय ने पुलिस विभाग के दो वाहनों को जब्त करने का आदेश दिया। Q. क्या सरकारी विभाग की संपत्ति जब्त की जा सकती है? A. हां। यदि कोई सरकारी विभाग अदालत के आदेश का पालन नहीं करता और निर्धारित राशि का भुगतान नहीं करता, तो न्यायालय कानूनी प्रक्रिया के तहत विभाग की संपत्ति या वाहनों की जब्ती का आदेश दे सकता है।
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