Dailyhunt Logo
  • Light mode
    Follow system
    Dark mode
    • Play Story
    • App Story
एमपी का ये मंदिर क्यों कहलाता है पूर्व का सोमनाथ, जानें इस ऊंचे शिवलिंग का रहस्य

एमपी का ये मंदिर क्यों कहलाता है पूर्व का सोमनाथ, जानें इस ऊंचे शिवलिंग का रहस्य

Bhojpur Temple: सावन का महिना चल रहा है। ऐसे में आज हम एक ऐसे ऐतिहासिक मंदिर के बारे में बात करेंगे जो अपने अद्भुत वास्तुकला के लिए जानी जाती है। वो है मध्य प्रदेश का भोजपुर मंदिर जो बेहद भव्य और सुंदर है।

रायसेन जिला इसका मुख्य स्थान है। यह बेतवा नदी के किनारे बसा है। राजा भोज ने इसे बनवाया था। वे परमार वंश के राजा थे। वे अपनी कला के लिए जाने जाते थे। इस मंदिर की प्रसिद्धि बहुत ज्यादा है। लोग इसे दूर से देखने आते हैं।

यहां की वास्तुकला बहुत अद्भुत है। इसकी बनावट देखकर लोग हैरान होते हैं। हर कोई इसके इतिहास को जानना चाहता है। पुराने ग्रन्थों में इसका उल्लेख मिलता है। राजा भोज महान विद्वान और वास्तुकार थे। उन्होंने कई भव्य निर्माण करवाए थे। यह मंदिर उनके सपनों का प्रतीक था। वे इसे अद्भुत बनाना चाहते थे।

आज भी यह स्थान बहुत पवित्र है। यहां भगवान शिव की पूजा होती है। श्रद्धालु यहां बड़ी श्रद्धा से आते हैं। मंदिर का वातावरण शांत और सुखद है। आसपास की प्रकृति मन मोह लेती है। पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर सुंदर दिखता है। मंदिर तक पहुंचने का रास्ता आसान है। भोपाल से यह बहुत पास स्थित है। पर्यटक आसानी से यहां पहुंच सकते हैं। यह स्थान शांति का अनुभव कराता है।

पूर्व का सोमनाथ नाम का रहस्य

इस मंदिर को एक खास नाम मिला है। इसे पूर्व का सोमनाथ कहा जाता है। यह नाम इसे इसकी भव्यता से मिला। गुजरात का सोमनाथ मंदिर बहुत प्रसिद्ध है। यह मंदिर भी उतना ही विशाल है।

दोनों मंदिरों में बड़ी समानताएं पाई जाती हैं। भोजपुर मंदिर का आकार बहुत बड़ा है। इसकी संरचना सोमनाथ जैसी ही है। विद्वान इसे पूर्व का सोमनाथ कहते हैं। यह नाम इसकी पहचान बन चुका है।

सोमनाथ मंदिर की तरह यह भी महान है। इसकी नक्काशी देखने योग्य है। पत्थर पर बनी आकृतियां सुंदर हैं। हर पत्थर अपनी कहानी कहता है। लोग इस नाम पर गर्व करते हैं।

पौराणिक कथाओं में सोमनाथ का महत्व है। भोजपुर मंदिर भी उतना ही पवित्र है। इसकी भव्यता आपका मन मोह लेगी। यहां आकर असीम शांति मिलती है। लोग इसे बार-बार देखना चाहते हैं। धार्मिक दृष्टि से यह बेहद खास है। शिव भक्त यहां जल चढ़ाते हैं। यहां की ऊर्जा मन को शांति देती है। इसका ऐतिहासिक महत्व भी बहुत बड़ा है।

दुनिया का सबसे विशाल शिवलिंग

यहां स्थापित शिवलिंग बेहद खास है। यह एक ही पत्थर से बना है। इसे एकाश्म पत्थर कहा जाता है। इसकी ऊंचाई लगभग 18 फीट है। इसका घेरा भी बहुत बड़ा है। यह दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग है। शिवलिंग का आधार बहुत विशाल है। इसे चबूतरे पर रखा गया है। दर्शन के लिए सीढ़ियां बनी हैं।

लोग नीचे से दर्शन करते हैं। शिवलिंग की चमक आज भी बरकरार है। चिकना पत्थर बहुत सुंदर दिखता है। इसकी बनावट प्राचीन कौशल दिखाती है। उस समय के कारीगर बहुत कुशल थे। इतने बड़े पत्थर को लाना कठिन था।

उस दौर में आधुनिक मशीनें नहीं थीं। फिर भी यह काम पूरा किया गया। यह अपने आप में अजूबा है। लोग इसे देखकर आश्चर्य करते हैं। शिवलिंग पर रोज पूजा होती है। महाशिवरात्रि पर बड़ा मेला लगता है। लाखों भक्त यहां दर्शन को आते हैं। माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।

एक रात में निर्माण की अनकही कहानी

इस मंदिर से एक रहस्य जुड़ा है। स्थानीय मान्यताएं बहुत दिलचस्प हैं। कहा जाता है कि निर्माण एक रात में होना था। राजा भोज ने यही संकल्प लिया था। कारीगरों ने रात में काम शुरू किया।

वे बहुत तेजी से काम कर रहे थे। पूरा ढांचा बनकर तैयार हो गया था। केवल छत का निर्माण बाकी रह गया। काम करते-करते सुबह हो गई। भोर की पहली किरण निकल आई।

नियम के मुताबिक, काम रोकना पड़ा। इसके बाद निर्माण कभी शुरू नहीं हुआ। यह कहानी पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। लोग आज भी यही मानते हैं। छत का अधूरा होना इसका प्रमाण है।

मंदिर की छत आज भी खुली है। यह कथा मंदिर को रहस्यमयी बनाती है। हर कोई यह कहानी सुनना चाहता है। इस रहस्य को कोई सुलझा नहीं पाया। मंदिर आज भी वैसा ही खड़ा है।

मंदिर के अधूरा रहने का वैज्ञानिक सच

इतिहासकारों की अपनी अलग-अलग राय है। वे वैज्ञानिक कारणों को मानते हैं। उनका मानना है कि यहां कोई प्राकृतिक आपदा आई। इस वजह से काम रुक गया होगा। कुछ लोग युद्ध को कारण मानते हैं। राजा भोज के समय युद्ध चल रहा था।

इस कारण निर्माण अधूरा छोड़ना पड़ा। कारीगर काम छोड़कर चले गए होंगे। पास की पहाड़ी पर नक्शे मिले हैं। पत्थरों पर डिजाइन उकेरी गई हैं। इससे पता चलता है कि योजना बड़ी थी। पूरा परिसर बनना बाकी रह गया था।

वास्तुशास्त्र के नियम भी कारण हो सकते हैं। शायद कोई बड़ा ढांचा ढह गया था। इसके बाद काम बंद कर दिया गया। पत्थर आज भी बिखरे पड़े हैं। सच्चाई जो भी हो, मंदिर अद्भुत है। अधूरा होना ही इसकी सुंदरता है। यह रहस्य पर्यटकों को आकर्षित करता है। इतिहासकार आज भी शोध कर रहे हैं।

स्थानीय मान्यताएं और पौराणिक ग्रन्थ

पौराणिक ग्रन्थों में कई बातें मिलती हैं। राजा भोज वास्तुशास्त्र के ज्ञाता थे। उन्होंने समरांगण सूत्रधार किताब लिखी थी। इस ग्रन्थ में मंदिर निर्माण के नियम हैं। स्थानीय लोग इसे पांडवों से जोड़ते हैं। कहा जाता है कि पांडव यहां आए थे। उन्होंने माता कुंती के लिए पूजा की।

उन्होंने एक रात में शिव मंदिर बनाया। अलग-अलग कहानियां प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे दैवीय कृपा मानते हैं। कुछ इसे राजा का संकल्प बताते हैं। हर कहानी का अपना एक रोमांच है। लोग इन कथाओं पर विश्वास करते हैं।

यह स्थान आस्था का बड़ा केंद्र है। यहां की मिट्टी में इतिहास बसा है। हर कोना एक कहानी कहता है। संस्कृति और परंपरा यहां दिखती है। त्यौहारों पर विशेष आयोजन होते हैं। लोग दूर-दूर से यहां आते हैं। मंदिर की ख्याति हर जगह फैली है।

वास्तुकला का बेजोड़ और अद्भुत नमूना

भोजपुर मंदिर की नक्काशी अद्भुत है। खंभों पर सुंदर चित्र बने हैं। नक्काशी देखकर लोग हैरान होते हैं। उस समय के औजार बहुत साधारण थे। मंदिर के प्रवेश द्वार बहुत ऊंचे हैं। खंभे बहुत विशाल और मजबूत हैं। पत्थरों को बिना सीमेंट जोड़ा गया है। यह प्राचीन तकनीक की मिसाल है।

छत का भाग आज भी देखा जा सकता है। गुंबद बनाने की तैयारी पूरी थी। बड़े-बड़े पत्थर रखे गए थे। वे पत्थर आज भी वहीं हैं। आसपास कई अधूरे अवशेष मौजूद हैं। एक ढलान वाला रास्ता बना है।

इसी रास्ते से पत्थर ऊपर गए थे। यह प्राचीन इंजीनियरिंग का सबूत है। वास्तु प्रेमी यहां अध्ययन करने आते हैं। यह मंदिर प्रेरणा का स्रोत है। भारतीय वास्तुकला का यह अनमोल रतन है। इसकी सुरक्षा बहुत जरूरी है।

पर्यटन और पहुंचने के आसान रास्ते

भोजपुर मंदिर जाना बहुत आसान है। यह भोपाल से केवल 28 किमी दूर है। सड़क मार्ग से आसानी से पहुंच सकते हैं। बस और टैक्सी हमेशा उपलब्ध रहती हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन भोपाल में है। हवाई अड्डा भी भोपाल में ही है। देश के प्रमुख शहरों से कनेक्टिविटी अच्छी है। आप किसी भी मौसम में जा सकते हैं।

सर्दियों का मौसम यहां आने के लिए बेस्ट है। अक्टूबर से मार्च तक मौसम अच्छा रहता है। धूप में घूमना आसान हो जाता है। बारिश में भी यह सुंदर दिखता है। यहां रुकने के लिए भोपाल अच्छा विकल्प है। वहां हर बजट के होटल मिलते हैं।

आप एक दिन में यात्रा पूरी कर सकते हैं। भोजन की अच्छी व्यवस्था मिलती है। आसपास कई अन्य देखने योग्य जगहें हैं। सांची के स्तूप भी पास में हैं। भीमबेटका गुफाएं भी यहां से करीब हैं। तो इसी तरह से आप पूरा टूर प्लान कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: d sutr