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एमपी में बैगा-भारिया-सहरिया बटालियन योजना : सीएम की सहमति, फिर भी 6 माह से अटकी

एमपी में बैगा-भारिया-सहरिया बटालियन योजना : सीएम की सहमति, फिर भी 6 माह से अटकी

    समझें क्या है पूरा मामला

    • मध्यप्रदेश में बैगा, भारिया और सहरिया जनजाति के युवाओं के लिए बटालियन बनाने की योजना है।
    • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 23 सितंबर 2024 को इसके निर्देश दिए थे।
    • जनजातीय कार्य विभाग ने प्रस्ताव बनाकर वित्त विभाग को भेजा, जहां यह 6 माह से अटका है।
    • बटालियन गठन में 80 से 100 करोड़ रुपए के बजट की जरूरत बताई जा रही है।
    • वित्त विभाग ने वित्तीय संसाधनों का हवाला देकर अभी तक हरी झंडी नहीं दी है।

    पीवीटीजी बटालियन: क्या है योजना

    मध्यप्रदेश में तीन विशेष पिछड़ी जनजातियां हैं। बैगा, भारिया और सहरिया। इन्हें पीवीटीजी (PVTG - Particularly Vulnerable Tribal Group) यानी विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह कहा जाता है। राज्य सरकार इन तीनों समूहों के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए एक बटालियन बनाना चाहती है।

    इस बटालियन को शौर्य संकल्प योजना के तहत तैयार किया जाना है। योजना में युवाओं को सेना, नेवी, एयरफोर्स, सीआरपीएफ (CRPF - Central Reserve Police Force), सीआईएसएफ (CISF - Central Industrial Security Force), आईटीबीपी (ITBP - Indo-Tibetan Border Police), बीएसएफ (BSF - Border Security Force), पुलिस, होमगार्ड और अन्य निजी सुरक्षा एजेंसियों में भर्ती के लिए प्रशिक्षण देना है।

    मुख्यमंत्री ने 18 माह पहले दिए थे निर्देश

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 23 सितंबर 2024 को स्पष्ट निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा था कि विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, भारिया और सहरिया के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए बटालियन गठित की जाए। सीएम ने इस काम में तेजी लाने के लिए भी विभाग को कहा था।

    इसके बाद जनजातीय कार्य विभाग ने काम शुरू किया। आर्मड फोर्सेज में भर्ती के लिए प्रशिक्षण की पूरी कार्ययोजना तैयार की गई। यह प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा गया। लेकिन तब से अब तक यह वहीं अटका हुआ है।

    फाइनेंस का ब्रेक, विभाग लाचार

    सूत्रों के मुताबिक वित्त विभाग ने वित्तीय संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए प्रस्ताव को 6 माह से रोक रखा है। बटालियन गठन और उसके संचालन में 80 से 100 करोड़ रुपए के बजट की जरूरत होगी। इतनी बड़ी रकम को लेकर वित्त विभाग अभी तक सहमत नहीं हुआ है।

    एसीएस (ACS - Additional Chief Secretary) वित्त मनीष रस्तोगी को इस मामले में 12 दिन में दो बार संदेश देकर अपडेट मांगा गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। यह बात खुद इस खबर में सामने आई है।

    आला अफसर भी बच रहे हैं

    इस मामले में अफसरशाही का रवैया भी दिलचस्प है। आयुक्त जनजातीय कार्य तरुण राठी का कहना है कि पीवीटीजी को आयुक्त सत्येंद्र सिंह देखते हैं। ओएसडी (OSD - Officer on Special Duty) सह निदेशक जनजातीय क्षेत्र विकास योजना सत्येंद्र सिंह के मुताबिक उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। यानी जिम्मेदारी के मामले में हर अफसर दूसरे की तरफ इशारा कर रहा है।

    कितनी है इन समूहों की आबादी

    2011 की जनगणना के मुताबिक बैगा जनजाति की आबादी 4,14,526 है। सहरिया की आबादी 6.15 लाख है और भारिया की आबादी करीब 50,000 है। ये तीनों समूह राज्य के कई जिलों में फैले हैं।

    बैगा विकास प्राधिकरण (Baiga Vikas Pradhikaran) 6 जिलों में काम करता है। इनमें मंडला, शहडोल, बालाघाट, उमरिया, डिंडोरी और अनूपपुर शामिल हैं। भारिया विकास प्राधिकरण (Bhariya Vikas Pradhikaran) छिंदवाड़ा जिले के तामिया विकासखंड के पातालकोट क्षेत्र के 12 गांवों को कवर करता है। सहरिया विकास प्राधिकरण (Sahariya Vikas Pradhikaran) 8 जिलों में काम करता है जिनमें श्योपुरकला, मुरैना, भिंड, शिवपुरी आदि शामिल हैं। हर प्राधिकरण में एक अध्यक्ष और तीन अशासकीय सदस्य मनोनीत किए जाते हैं।

    सभी पद खाली, सरकार का ध्यान कहां

    सीएम की मौजूदगी में हुई बैठक में जनजातीय कार्य विभाग ने बताया कि राज्य स्तरीय बैगा विकास प्राधिकरण का गठन 27 मई 2013 को किया गया था। लेकिन इसमें अभी सभी पद खाली हैं। यह स्थिति बताती है कि इन जनजातियों के विकास को लेकर कागजों पर तो काम होता है, लेकिन जमीन पर स्थिति अलग है।

    बालाघाट में बैगा महोत्सव भी

    इस बीच राज्य सरकार आगामी माह बालाघाट में जनजातीय महोत्सव मनाने की तैयारी में है। नक्सलवाद की समस्या से प्रभावित रहे बालाघाट और अन्य प्रभावित स्थानों पर विकास कार्यों की गति तेज करने को प्राथमिकता दी जाएगी। लेकिन जब तक बटालियन का प्रस्ताव वित्त विभाग में अटका है, युवाओं को रोजगार से जोड़ने का सपना अधूरा ही रहेगा।

    यह खबर क्यों जरूरी है?

    यह खबर भारतीय संविधान की पांचवीं अनुसूची और अनुच्छेद 46 की भावना से जुड़ी है, जो अनुसूचित जनजातियों के शिक्षा और आर्थिक उत्थान को सुनिश्चित करने की बात करते हैं। बैगा, भारिया और सहरिया देश की सबसे कमजोर जनजातियों में हैं। उनके युवाओं को रोजगार से जोड़ना सामाजिक न्याय का सवाल है। मुख्यमंत्री के 18 माह पुराने निर्देश के बाद भी प्रस्ताव का अटका रहना और अफसरों का जवाबदेही से बचना प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है। डिजिटल मीडिया की नैतिक जिम्मेदारी है कि ऐसे मामले जनता के सामने आएं ताकि दबाव बने और नीतियां जमीन पर उतरें।

    3 जरूरी FAQ

    सवाल 1: पीवीटीजी बटालियन क्या है और यह किन जनजातियों के लिए है?

    पीवीटीजी बटालियन मध्यप्रदेश की तीन विशेष पिछड़ी जनजातियों बैगा, भारिया और सहरिया के युवाओं के लिए प्रस्तावित एक प्रशिक्षण और रोजगार योजना है। इस बटालियन के जरिए इन जनजातियों के युवाओं को सेना, अर्धसैनिक बल, पुलिस और निजी सुरक्षा एजेंसियों में भर्ती के लिए तैयार किया जाएगा। यह शौर्य संकल्प योजना के तहत काम करेगी। इसका उद्देश्य इन जनजातियों को मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

    सवाल 2: यह प्रस्ताव क्यों अटका हुआ है?

    जनजातीय कार्य विभाग ने बटालियन के गठन और संचालन के लिए 80 से 100 करोड़ रुपए के बजट का प्रस्ताव तैयार किया और वित्त विभाग को भेजा। वित्त विभाग ने वित्तीय संसाधनों की कमी का हवाला देकर इस प्रस्ताव को 6 माह से रोक रखा है। इसके अलावा संबंधित अफसर भी जिम्मेदारी से बच रहे हैं और एक-दूसरे की तरफ इशारा कर रहे हैं।

    सवाल 3: बैगा, भारिया और सहरिया जनजाति मध्यप्रदेश के किन जिलों में रहती है?

    बैगा जनजाति मुख्य रूप से मंडला, शहडोल, बालाघाट, उमरिया, डिंडोरी और अनूपपुर जिलों में रहती है। भारिया जनजाति छिंदवाड़ा जिले के तामिया विकासखंड के पातालकोट क्षेत्र के 12 गांवों में बसी है। सहरिया जनजाति श्योपुरकला, मुरैना, भिंड और शिवपुरी आदि 8 जिलों में फैली हुई है। 2011 की जनगणना के अनुसार बैगा की आबादी 4,14,526, सहरिया की 6.15 लाख और भारिया की करीब 50,000 है।

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