समझें क्या है पूरा मामला...
- एमपी के 149 टोल प्लाजा अब एक नेटवर्क से जुड़ेंगे।
- टोल प्लाजा में गड़बड़ी अब भोपाल से पकड़ी जाएगी।
- हाइटेक निगरानी से टोल संचालन होगा और पारदर्शी।
- ग्वालियर चंबल के 19 टोल प्लाजा भी होंगे शामिल।
- साढ़े तीन करोड़ की लागत से बदलेगा टोल सिस्टम।
मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने बड़ा डिजिटल कदम उठाया है। प्रदेश के 149 टोल प्लाजा अब एक नेटवर्क से जुड़ेंगे। इसके लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। भोपाल मुख्यालय से हर टोल प्लाजा की निगरानी हो सकेगी। ग्वालियर चंबल अंचल के 19 टोल प्लाजा भी इसमें शामिल हैं।
क्या है नई व्यवस्था
एमपीआरडीसी यानी मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (Madhya Pradesh Road Development Corporation) ने यह पहल शुरू की है।
सभी टोल प्लाजा को एमपीएलएस यानी मैनेज्ड मल्टी प्रोटोकाल लेबल स्विचिंग (Multi Protocol Label Switching) नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। यह नेटवर्क सीधे भोपाल मुख्यालय से जुड़ा रहेगा। इस पूरे काम पर 3.81 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
कैसे होगी निगरानी
नई व्यवस्था लागू होने के बाद हर टोल प्लाजा की निगरानी रियल टाइम में होगी। अगर किसी टोल प्लाजा पर नेटवर्क डाउन होता है तो सूचना तुरंत मुख्यालय पहुंचेगी। कनेक्टिविटी बाधित होने या डेटा ट्रांसफर में गड़बड़ी होने पर भी अलर्ट मिलेगा। बैंडविड्थ कम मिलने जैसी समस्याएं भी तुरंत पकड़ में आएंगी।
हर टोल प्लाजा को समर्पित एमपीएलएस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। भोपाल मुख्यालय को हाई स्पीड नेटवर्क हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे प्रदेश के सभी टोल प्लाजा एक केंद्रीकृत डिजिटल नेटवर्क में आ जाएंगे।
पारदर्शिता और तेज समाधान
इस नई व्यवस्था से टोल संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी। राजस्व संग्रह की निगरानी भी अधिक प्रभावी होगी। तकनीकी गड़बड़ियों का समाधान अब समय रहते किया जा सकेगा।
किसी भी टोल प्लाजा पर समस्या आने पर सूचना तुरंत कंट्रोल सेंटर को मिलेगी। इससे खराबी जल्दी पकड़ में आएगी और कम समय में ठीक हो सकेगी। टोल संचालन बाधित होने की आशंका भी कम हो जाएगी।
डेटा से मिलेगी मदद
टोल संचालन से जुड़े सभी आंकड़ों का केंद्रीकृत रिकॉर्ड तैयार होगा। इससे राजस्व प्रबंधन आसान हो जाएगा। परिचालन समीक्षा और भविष्य की योजना बनाना भी सरल होगा।
अधिकारियों का मानना है कि इससे तकनीकी बाधाएं कम होंगी। टोल संचालन पहले से ज्यादा व्यवस्थित होगा। एमपीआरडीसी की सड़क परियोजनाओं की निगरानी भी अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनेगी।
कितने टोल प्लाजा शामिल
इस प्रोजेक्ट में भोपाल डिवीजन के 20 टोल प्लाजा शामिल हैं। ग्वालियर डिवीजन के 19, छिंदवाड़ा के आठ और धार के 20 टोल प्लाजा भी इसमें आएंगे।
इंदौर के 9, जबलपुर के 10 और नर्मदापुरम के तीन टोल प्लाजा शामिल किए गए हैं। रीवा के 13, सागर के 15, शहडोल के नौ और उज्जैन के 23 टोल प्लाजा भी इस नेटवर्क का हिस्सा बनेंगे।
ग्वालियर डिवीजन के टोल प्लाजा
ग्वालियर डिवीजन में उमरी, देवखेड़ी, बिलौआ और लुक्की टोल प्लाजा को चिह्नित किया गया है। बसवाहा, भीमपुरा, पंडोला और बरेठा टोल प्लाजा भी इसमें शामिल हैं।
फूप, पलोथर, पगारा और फुटेरा टोल प्लाजा को भी इस प्रोजेक्ट में जोड़ा गया है। रतवई, चितोरा, धनेली, सौसा, मौ, मगरौनी और केरुआ टोल प्लाजा भी इस सूची में हैं।
FAQ
Q. एमपी के कितने टोल प्लाजा इस नेटवर्क से जुड़ेंगे A. प्रदेश के कुल 149 टोल प्लाजा एक डिजिटल नेटवर्क से जुड़ेंगे। इसके लिए एमपीआरडीसी ने टेंडर जारी किया है। ग्वालियर चंबल अंचल के 19 टोल प्लाजा भी इसमें शामिल हैं। Q. इस प्रोजेक्ट पर कितना खर्च आएगा A. इस पूरे प्रोजेक्ट पर 3.81 करोड़ रुपए की लागत आएगी। यह राशि नेटवर्क तैयार करने में खर्च होगी। भोपाल मुख्यालय को हाई स्पीड नेटवर्क हब बनाया जाएगा। Q. इस नई व्यवस्था से क्या फायदा होगा A. टोल प्लाजा में गड़बड़ी की सूचना तुरंत भोपाल मुख्यालय पहुंचेगी। इससे टोल संचालन में पारदर्शिता बढ़ेगी। राजस्व निगरानी भी पहले से ज्यादा प्रभावी होगी।

