News in Short
- दिव्यांग कर्मचारियों का प्रमोशन पिछले 9 साल से रुका हुआ है।
- दिव्यांगों के लिए विशेष आरक्षण के प्रावधान हैं फिर भी पदोन्नति में रोड़ा अटका है।
- पदोन्नति न होने से दिव्यांगों के हजारों पदों पर नियुक्ति भी अटकी है।
- सपाक्स और अजाक्स संगठनों के मतभेद का खामियाजा उठा रहे दिव्यांग
- सरकार की बेरुखी से दिव्यांग कर्मचारी वर्ग के हित प्रभावित हो रहे हैं।
News in Detail
मध्यप्रदेश में पिछले लगभग 9 सालों से सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन रुके हुए हैं। सात लाख सरकारी कर्मचारी सिर्फ हाईकोर्ट के भरोसे हैं। मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला आना बाकी है, लेकिन फैसले से पहले 1 लाख सरकारी कर्मचारी पदोन्नति के बिना ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
वहीं सैंकड़ों अगले कुछ महीनों में रिटायर होने जा रहे हैं। दूसरी तरफ कर्मचारियों का एक ऐसा वर्ग भी है जिसके लिए विशेष प्रावधान तो किए गए हैं फिर भी वे पदोन्नति से वंचित हैं।
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संचालनालय की अनुशंसा भी बेअसर
प्रदेश में दिव्यांगजनों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ दिलाने के लिए दिव्यांगजन सशक्तिकरण संचालनालय से सामान्य प्रशासन विभाग को अनुशंसा भेजी गई है। मप्र दिव्यांग अधिकारी कर्मचारी कल्याण संघ की मांग पर आयुक्त ने लिखा है कि दिव्यांग अधिनियम 1995 में पदोन्नति में आरक्षण का प्रावधान है। इसे दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 में भी यथावत रखा गया है। इसके बावजूद दिव्यांग अधिकारी-कर्मचारियों को यह लाभ नहीं दिया जा रहा है।
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दूसरे राज्यों में दिव्यांगों को प्रमोशन
कई दिव्यांग कर्मचारियों ने उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के साथ आयुक्त कार्यालय में आवेदन दिया है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार के सभी विभागों में दिव्यांग अधिकारी-कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ मिल रहा है।
देश के कई राज्यों में दिव्यांगकर्मियों को लाभ मिल रहा है। मध्य प्रदेश में भी दिव्यांगों की पदोन्नति पर रोक नहीं है, लेकिन अजाक्स-सपाक्स के मतभेद और कोर्ट केस की आड़ में रोड़े अटकाए जा रहे हैं।
कोर्ट भी मांग चुका सरकार से जवाब
दिव्यांग कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण का लाभ नहीं दिये को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव तथा वित्त विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर सचिव से जवाब तलब किया जा चुका है। सरकार की चुप्पी की वजह से प्रदेश में कार्यरत 18 हजार से ज्यादा दिव्यांग कर्मचारी-अधिकारी सालों से पदोन्नति की राह देख रहे हैं।
मध्य प्रदेश में प्रावधानों की अनदेखी
दिव्यांग अधिकारी कर्मचारी संघ जबलपुर की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम 2016 की धारा 36 के तहत सीधी भर्ती और प्रमोशन में भी दिव्यांगों को आरक्षण का लाभ दिए जाने का प्रावधान है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केन्द्र सरकार भी राज्यों को दिव्यांगों के लिए नियम बनाने निर्देश दे चुकी है। वहीं प्रदेश सरकार ने 2017 में दिव्यांगों के लिए सीधी भर्ती में ही आरक्षण का प्रावधान रखा है, लेकिन पदोन्नति में इसे अनदेखा किया जा रहा है।
जीएडी के मार्गदर्शन, कोर्ट के फैसले का इंतजार
सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के सहायक संचालक अरुण जोशी का कहना है कि विभाग से इस संबंध में शासन को पत्र लिखा गया है। आरक्षण के आधार पर पदोन्नति का मामला न्यायालय में विचाराधीन होने की वजह से दिव्यांगों का प्रमोशन भी रुका हुआ है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों का इंतजार है। वहीं विभागों में विशेष अभियान के तहत नियुक्तियां जल्द ही शुरू कर दी जाएंगी।
फैक्ट फाइल...
| दिव्यांगों के लिए आरक्षित पद | 37,228 |
| पदोन्नति न मिलने से प्रभावित | 18,000 |
| स्पर्श पोर्टल पर दर्ज संख्या | 9,00,000 |
| स्वास्थ्य विभाग | 10,120 |
| स्कूल शिक्षा विभाग | 5,771 |
| उच्च शिक्षा विभाग | 771 |
| पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग | 683 |

