समझें क्या है पूरा मामला
- MP में पदोन्नति नियम 2025 पर विवाद शुरू हुआ।
- ऊर्जा विभाग के इंजीनियरों ने सवाल उठाए हैं।
- संघ ने प्रमोशन रोकने का आरोप लगाया है।
- कई वरिष्ठ पद खाली होने की बात कही गई।
- प्रमोशन नहीं होने से भर्ती प्रभावित होने की आशंका है।
प्रमोशन रोकने का आरोप
मध्य प्रदेश में पदोन्नति नियम-2025 लागू होने के बाद सवाल उठ रहे हैं। सामान्य प्रशासन और वाणिज्यिक कर विभाग के बाद मामला ऊर्जा विभाग तक पहुंचा है। बिजली कंपनियों के इंजीनियरों ने प्रमोशन रोकने का आरोप लगाया है। इंजीनियर संघ ने रिक्त पदों का हवाला दिया है। संघ का कहना है कि पात्र अधिकारी होने के बाद भी प्रमोशन नहीं मिल रहा। इससे कामकाज और रोजगार पर असर पड़ने की आशंका है।
प्रमोशन रुका तो भर्ती भी क्यों अटक सकती है?
ऊर्जा विभाग में विवाद सिर्फ इंजीनियरों के प्रमोशन का नहीं है। मामला पूरी पदोन्नति श्रृंखला (Promotion Chain) से जुड़ा है। यदि वरिष्ठ अधिकारियों को समय पर पदोन्नति नहीं मिलेगी तो उनके नीचे के पद खाली नहीं होंगे।
इसका सीधा असर नई भर्तियों पर पड़ेगा और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी सीमित हो सकते हैं। यही वजह है कि इंजीनियर संघ इसे केवल कर्मचारियों का मुद्दा नहीं, बल्कि विभाग की कार्यक्षमता और भविष्य की भर्ती व्यवस्था से जुड़ा बड़ा सवाल बता रहा है।
क्या है इंजीनियरों का आरोप?
मध्यप्रदेश विद्युत मंडल इंजीनियर संघ ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और ऊर्जा मंत्री को भेजे ज्ञापन में आरोप लगाया है कि पात्र और वरिष्ठ इंजीनियरों की अनदेखी की जा रही है। संघ का कहना है कि सरकार रिक्त पद जल्द भरना चाहती है, लेकिन बिजली कंपनियों में अधिकारियों की व्याख्या और निर्णयों के कारण प्रमोशन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही।
कितने पद खाली हैं?
संघ के मुताबिक कई महत्वपूर्ण पद लंबे समय से रिक्त हैं। मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी में सहायक इंजीनियर से कार्यपालन इंजीनियर के करीब 69 पद खाली हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में इसी श्रेणी के 72 पद रिक्त बताए गए हैं। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी में भी कार्यपालन इंजीनियर से अधीक्षण अभियंता के पद खाली हैं। संघ का दावा है कि रिक्तियों के बावजूद पात्र इंजीनियरों को पदोन्नति नहीं मिली।
विवाद की सबसे बड़ी वजह क्या है?
इंजीनियर संघ का कहना है कि 10 से 17 जुलाई 2026 के बीच ऐसी स्थिति बनी थी, जब मंडल कैडर में पदोन्नति के लिए पात्र अधिकारी उपलब्ध नहीं थे। संघ का आरोप है कि उस समय कंपनी कैडर के योग्य इंजीनियरों को मौका दिया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। बाद में जिन अधिकारियों को पदोन्नति मिली, वे कई वर्षों तक अगली पदोन्नति के पात्र नहीं होंगे। इससे कई पद लंबे समय तक खाली रहने की आशंका जताई जा रही है।
नियमों की गलत व्याख्या का आरोप
संघ ने ऊर्जा विभाग के 9 जून 2011 के आदेश की गलत व्याख्या किए जाने का आरोप लगाया है। इंजीनियर संघ का कहना है कि वर्ष 2014 में इसी तरह की परिस्थितियों में कंपनी कैडर के अधिकारियों को पदोन्नति दी गई थी। इसलिए वर्तमान प्रक्रिया पुराने निर्णयों और नियमों की भावना से मेल नहीं खाती।
रोजगार पर भी असर पड़ने का दावा
संघ का कहना है कि यदि वरिष्ठ अधिकारियों को प्रमोशन नहीं मिलेगा तो नीचे के पद भी खाली नहीं होंगे। ऐसी स्थिति में नई नियुक्तियों की प्रक्रिया प्रभावित होगी और इंजीनियरिंग युवाओं के लिए रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं। इसलिए समय पर पदोन्नति को प्रशासनिक और रोजगार दोनों दृष्टि से जरूरी बताया गया है।
सरकार से क्या मांग की गई है?
इंजीनियर संघ ने मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से मांग की है कि: पात्रता और वरिष्ठता के आधार पर सभी रिक्त पदों पर जल्द पदोन्नति की जाए। सभी बिजली कंपनियों के लिए एक समान और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। पदोन्नति नियम-2025 का समान रूप से पालन सुनिश्चित किया जाए।
लंबित प्रमोशन प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए
संघ ने जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। इंजीनियरों में बढ़ते असंतोष का दावा किया गया है। पदोन्नति नियम-2025 के बाद विवाद बढ़ गया है। इंजीनियरों ने प्रमोशन रोकने का आरोप लगाया है।
बिजली कंपनियों में कई पद खाली होने की बात कही गई है। संघ ने नियमों की गलत व्याख्या का आरोप लगाया है। भर्ती और रोजगार प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग की गई है।
यूनाइटेड फोरम फॉर पावर एम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष रमेश सिंह कुशवाह ने बयान दिया। उन्होंने वर्ष 2011 की व्यवस्था के अनुसार प्रमोशन प्रक्रिया लागू करने की मांग की। उनका कहना है कि इससे प्रशासनिक स्थिरता बनी रहेगी। कर्मचारियों के हित भी सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने सरकार से निष्पक्ष समाधान निकालने की अपील की।
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