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एमपी के कॉलेजों में सितंबर से होंगे छात्र संघ चुनाव, जबलपुर हाई कोर्ट का आदेश

एमपी के कॉलेजों में सितंबर से होंगे छात्र संघ चुनाव, जबलपुर हाई कोर्ट का आदेश

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश में साल 2017 के बाद छात्र संघ चुनाव बंद हो गए थे।
  • चुनाव कराने के लिए साल 2024 में हाई कोर्ट में याचिका दायर हुई।
  • पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सरकार से एकेडमिक कैलेंडर मांगा था।
  • सरकार ने सितंबर 2026 में छात्रसंघ चुनाव का कार्यक्रम कोर्ट में पेश किया।
  • हाई कोर्ट ने चुनाव के जरिए छात्र संघ गठन कराने के निर्देश देकर याचिका का निपटारा कर दिया।

मध्य प्रदेश के लाखों छात्रों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। करीब आठ साल बाद छात्र संघ चुनाव का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। जबलपुर हाई कोर्ट में उच्च शिक्षा विभाग ने सत्र 2026-27 का एकेडमिक कैलेंडर पेश किया। इस कैलेंडर में सितंबर 2026 में छात्र संघ गठन का स्पष्ट कार्यक्रम शामिल है। कोर्ट ने इस कैलेंडर को रिकॉर्ड पर लेते हुए चुनाव के माध्यम से ही छात्र संघ गठन कराने के निर्देश दिए। इसके साथ ही लंबे समय से लंबित याचिका का निपटारा भी कर दिया गया। अब प्रदेश के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति फिर से सक्रिय होने की तैयारी शुरू मानी जा रही है।

हाई कोर्ट के निर्देश के बाद सरकार ने पेश किया पूरा कार्यक्रम

पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से साफ पूछा था कि इस शैक्षणिक सत्र में छात्र संघ चुनाव कब कराए जाएंगे। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया था कि वह अपना एकेडमिक कैलेंडर पेश करे। सोमवार की सुनवाई में उच्च शिक्षा विभाग ने वर्ष 2026-27 का पूरा अकादमिक कैलेंडर अदालत के सामने रखा। इसमें पढ़ाई, परीक्षा, अवकाश और अन्य गतिविधियों के साथ छात्र संघ गठन की तारीख भी शामिल थी। सरकार ने कोर्ट को बताया कि सितंबर 2026 में छात्र संघ चुनाव और गठन कराया जाएगा।

सितंबर में होंगे छात्र संघ चुनाव

सरकार की ओर से पेश किए गए कैलेंडर के अनुसार जुलाई में प्रवेश उत्सव का आयोजन होगा। इसके बाद सितंबर 2026 में छात्र संघ चुनाव कराए जाएंगे। नवंबर 2026 तक खेलकूद प्रतियोगिताएं, एनसीसी, एनएसएस, युवा उत्सव और अन्य छात्र गतिविधियां पूरी कर ली जाएंगी। फरवरी 2027 के पहले सप्ताह में स्नेह सम्मेलन, वार्षिकोत्सव, पुरस्कार वितरण और वार्षिक पत्रिका का प्रकाशन होगा। इससे साफ है कि पूरे शैक्षणिक सत्र का कार्यक्रम पहले से तय कर दिया गया है।

पढ़ाई और परीक्षाओं का भी तय हुआ पूरा शेड्यूल

एकेडमिक कैलेंडर के अनुसार स्नातकोत्तर प्रथम और तृतीय सेमेस्टर की कक्षाएं एक जुलाई 2026 से शुरू होकर 12 नवंबर तक चलेंगी। आंतरिक मूल्यांकन अगस्त के पहले सप्ताह से सितंबर के अंतिम सप्ताह तक होगा। प्रायोगिक परीक्षाएं 20 अक्टूबर से 5 नवंबर तक आयोजित होंगी। सेमेस्टर परीक्षाएं 18 नवंबर से 10 दिसंबर तक कराई जाएंगी। इसके बाद परिणाम 31 दिसंबर तक घोषित किए जाएंगे। वहीं दूसरे और चौथे सेमेस्टर का शैक्षणिक कार्य दिसंबर से अप्रैल तक चलेगा और अंतिम परिणाम जून 2027 तक जारी होंगे।

कानून व्यवस्था का मुद्दा उठा, कोर्ट ने दिया साफ जवाब

सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से यह तर्क रखा गया कि छात्र संघ चुनाव के दौरान कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। इस पर हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि जरूरत हो तो पुलिस सुरक्षा ली जाए। लेकिन इस कारण चुनाव नहीं रोके जा सकते। कोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि छात्र संघ का गठन चुनाव के माध्यम से ही कराया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि तय कार्यक्रम के अनुसार सितंबर में चुनाव कराए जाएं।

याचिकाकर्ता ने बताया कैसे पूरी हुई दो साल की कानूनी लड़ाई

याचिकाकर्ता और एनएसयूआई के अधिवक्ता अदनान अंसारी ने बताया कि पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि इस सत्र में चुनाव कब होंगे। उसी के बाद सरकार ने सितंबर में छात्र संघ चुनाव का प्रावधान करते हुए नया एकेडमिक कैलेंडर तैयार किया। उन्होंने कहा कि आज कोर्ट ने उसी कैलेंडर के आधार पर चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ कर दिया कि छात्र संघ गठन चुनाव के जरिए ही होना चाहिए।

2017 से रुका था मामला, 2024 में पहुंचा हाई कोर्ट

मध्य प्रदेश में साल 2017 के बाद छात्र संघ चुनाव पूरी तरह बंद हो गए थे। इसके बाद कई वर्षों तक चुनाव नहीं कराए गए। इस मुद्दे को लेकर साल 2024 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। करीब दो साल तक यह मामला अदालत में चलता रहा। कई सुनवाई के बाद अब सरकार ने चुनाव की समयसीमा कोर्ट के सामने रख दी है। इसके बाद अदालत ने इस वर्ष चुनाव कराने का रास्ता साफ कर दिया।

छात्र राजनीति के लिए क्यों अहम है यह फैसला

छात्र संघ चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने की प्रक्रिया नहीं माने जाते। इन्हीं चुनावों से कई युवा सार्वजनिक जीवन और राजनीति में आगे बढ़ते हैं। पिछले आठ वर्षों से चुनाव नहीं होने के कारण छात्र नेतृत्व की नई पीढ़ी तैयार नहीं हो पा रही थी। अब सितंबर 2026 में चुनाव होने से कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में छात्र प्रतिनिधित्व फिर से शुरू होगा। इससे छात्र समस्याओं को उठाने के लिए एक वैधानिक मंच भी मिलेगा।

अब पूरे प्रदेश की नजर सितंबर 2026 पर

हाई कोर्ट के आदेश और सरकार के एकेडमिक कैलेंडर के बाद अब छात्र संघ चुनाव लगभग तय माने जा रहे हैं। कॉलेज प्रशासन भी अब चुनाव की तैयारियों में जुटेगा। प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था और चुनाव प्रक्रिया की रूपरेखा तैयार करनी होगी। वहीं छात्र संगठनों ने भी अपनी गतिविधियां तेज करना शुरू कर दी हैं। आठ साल बाद होने जा रहे इन चुनावों को लेकर पूरे प्रदेश में उत्साह का माहौल बनने लगा है।

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