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एमपी में स्वास्थ्य व्यवस्था ठप, 32 हजार संविदा स्वास्थ्यकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

एमपी में स्वास्थ्य व्यवस्था ठप, 32 हजार संविदा स्वास्थ्यकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर

ध्य प्रदेश के लगभग 32 हजार संविदा स्वास्थ्यकर्मी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत कार्यरत हैं। मंगलवार से ये सभी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। उन्होंने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह के कामों का बहिष्कार कर दिया है।

एमपी के संविदा स्वास्थ्यकर्मी संघ प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र भदौरिया और संयोजक विजय ठक्कर ने बताया कि ये कर्मचारी प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को निष्ठापूर्ण तरीके से प्रदान करते आ रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर राज्य को सम्मान और पुरस्कार भी मिल चुके हैं।

लेकिन कर्मचारियों के हितों को लगातार अनदेखा किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में डिफॉल्ट घोषणाओं के बावजूद एक साल बीतने के बाद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस वजह से अब कर्मचारियों ने चरणबद्ध आंदोलन शुरू कर दिया है।

कर्मचारियों की मुख्य मांगें

  • सभी संविदा कर्मचारियों को नियमितिकरण का लाभ मिले।
  • एनपीएस और स्वास्थ्य बीमा का लाभ प्रदान किया जाए।
  • अन्य राज्यों की तरह 10% वार्षिक वेतन वृद्धि दी जाए।
  • मंहगाई भत्ता नियमित कर्मचारियों की तरह दिया जाए।
  • सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी के वेतन में पीबीआई समायोजित किया जाए।
  • शासन द्वारा तय की गई वेतन समकक्षता में सुधार किया जाए।
  • संविदा कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों जैसी छुट्टियां मिलें।
  • समान कार्य और समान वेतन सुनिश्चित होने तक सार्थक एप (digital services) बंद रखा जाए।

आंदोलन की प्रक्रिया

  • 25 मई से 27 मई: सभी जिलों में कर्मचारी काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन।
  • 28-29 मई: सभी कलेक्टर, CMHO और BMO को ज्ञापन सौंपा।
  • 30 मई - 1 जून: जनप्रतिनिधियों को अपनी पीड़ा से अवगत कराया।
  • 2 जून: सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यों का बहिष्कार।
  • 8 जून: मुख्यमंत्री निवास का घेराव योजना के तहत किया जाएगा।

कर्मचारियों का कहना है कि ये कदम मजबूरी में उठाया गया है। उन्होंने सरकार से समान अधिकार और वेतन की मांग की है।

संविदा स्वास्थ्यकर्मी हड़ताल का संभावित प्रभाव

  • अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं में देरी।
  • डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं पर असंगति और बाधा।
  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं में परेशानी।
  • सरकारी प्रयासों की प्रभावशीलता पर सवाल उठ सकते हैं।

सरकार ने फिलहाल कोई तत्काल प्रतिक्रिया या समाधान योजना जारी नहीं की है। कर्मचारी संघ ने कहा कि सभी सरकारी निर्णयों का पालन तभी किया जाएगा, जब उनकी मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई हो।

राजनीतिक गलियारों में मची खलबली, विपक्ष ने साधा निशाना

इस हड़ताल ने मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार की चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं। विपक्ष को बैठे-बिठाए सरकार को घेरने का एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा है कि जो सरकार अपने स्वास्थ्य योद्धाओं को उनका हक नहीं दे सकती, उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं है। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक सरकार की किरकिरी हो रही है।

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि यदि इस हड़ताल को जल्द ही बातचीत के जरिए नहीं सुलझाया गया, तो यह आंदोलन सरकार के लिए गले की हड्डी बन सकता है। मध्य प्रदेश में पहले से ही संविदा संस्कृति को खत्म करने की मांग उठती रही है।

FAQ
Q. संविदा स्वास्थ्यकर्मी हड़ताल क्यों कर रहे हैं? A. कर्मचारी नियमितिकरण, वेतन वृद्धि, मंहगाई भत्ता और समान सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। पिछले साल मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं हुआ। Q. हड़ताल कब शुरू हुई और कौन-कौन से काम प्रभावित होंगे? A. हड़ताल 2 जून से अनिश्चितकालीन है। सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होंगी।

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