मध्य प्रदेश में अगले साल होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत राज चुनावों में एक अहम बदलाव हो सकता है। अब तक जिला और जनपद पंचायत के अध्यक्ष, सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं। इस प्रणाली में अक्सर आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक जोड़-तोड़ की राजनीति देखने को मिलती है।
अब सरकार इस प्रणाली में बदलाव लाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत पंचायत के अध्यक्षों का चुनाव नगर निगम के महापौर की तरह प्रत्यक्ष प्रणाली से, यानी सीधे जनता से कराया जा सकता है।
क्या है यह प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली?
प्रत्यक्ष चुनाव प्रणाली के तहत महापौर और नगर पालिका/नगर परिषद के अध्यक्षों का चुनाव सीधे जनता द्वारा किया जाता है। इस प्रक्रिया में जनता अपने वोटों से चुनाव करती है। इस तरीके में किसी भी पार्टी या समूह के दबाव और जोड़-तोड़ की राजनीति की गुंजाइश खत्म हो जाती है।
राज्य सरकार की तैयारियां
सरकार इस बदलाव के लिए पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग से अन्य राज्यों की प्रणालियों का अध्ययन करवा रही है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस पर खास ध्यान देने को कहा है। राज्य निर्वाचन आयोग को भी इस बदलाव के लिए अपनी तैयारी करनी होगी और अगर इस प्रस्ताव को लागू करना है तो पंचायती राज अधिनियम में संशोधन किया जाना होगा।
राजनीतिक दलों का प्रभाव
मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव भले ही गैरदलीय आधार पर होते हैं, लेकिन इन चुनावों में राजनीतिक दलों का खासा दखल रहता है। कई बार देखा गया है कि जिस दल के पास ज्यादा संख्या होती है, उसी के समर्थक अध्यक्ष बनते हैं। अन्यथा, चुनाव में उम्मीदवारों को प्रलोभन दिए जाने और धमकाने की घटनाएं भी सामने आई हैं। ऐसे में यह बदलाव पंचायत चुनावों में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
कब होंगे चुनाव?
मध्य प्रदेश में 2027 में नगर निगम और पंचायत चुनाव एक साथ प्रस्तावित हैं। अगर पंचायतों में भी महापौर की तर्ज पर अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराना है, तो इसके लिए जल्द ही पंचायती राज अधिनियम में संशोधन करना होगा। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग को भी अपने नियमों में बदलाव करना पड़ेगा, ताकि नई चुनावी प्रणाली सही ढंग से लागू हो सके।
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