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एमपी वित्त विभाग का आदेश, बाबू से लेकर अफसर तक, खर्च का देना होगा हिसाब

एमपी वित्त विभाग का आदेश, बाबू से लेकर अफसर तक, खर्च का देना होगा हिसाब

News In Short

  • सभी विभागों को 29 मई तक अपने खर्च का मिलान करना होगा।
  • हिसाब में गड़बड़ी मिलने पर इसे गंभीर वित्तीय लापरवाही माना जाएगा।
  • सचिव स्तर के अधिकारी खुद बैठकर रिकॉर्ड के मिलान की निगरानी करेंगे।
  • अटकी हुई तकनीकी स्वीकृतियों को भी इसी समय सीमा में जारी करना होगा।
  • जनता के पैसे का सही इस्तेमाल दिखाने के लिए एजीएमपी ने समय सीमा तय की।

News In Detail

मध्यप्रदेश सरकार अब एक-एक पाई का हिसाब चुकता करने की तैयारी में है। वित्तीय वर्ष 2025-26 खत्म हो चुका है। अब वक्त आ गया है यह देखने का कि जनता की मेहनत की कमाई को सरकार ने कहां और कैसे खर्च किया है।

29 मई तक की डेडलाइन

खर्च की गई राशि का हिसाब मिलाने के लिए एमपी वित्त विभाग ने सभी विभागों को आदेश दिया है। आदेश में कहा गया है कि 29 मई तक वे अपने खर्चों का मिलान पूरी तरह से कर लें। इससे यह पता चल सकेगा कि जिन योजनाओं पर पैसा खर्च किया गया वह सही तरीके से इस्तेमाल हुआ या नहीं।

खर्च और सरकारी रिकॉर्ड में अंतर

अक्सर बजट बनने के बाद विभागों द्वारा किए गए खर्च और सरकारी रिकॉर्ड में कुछ फर्क होता है। इस फर्क को दूर करने के लिए एजीएमपी महालेखाकार को खर्च और बजट में दिए गए पैसे का मिलान करना होता है। साथ ही राज्य के छह हजार 500 वित्तीय अधिकारियों का भी यही काम होता है।

जनता की गाढ़ी कमाई का इस्तेमाल

वित्त विभाग के मुताबिक, एजीएमपी ने 17 अप्रैल को सभी विभागों को समय सारणी भेजी थी। इसमें खर्च का मिलान करना था। अब 29 मई के बाद किसी भी विभाग की कोई दलील नहीं सुनी जाएगी।

वहीं यदि आंकड़ों में कोई फर्क पाया गया या मिलान नहीं हुआ तो इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता माना जाएगा। इसके आधार पर सीएजी रिपोर्ट भी तैयार की जाती है।

इसमें बताया जाता है कि जनता की गाढ़ी कमाई का किस योजना में सही तरीके से इस्तेमाल हुआ। इसके अलावा किसमें नहीं हुआ और क्यों नहीं हुआ ये बात भी रिपोर्ट में बताई जाती है।

बाबू से लेकर अफसर तक के खर्च का रिकॉर्ड

अब विभागों में बुक एडजस्टमेंट और समय अनुसूची को लेकर हलचल मची हुई है। विभागों को सिर्फ खर्च का मिलान नहीं करना है। जिन तकनीकी स्वीकृतियों को लटका दिया गया था, उन्हें भी इसी वक्त तक जारी करना होगा।

वित्त विभाग ने मंत्रालय के सभी अपर मुख्य सचिवों और सचिवों को व्यक्तिगत रूप से काम की निगरानी करने को कहा है। 29 मई तक बाबू से लेकर अफसर तक सभी को खर्च के रिकॉर्ड का मिलान करना होगा।

ये खबर क्यों जरूरी है?

यह खबर इसलिए जरूरी है क्योंकि यह सीधे तौर पर आपके टैक्स और जनता की गाढ़ी कमाई की सुरक्षा से जुड़ी है। जब सरकार खर्चों का बारीकी से हिसाब मिलाती है, तो भ्रष्टाचार और पैसों की हेराफेरी की गुंजाइश खत्म हो जाती है।

29 मई की यह डेडलाइन अफसरों की जवाबदेही तय करती है। इससे सरकारी योजनाओं का पैसा बीच में लटकने के बजाय सही जगह पहुंचता है।

आसान शब्दों में कहें तो, यह प्रक्रिया पक्का करती है कि सरकार का एक-एक पैसा ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ जनता के विकास पर ही खर्च हुआ है।

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