भोपाल जिला अदालत की एससी-एसटी स्पेशल कोर्ट में जनवरी 2025 से अभी तक लगभग 100 मामलों में फैसला सुनाया गया है। इनमें से करीब 80 मामलों में आरोपियों को बरी कर दिया गया।
इन 80 मामलों में से 65 में आरोपियों के बरी होने का सबसे बड़ा कारण फरियादी का कोर्ट में अपना बयान बदलना रहा है।
इस वजह से अभियोजन के पास आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं बच पाए।
राशि मिलने के बाद बदलते हैं बयान
बता दें कि एससी-एसटी अत्याचार अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में सरकार पीड़ित और फरियादी को अलग-अलग समय पर आर्थिक मदद देती है। जानकारी के अनुसार कुछ मामलों में फरियादी जब ये मदद पा लेते हैं, तो वे अपना बयान बदल देते हैं।
सबूत न मिलने पर आरोपी बरी
उदाहरण के तौर पर बात करें तो 02 मार्च 2020 को एक मामला सामने आया था। इसमें पीड़ित रामदयाल जाटव ने तीन युवकों के खिलाफ शिकायत की थी।
रामदयाल ने कहा था कि उसके पिता के 500 रुपए के उधारी को लेकर आरोपी उसके खेत में पहुंचे, उसे जातिसूचक गालियां दीं और डंडों से पीटा था।
वहीं सुनवाई के दौरान रामदयाल ने अपना बयान बदल लिया। कहा कि पैसे को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ था। न ही वहां कोई डंडा था। साक्ष्य की कमी के कारण कोर्ट ने तीनों आरोपियों को बरी कर दिया गया था।
पीड़िता ने पलटा बयान, आरोपी बरी
दूसरा केस 13 जुलाई 2019 का है। एक पीड़िता ने शिकायत की थी कि वह अपनी बहन के साथ न्यू मार्केट से काटजू अस्पताल जा रही थी। इस दौरान अजहर अली नाम के युवक ने बुरी नीयत से उसका हाथ पकड़ लिया था।
पुलिस ने इस मामले में एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसकी बहन ने कोर्ट में अलग-अलग बयान दिए थे।
दोनों ने यह भी कहा था कि घटना के बाद वे अस्पताल न जाकर सीधे थाने पहुंची थीं। यहां भी बयानों में विरोधाभास होने पर कोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया गया था।
कितनी होती है मुआवजा राशि?
गंभीर अपराध जैसे दुष्कर्म या हत्या में पीड़ित को आठ लाख 25 हजार रुपए तक का मुआवजा मिल सकता है। वहीं मारपीट या छेड़खानी के मामलों में दो से तीन लाख रुपए तक का मुआवजा मिलता है। मामला उत्पीड़न का हो तो मुआवजा राशि 60 हजार रुपए तक हो सकती है।
पीड़ित को मुआवजा राशि तीन चरणों में मिलती है। सबसे पहले एफआईआर दर्ज होने पर लगभग 50 प्रतिशत मुआवजा मिल जाता है। इसके बाद कोर्ट में चालान पेश होने पर 25% और बाकी की राशि दोष साबित होने पर दी जाती है।
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