Dailyhunt
गैरकानूनी सरोगेसी का काला खेल, 15 लाख में बिक रही कोख, खूबसूरत लड़कियों की ज्यादा कीमत

गैरकानूनी सरोगेसी का काला खेल, 15 लाख में बिक रही कोख, खूबसूरत लड़कियों की ज्यादा कीमत

त्तरप्रदेश के लखनऊ में गैरकानूनी तरीके से सरोगेसी का रैकेट चलाया जा रहा है। लखनऊ-सीतापुर बॉर्डर के पास स्थित इटौंजा कस्बे में सहारा वेलकेयर हॉस्पिटल का मालिक अफजल अंसारी इस गैरकानूनी धंधे में शामिल है।

उसका दावा है कि सिर्फ लखनऊ में ही 10 ऐसे सेंटर हैं, जहां बिना किसी पुरुष के सीमेन (वीर्य) से लड़कियों से बच्चा पैदा कराया जाता है।

जानकारी के अनुसार मां बनने की कीमत महिला की उम्र, कद-काठी और रंग-रूप के हिसाब से तय होती है। कीमत पांच लाख से लेकर 15 लाख रुपए तक हो सकती है। खासकर खूबसूरत लड़कियों के लिए तो 15 लाख तक की मांग की जाती है।

निःसंतान पति-पत्नी असली टारगेट

दैनिक भास्कर में छपी एक खबर के अनुसार इस गिरोह का टारगेट उन पति-पत्नी को बनाया जाता है, जो निःसंतान हैं और जिन्हें आईवीएफ से भी मदद नहीं मिल रही।

इन्हें माता-पिता बनने का सपना दिखाकर इस रैकेट से डील करवाई जाती है। इसके बाद महिला पुरुष का सीमेन लेकर गर्भ में धारण करती है।

कैसे काम करता है गिरोह?

यह गिरोह सोशल नेटवर्क, आईवीएफ सेंटर और पुराने संपर्कों के जरिए देशभर के निःसंतान कपल्स तक पहुंचता है। इसके बाद कपल्स को दो ऑप्शन दिए जाते हैं। एक तो सरोगेट महिला का सहारा लेना। दूसरा या फिर सीधे गैरकानूनी तरीके से बिकने वाला नवजात बच्चा खरीदना।

10 से 12 लाख की डील

दोनों ही तरीके पूरी तरह से गैरकानूनी हैं इसलिए इन गिरोहों से कोई लिखित एग्रीमेंट नहीं किया जाता, ताकि कानून से बचा जा सके। 10 से 12 लाख की डील के बाद आधी राशि एडवांस ले ली जाती है।

इसके बाद पूरे 9 महीने में महिला को राशन से लेकर रहने तक के अलग-अलग खर्च बताए जाते हैं। इससे कुल रकम दोगुनी तक वसूली जाती है।

इन गिरोहों का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है। इससे कहीं भी कोई गड़बड़ी होने पर तुरंत राज्य बदलकर बच्चे की डिलीवरी करवा ली जाती है।

गैरकानूनी सरोगेसी पर 10 साल की सजा

भारत में गैरकानूनी सरोगेसी एक गंभीर अपराध है। इस कानून के मुताबिक पैसे लेकर सरोगेसी कराना करना पूरी तरह से मना है।

साथ ही किसी दलाल या एजेंसी के जरिए सौदा करना और बिना अनुमति वाले क्लीनिक में ये प्रक्रिया अवैध है। अगर कोई इसमें दोषी पाया जाता है, तो उसे 10 साल तक की सजा और भारी जुर्माना हो सकता है।

सरोगेट मदर सिर्फ रिश्तेदार हो

लखनऊ हाईकोर्ट के एडवोकेट अरविंद वर्मा के मुताबिक भारत में सिर्फ बिना पैसे के सरोगेसी की ही अनुमति है। कमर्शियल सरोगेसी पूरी तरह से मना है।

मध्यप्रदेश में सरोगेसी आवेदन

वहीं एमपी में सरोगेसी आवेदन की समय सीमा चार महीने थी। मध्य प्रदेश सरकार ने इसे चार महीने से घटाकर सिर्फ 10 दिन कर दिया है। इसका मकसद उन परिवारों की मदद करना है जो संतान नहीं होने के कारण परेशान हैं।

साथ ही प्रक्रिया में देर होने से तनाव का सामना करते हैं। नए नियमों से अब यह प्रक्रिया तेज़, ज्यादा पारदर्शी और दंपतियों के लिए आसान हो गई है।

सरोगेसी क्या है?

सरोगेसी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक महिला, जिसे सरोगेट मां कहा जाता है, किसी दूसरे दंपत्ति के लिए बच्चा पैदा करती है।

यह तरीका उन दंपत्तियों के लिए होता है जो किसी वजह से खुद से बच्चा नहीं कर पाते। बच्चे के जन्म के बाद सरोगेट मां का बच्चे पर कोई कानूनी हक नहीं होता।

सरोगेट मां बनने के लिए शर्तें

  • वह दंपत्ति की करीबी रिश्तेदार होनी चाहिए।
  • उसकी शादी हो चुकी होनी चाहिए और कम से कम एक बच्चा होना चाहिए।
  • उसकी उम्र 25 से 35 साल के बीच होनी चाहिए।
  • वह अपने जीवन में सिर्फ एक बार ही सरोगेट मां बन सकती है।

2023 से 2025 तक मध्य प्रदेश में राज्य सरोगेसी बोर्ड ने 10 आवेदनों को मंजूरी दी है। अक्टूबर 2024 से सरकार ने सरोगेट माताओं के लिए बीमा राशि को एक लाख रुपए से बढ़ाकर 10 लाख रुपए किया है।

ये खबरें भी पढ़िए...

Dailyhunt
Disclaimer: This content has not been generated, created or edited by Dailyhunt. Publisher: d sutr