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गुना में 'आक्रामक' कलेक्टर पर भाजपा विधायक का हमला, किशोर कन्याल फिर विवादों में

गुना में 'आक्रामक' कलेक्टर पर भाजपा विधायक का हमला, किशोर कन्याल फिर विवादों में

News In Short

  • भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने कलेक्टर पर हमला बोला।
  • कलेक्टर पर किसानों के साथ मारपीट करने का आरोप।
  • शाक्य ने कलेक्टर से कार्रवाई की मांग की।
  • कलेक्टर किशोर कन्याल पहले भी विवादों में रहे हैं।
  • प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच टकराव का मुद्दा बढ़ा।

News In Detail

गुना में किसान मुद्दे ने अब प्रशासन बनाम जनप्रतिनिधि की लड़ाई का रूप ले लिया है। भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने कलेक्टर किशोर कन्याल पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि मंडी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ मारपीट हुई और उन्हें फसल का सही दाम नहीं मिल रहा। कन्याल पहले भी अपने आक्रामक रवैये को लेकर विवादों में रह चुके हैं, ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनकी कार्यशैली ही टकराव की वजह बन रही है।

क्या है पूरा मामला

6 अप्रैल 2026 को गुना मंडी में किसान अपनी फसल बेचने पहुंचे थे, लेकिन कम कीमत मिलने से नाराज होकर उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू कर दिया। आरोप है कि इस दौरान कुछ कर्मचारियों ने किसानों के साथ मारपीट की, जिससे मामला गरमा गया और राजनीतिक रंग ले लिया।

विधायक ने कलेक्टर को लिखा सख्त पत्र

घटना के बाद पन्नालाल शाक्य ने कलेक्टर किशोर कन्याल को पत्र लिखकर नाराजगी जताई और कार्रवाई की मांग की। उन्होंने साफ कहा कि किसानों के साथ हुआ व्यवहार “दुखद और शर्मनाक” है और यह सरकार की मंशा के खिलाफ है।

पत्र के 5 बड़े आरोप...

  • किसानों को गेहूं का उचित मूल्य नहीं मिल रहा।
  • शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान मारपीट हुई।
  • मंडी में पानी और ठहरने की व्यवस्था कमजोर।
  • प्रशासन का रवैया असंवेदनशील।
  • दोषी कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग।

कन्याल का पुराना विवाद भी चर्चा में

कलेक्टर किशोर कन्याल पहले भी अपने बयानों को लेकर विवादों में रह चुके हैं। एक पुराने मामले में “औकात में रहने” जैसी टिप्पणी के कारण उनकी कलेक्टरी तक चली गई थी। ऐसे में एक बार फिर उनका नाम विवादों में आने से प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

क्या जनप्रतिनिधियों को नहीं मिल रही तवज्जो?

विधायक शाक्य लगातार कलेक्टर के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या प्रशासन जनप्रतिनिधियों की बातों को नजरअंदाज कर रहा है। अगर ऐसा है, तो यह सरकार और संगठन के बीच समन्वय की कमी को भी दर्शाता है।

सीधे सवाल पर बचते नजर आए शाक्य

जब "द सूत्र" ने पूछा कि क्या कलेक्टर उनकी बात नहीं सुन रहे, तो शाक्य ने जवाब टालते हुए कहा कि यह आप कलेक्टर से ही पूछिए… मैं अभी भोपाल से आया हूं, बाद में बात करेंगे। यह बयान खुद कई संकेत छोड़ जाता है।

सरकार पर भी उठे सवाल

एक तरफ सरकार किसानों के हित में काम करने का दावा कर रही है, वहीं उसी पार्टी के विधायक का प्रशासन पर हमला सिस्टम की कमजोरी उजागर कर रहा है। यह विवाद अब केवल मंडी तक सीमित नहीं, बल्कि सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल बन गया है।

गुना में किसान मुद्दे के बहाने कलेक्टर किशोर कन्याल की कार्यशैली फिर कटघरे में है। बड़ा सवाल यही है, क्या प्रशासनिक सख्ती के नाम पर संवेदनशीलता खत्म हो रही है, या फिर सिस्टम में कहीं गहरी खाई बन चुकी है?

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