इंदौर की स्कीम 171 से मुक्ति के लिए करीब दर्जनभर गृह निर्माण सोसायटियों के हजारों प्लॉटधारक लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। यह इंतजार करीब 20 साल पुराना हो चुका है। आईडीए से उनकी लड़ाई तो साल 1993 से ही चली आ रही है।
रहवासियों का कहना है कि मध्य प्रदेश शासन के नियमों के तहत वे विकास शुल्क के रूप में 5.89 करोड़ रुपए अक्टूबर 2024 में जमा कर चुके हैं। इसके बाद भी उन्हें स्कीम से राहत नहीं मिली है। अब अपनी मांग को लेकर रहवासियों ने कॉलोनी में पोस्टर लगाकर विरोध शुरू किया है।
क्या पोस्टर लगाए गए हैं?
रहवासियों ने पोस्टर लगाए हैं और कहा है कि हे राम- इंतजार के 20 साल, हमारा कसूर क्या है। निर्माण की अनुमति कब मिलेगी।
क्यों लगाए हैं पोस्टर, क्या है विवाद?
साल 1993 में आईडीए ने 13 सोसायटियों की जमीन और आसपास की सरकारी व अन्य जमीन को मिलाकर स्कीम 132 शुरू की थी। इस स्कीम का विरोध हुआ और बाद में हाईकोर्ट ने 2007 में इसे लैप्स कर दिया। इसके बाद आईडीए ने 2009 में इसी इलाके में नई स्कीम 171 ला दी।
प्लॉटधारकों की परेशानी यहीं से और बढ़ गई। उन्हें न तो मुआवजा मिला और न ही स्कीम पर कोई काम आगे बढ़ा। स्कीम अटक गई और इसके चलते प्लॉटधारकों को भवन निर्माण की अनुमति भी नहीं मिल पाई।
इसी बीच भू-माफियाओं ने भी जमीनों पर कब्जे का खेल शुरू कर दिया। तत्कालीन कलेक्टर मनीष सिंह के समय कई कब्जे हटवाए गए और भू-माफियाओं को खदेड़ा गया।
बाद में सरकार ने फैसला लिया कि जिन स्कीमों में 10 फीसदी से कम विकास हुआ है, वहां विकास शुल्क लेकर स्कीम को मुक्त किया जा सकता है। जुलाई 2021 में आईडीए ने इस संबंध में प्रस्ताव पास किया। विकास शुल्क की गणना 5.84 करोड़ रुपए हुई। अक्टूबर 2024 में यह राशि जमा भी करा दी गई। इसके बाद भी अब तक स्कीम को मुक्त नहीं किया गया है।
सीएम बोलकर गए समस्या दूर करेंगे
हाल ही में सीएम डॉ. मोहन यादव 20 जून को इंदौर दौरे पर आए थे। इस दौरान विधायक महेंद्र हार्डिया ने मंच से उनके सामने आईडीए स्कीम 171 का मुद्दा उठाया था। इस पर सीएम ने भरोसा दिलाया कि रहवासियों को जल्द ही आईडीए की इस स्कीम (इंदौर स्कीम 171 केस) से राहत मिलेगी।
लेकिन अभी आईडीए में कोई हलचल नहीं
सीएम के आश्वासन के बाद भी आईडीए में अब तक कोई खास हलचल नहीं दिखी है। करीब 15 दिन बीत चुके हैं, लेकिन इस मुद्दे पर न कोई बैठक हुई और न ही कोई चर्चा आगे बढ़ी। इसी वजह से रहवासी फिर नाराज हैं। उनका कहना है कि आखिर उन्हें और कितना इंतजार करना पड़ेगा।
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