News in Short :
- डब्ल्यूसीआर और वायबल डायमंड्स के बीच 3,640 पदकों की आपूर्ति समझौता।
- सामग्री का निरीक्षण आरआईटीईईएस द्वारा 18.09.2023 और 03.10.2023 को किया गया।
- 3631 पदकों की आपूर्ति 19.10.2023 को जनरल स्टोर डिपो, भोपाल में हुई।
- परीक्षण में पदकों में चांदी की मात्र 0.0023% और तांबे की 99.80% थी।
- सीबीआई ने मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंप दी है।
Intro
BHOPAL. रेलवे कोच जनरल स्टोर डिपो में सप्लाई किए गए करीब 59 लाख 68 हजार रुपए के साढ़े तीन हजार से ज्यादा के गोल्ड प्लेटेड सिल्वर मेडल नकली पाए गए है। इस मामले में सीबीआई भोपाल ने इंदौर की फर्म मेसर्स वायबल डायमंड्स और रेलवे के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। रेलवे ने गोल्ड मैडल की खरीदी के लिए 2023 में इंदौर की फर्म वायबल डायमंड्स से अनुबंध किया था। फर्म की धोखाधड़ी के बाद रेलवे ने शिकायत की थी जिसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई थी।
News in Detail :
सीबीआई में दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार वेस्ट सेंट्रल रेलवे जबलपुर ने मेसर्स वायबल डायमंड्स के डायरेक्टर विपुल जैन से सोने की परत चढ़े चांदी के पदकों की आपूर्ति को लेकर एक अनुबंध किया था। यह समझौता 23 जनवरी 2023 को हुआ था। जिसमें इंदौर की फर्म को 3640 गोल्ड प्लेटेड मेडल सप्लाई करना थे। इन मेडल्स का मूल्य 49 लाख 68 हजार 627 रुपए था। रेलवे को चांदी के मेडल के नाम पर तांबे के मेडल दिए गए, जिन पर सोने की परत चढ़ाई गई थी। यह घोटाला तब सामने आया जब पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर मंडल ने सिक्कों की विजिलेंस जांच कराई। लैब रिपोर्ट आने के बाद इसकी शिकायत की गई थी।
सीबीआई ने दर्ज किया केस
सीबीआई ने जांच में पाया कि वर्ष 2023 में सितंबर और अक्टूबर में नमूनों का परीक्षण कराया गया था। लैब रिपोर्ट में चांदी 99.9 शुद्ध बताई गई थी। फर्म से इसी रिपोर्ट के आधार पर गोल्ड मैडल सप्लाई कर दिए गए। इस दौरान कुछ मैडल खराब हो गए। आशंका होने पर रेलवे के सतर्कता अधिकारियों ने नए नमूने लेकर परीक्षण कराया। जिसमें पता चला कि मैडल नकली हैं। चांदी की जगह मैडल में तांबे की मात्रा 99.8 प्रतिशत थी। सीबीआई द्वारा इन मैडल को लैब भेजकर पड़ताल की जिसमें सच्चाई सामने आने पर इंदौर की फर्म पर केस दर्ज किया गया है।
गोल्ड प्लेटेड के नाम पर थमाए तांबे के मैडल
इंदौर की फर्म वायबल डायमंड्स और उनके मालिक विपुल जैन ने रेलवे को 3600 से अधिक नकली मेडल सप्लाई कर लाखों रुपए का चूना लगाया। इनमें चांदी की मात्रा मात्र 0.23% पाई गई। और शेष हिस्सा तांबे का था। इस धोखाधड़ी के बाद रेलवे ने 20 साल पुरानी मेडल देने की परंपरा ही बंद कर दी है। रिटायर्ड कर्मचारियों के सम्मान और भरोसे से जुड़े मामले में धोखाधड़ी करने वाली फर्म को ब्लैक लिस्टेड किया गया है।
सामग्री का निरीक्षण और परीक्षण
सामग्री का निरीक्षण श्री अनुज कुमार वर्मा, निरीक्षण अभियंता द्वारा 18.09.2023 और 03.10.2023 को किया गया था। आरआईटीईईएस की रिपोर्ट के अनुसार, पदकों में 99.90% चांदी की शुद्धता पाई गई थी। 3631 पदक भोपाल में जनरल स्टोर डिपो में प्राप्त किए गए थे। सतर्कता अधिकारियों के निरीक्षण के बाद नए नमूने नोएडा और कोलकाता की लैब में भेजे गए थे। मामले की जांच एंटी करप्शन विंग भोपाल के एएसपी आकाश कुमार मीना को सौंपी गई है।
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