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इंदौर नगर निगम बिल घोटाले में मुश्किल में बड़े अधिकारी, ईडी की गिरफ्त में अभय राठौर ले रहा नाम

इंदौर नगर निगम बिल घोटाले में मुश्किल में बड़े अधिकारी, ईडी की गिरफ्त में अभय राठौर ले रहा नाम

द सूत्र 4 months ago

इंदौर नगर निगम के 150 करोड़ के फर्जी बिल घोटाले में अब बड़े अधिकारी उलझने की आशंका तेज हो गई है। मुख्य आरोपी निगम के इंजीनियर अभय राठौर के साथ ही ठेकेदार राहुल बडेरा व मोहम्मद जाकिर को तीन दिन की रिमांड पर लिया है।

साल 2024 में यह घोटाला सामने आया था।

इस घोटाले में ईडी को अभी तक 92 करोड़ की हेराफेरी के सबूत मिल गए हैं। ईडी ने बीते साल इसमें 20 ठिकानों पर छापे मारे थे और विभिन्न आरोपियों की 34 करोड़ की 43 संपत्तियां अटैच की थीं। इसमें मप्र के साथ ही यूपी में भी कुछ आरोपियों की संपत्तियां थीं।

क्यों निगम के बड़े अधिकारी मुश्किल में

अभय राठौर व अन्य आरोपियों पर मनी लाण्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत केस हुआ है। इसका खुलासा भी द सूत्र ने ही सबसे पहले किया था। इस एक्ट के तहत प्रावधान है कि गवाह, आरोपी द्वारा दिए गए बयान ही अपने आप में साक्ष्य होते हैं।

अभी तक राठौर इस घोटाले में अपने उच्च स्तर के अधिकारियों, अपर आयुक्त व अन्य पर आरोप लगाते आया है कि यह उनका किया धरा है। हाईकोर्ट व जिला कोर्ट में भी इस संबंध में शपथपत्र दिए थे। ऐसे में ईडी में भी पूछताछ में तय है कि राठौर बड़े अधिकारियों को घेरेगा। ऐसे में संभावना है कि इनके बयान के आधार पर ईडी आगे अधिकारियों को भी पूछताछ और जांच में ले सकता है।

इन विभाग के अधिकारी आएंगे राडार पर

खासकर इसमें सीवरेज, ड्रेनेज विभाग के अधिकारी राडार पर हैं, क्योंकि घोटाले से जुड़ी अधिकांश फाइलें इसी विभाग की थीं। इसमें कई फाइलों पर अधिकारियों के हस्ताक्षर की बात राठौर ने कही थी। ऐसे में इन विभागों के अधिकारियों की भूमिका पर ईडी की नजर रहेगी। हालांकि ठेकेदारों ने अपने बयानों में राठौर को ही मुख्य आरोपी बताया है।

क्या है पूरा मामला

साल 2024 में तत्कालीन निगमायुक्त हर्षिका सिंह ने पाया कि कुछ कंपनियों ने काम किया नहीं और भुगतान की फाइल चल गई। इसकी जांच शुरू हुई। बाद में इससे जुड़ी कुछ फाइलें चोरी हुईं, इसकी भी एफआईआर कराई गई थी।

मामला आगे बढ़ा तो इसमें कई कंपनियों के फर्जी भुगतान के मामले के खुलासे हुए थे। इसके बाद परतें खुलती गईं और एक के बाद एक कई कंपनियों के भुगतान फर्जी निकले। उच्च स्तर से शासन ने जांच कमेटी भी इंदौर भेजी लेकिन इसकी रिपोर्ट आज तक सामने नहीं आई।

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