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इंदौर विकास प्राधिकरण IDA के पास 1000 करोड़ की एफडी, लेकिन विकास योजनाएं ठप

इंदौर विकास प्राधिकरण IDA के पास 1000 करोड़ की एफडी, लेकिन विकास योजनाएं ठप

News In Short

  • इंदौर विकास प्राधिकरण IDA (Indore Development Authority) के पास 1000 करोड़ की एफडी है।
  • एफडी से हर साल 60 करोड़ से ज्यादा ब्याज मिल रहा है, फिर भी काम रुके हैं।
  • सितंबर 2025 से बड़े प्रोजेक्ट फाइलों में ही बंद पड़े हैं।
  • स्टार्टअप पार्क, कन्वेंशन सेंटर, फ्लाईओवर समेत कई योजनाएं लटकी हैं।
  • 31 मार्च को आईडीए का बजट आना है, सबकी नजरें उसी पर हैं।

News In Detail

IDA के पास पैसा, पर काम नहीं

इंदौर की सबसे बड़ी विकास एजेंसी आईडीए यानी इंदौर विकास प्राधिकरण है। आर्थिक ताकत के मामले में यह इंदौर नगर निगम से भी आगे है। इसके पास 1000 करोड़ रुपए की एफडी (Fixed Deposit) जमा है। इस एफडी से हर साल 60 करोड़ रुपए से ज्यादा का ब्याज आता है।

लेकिन इतनी ताकत के बावजूद हालात अच्छे नहीं हैं। सितंबर 2025 से आईडीए के काम लगभग ठहर से गए हैं। न पुरानी योजनाओं का अता-पता है, न नई योजनाएं आगे बढ़ रही हैं।

कब से रुका सब?

मोहन सरकार बनने के बाद आईडीए में राजनीतिक नियुक्तियां खत्म हो गईं। इसके बाद से संभागायुक्त को प्रशासक बनाया गया है। अभी संभागायुक्त डॉ. सुदाम पी. खाड़े प्रशासक हैं। सीईओ (Chief Executive Officer) के पद पर डॉ. परीक्षित झाड़े हैं। यही दोनों मिलकर आईडीए को संभाल रहे हैं।

अब सबकी नजरें 31 मार्च को आने वाले आईडीए बजट पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि इस बार बजट 1500 करोड़ रुपए से भी कम का रह सकता है।

कौन से बड़े प्रोजेक्ट अटके हैं?

1150 करोड़ रुपए का स्टार्टअप पार्क अभी सिर्फ फाइलों में बंद है। जिम्मेदार अधिकारी अब तक यह भी तय नहीं कर पाए हैं कि, इसे पीपीपी (Public Private Partnership) मोड पर बनाना है या किसी और तरीके से। 545 करोड़ रुपए के कन्वेंशन सेंटर के लिए पीपीपी आधार पर काम होना है। इसके लिए टेंडर हाल ही में हुए हैं लेकिन आगे की राह अभी साफ नहीं है।

कुमेडी में आईएसबीटी (Inter-State Bus Terminal) बस स्टेशन एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं के साथ बनाया गया था। इसे बने हुए लगभग एक साल होने को आया, लेकिन इसे चलाने वाली एजेंसी अभी तक तय नहीं हो पाई। बिना इस्तेमाल के यह धीरे-धीरे खराब होने लगा है।

स्नेहधाम और फ्लाईओवर का हाल

80 करोड़ रुपए का स्नेहधाम बुजुर्गों के लिए बनाया गया था। इसे बिना किसी लिखित करार के एक कंपनी को सौंप दिया गया। उस कंपनी ने बुजुर्गों को हटाने के नोटिस तक दे दिए।

द सूत्र के मुद्दा उठाने के बाद बुजुर्गों को फिलहाल राहत मिली है, लेकिन यह प्रोजेक्ट अभी भी अधर में लटका है।

शहर में कई फ्लाईओवर और ब्रिज बनाने की योजनाएं हैं। बड़ा गणपति और मरीमाता चौराहे पर फ्लाईओवर के वर्क ऑर्डर हो चुके हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की बैठक भी हो चुकी है। लेकिन काम अभी बैठक से आगे नहीं बढ़ा।

सिंहस्थ 2028 की तैयारी भी पीछे

उज्जैन सिंहस्थ 2028 के लिए एमआर 12 (Master Road 12) बहुत जरूरी है। लेकिन यह सड़क अभी अधूरी पड़ी है। इसकी बाधाएं कैसे दूर होंगी, यह किसी को नहीं पता। एमआर 10 के ब्रिज को चौड़ा किया जाना है उस पर भी कोई ठोस कदम नहीं उठा है।

पुरानी घोषणाएं भी फाइल में बंद

पिछले बजट में कई बड़ी घोषणाएं हुई थीं। रिवर साइड कॉरिडोर, मोरोद में अनाज मंडी की शिफ्टिंग और स्कीम 97 में सिटी फॉरेस्ट बनाने का ऐलान हुआ था। ये सभी अभी भी फाइलों में ही बंद हैं। कई अहम प्रोजेक्ट पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन (PowerPoint Presentation) से बाहर नहीं निकले हैं।

स्कीम 171 पुष्पविहार और 13 अन्य संस्थाओं के चार हजार से ज्यादा प्लॉट धारक भी परेशान हैं। ये लोग स्कीम मुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। इसके लिए बोर्ड मीटिंग तक नहीं हो पाई है।

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