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INS तारागिरी भारतीय नौसेना में शामिल: रक्षा मंत्री ने कहा, बढ़ी सेना की ताकत

INS तारागिरी भारतीय नौसेना में शामिल: रक्षा मंत्री ने कहा, बढ़ी सेना की ताकत

News in Short

  • INS तारागिरी भारतीय नौसेना में शामिल हुआ।
  • ब्रह्मोस मिसाइल से लैस युद्धपोत है।
  • यह प्रोजेक्ट 17-ए के तहत तैयार किया गया।
  • स्वदेशी तकनीक से बना युद्धपोत।
  • 2026 तक तीन और युद्धपोत मिलेंगे।

News in Detail

INS तारागिरी, भारतीय नौसेना में शुक्रवार को शामिल हो गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस मौके पर कहा कि भारतीय नौसेना की ताकत INS तारागिरी के साथ और भी बढ़ेगी। इस युद्धपोत में ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य आधुनिक हथियार प्रणाली लगे हैं, जो उसे अत्याधुनिक बनाते हैं। यह युद्धपोत स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है और इसे मझगांव डॉक शिप बिल्डिंग लिमिटेड ने तैयार किया।

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INS तारागिरी का भारतीय नौसेना में शामिल

INS तारागिरी ने भारतीय नौसेना की ताकत को एक नया आयाम दिया है। यह युद्धपोत शुक्रवार को विशाखापत्तनम में नौसेना में शामिल हुआ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सेरेमनी में हिस्सा लिया और कहा कि नौसेना हमेशा संकट के समय सबसे आगे रहती है, चाहे वह रेस्क्यू ऑपरेशन हो या मानवीय सहायता। INS तारागिरी की कमीशनिंग से हमारी नौसेना की ताकत और बढ़ेगी। यह युद्धपोत मझगांव डॉक शिप बिल्डिंग लिमिटेड ने प्रोजेक्ट 17-ए के तहत तैयार किया है।

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ब्रह्मोस और एयर डिफेंस सिस्टम से लैस

INS तारागिरी को विभिन्न अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस किया गया है, जिसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, एयर डिफेंस सिस्टम और अन्य आधुनिक तकनीक शामिल हैं। यह युद्धपोत 76 मिमी गन, 30 मिमी और 12.7 मिमी क्लोज-इन वेपन सिस्टम के साथ एंटी सबमरीन रॉकेट और टॉरपीडो से भी लैस है। यह इसे समुद्र में दुश्मन से मुकाबला करने में सक्षम बनाता है।

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नीलगिरी क्लास का चौथा युद्धपोत

INS तारागिरी नीलगिरी क्लास (Project 17A) का चौथा युद्धपोत है। भारत ने कुल 7 स्टील्थ फ्रिगेट बनाने का लक्ष्य रखा है, और INS तारागिरी इसके निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह युद्धपोत पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है और इसमें 75 प्रतिशत स्वदेशी हिस्सेदारी है। प्रोजेक्ट में 200 से अधिक एमएसएमई (MSME) जुड़े हुए हैं।

स्वदेशी तकनीक और डिजाइन

INS तारागिरी को वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा तैयार किया गया है। इस युद्धपोत में पिछली पी-17 (शिवालिक) क्लास की तुलना में अधिक आधुनिक हथियार और सेंसर सिस्टम लगाए गए हैं। यह युद्धपोत हाईटेक स्टेल्थ तकनीक, बेहतर मारक क्षमता, और अत्याधुनिक ऑटोमेशन से लैस है। यह समुद्र में आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है।

अगले तीन साल में और युद्धपोत मिलेंगे

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, प्रोजेक्ट 17-ए के बाकी तीन युद्धपोत 2026 के अगस्त तक नौसेना को सौंपे जाएंगे। पहले दो जहाजों के अनुभव के कारण ‘तारागिरी’ का निर्माण समय घटाकर 81 महीने कर दिया गया है। इस परियोजना से नौसेना की ताकत में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी।

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