News In Short
- 15 अप्रैल से शुरू हुई थी प्रक्रिया।
- 30 अप्रैल को स्व गणना ऑप्शन बंद।
- 5.3 लाख परिवारों ने खुद जानकारी भरी।
- रायसेन सबसे आगे, निवाड़ी सबसे पीछे।
- बड़े शहरों की भागीदारी कम।
News In Detail
जनगणना 2027 के पहले चरण में लोगों को खुद अपनी जानकारी भरने का मौका मिला, लेकिन नतीजे चौंकाने वाले रहे। 30 अप्रैल को स्व गणना का ऑप्शन बंद होते ही साफ हो गया कि बड़े शहर इस अभियान में पिछड़ गए, जबकि छोटे जिलों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कहां दिखा जोश, कहां रही सुस्ती?
स्व गणना की शुरुआत 15 अप्रैल से हुई थी और 14 दिनों में प्रदेश के करीब 5 लाख 30 हजार परिवारों ने ऑनलाइन अपनी जानकारी भरी, लेकिन तस्वीर एक जैसी नहीं रही- छोटे जिलों में उत्साह दिखा, जबकि बड़े शहरों में भागीदारी उम्मीद से काफी कम रही।
छोटे जिले आगे, बड़े शहर पीछे
रायसेन जिला इस अभियान में सबसे आगे रहा, जहां 80 हजार से ज्यादा लोगों ने खुद जानकारी भरी। मंदसौर में भी 72 हजार से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया।
वहीं बड़े शहरों का प्रदर्शन कमजोर रहा...
- भोपाल: 13,500
- इंदौर: 8,800
- जबलपुर: 12,400
- उज्जैन: 17,700
यानी डिजिटल रूप से मजबूत माने जाने वाले शहरों में ही सबसे ज्यादा सुस्ती दिखी।
सबसे पीछे कौन?
निवाड़ी जिला सबसे पीछे रहा, जहां करीब 500 लोगों ने ही स्व गणना की। यह आंकड़ा भागीदारी के साथ-साथ जागरूकता और पहुंच पर भी सवाल खड़े करता है।
सरकारी कोशिशें क्यों नहीं चलीं?
लोगों को जोड़ने के लिए मोबाइल पर लिंक भेजे गए और जागरूकता अभियान भी चलाए गए। इसके बावजूद बड़े शहरों में रिस्पॉन्स कमजोर रहा। यह संकेत है कि सिर्फ डिजिटल सुविधा देना काफी नहीं, उसे अपनाने की रणनीति भी मजबूत होनी चाहिए।
अब आगे क्या?
30 अप्रैल को स्व गणना का ऑप्शन बंद हो गया है। अब 1 मई से जनगणना कर्मचारी घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। यानी अब पारंपरिक सर्वे ही मुख्य तरीका रहेगा।
स्व गणना करने वालों के लिए जरूरी अपडेट
स्व गणना पूरी करने के बाद 11 अंकों की SE ID जनरेट हुई है। यह आईडी मोबाइल और ईमेल पर भेजी गई है जनगणनाकर्मी को यह आईडी दिखाना जरूरी होगा आईडी सही होने पर ही डेटा खुलेगा किसी गलती का सुधार केवल कर्मचारी ही कर पाएंगे।
1 मई से घर-घर सर्वे शुरू
स्व गणना को डिजिटल जनगणना पहल के तौर पर पेश किया गया, लेकिन नतीजे मिले-जुले रहे। छोटे जिलों ने जहां बेहतर भागीदारी दिखाई, वहीं बड़े शहरों की सुस्ती ने इस मॉडल की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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