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जंगल खत्म करने में एमपी अव्वल, CSE रिपोर्ट में खुलासा, 23 हजार हेक्टेयर जंगल सिर्फ 5 साल में गायब

जंगल खत्म करने में एमपी अव्वल, CSE रिपोर्ट में खुलासा, 23 हजार हेक्टेयर जंगल सिर्फ 5 साल में गायब

ध्यप्रदेश की पहचान उसके हरे-भरे जंगलों और बाघों से होती रही है, लेकिन अब राज्य की यह हरियाली गहरे संकट में है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायर्नमेंट की ताजा रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है।

विकास की अंधी दौड़ में हमारे जंगल तेजी से कंक्रीट में बदल रहे हैं।

क्या है CSE की रिपोर्ट में...

मध्यप्रदेश भारत में सबसे ज्यादा वन भूमि और वनावरण के लिए जाना जाता है, लेकिन अब एमपी की छवि को एक बड़ा झटका लगा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायर्नमेंट ((स्टेट ऑफ इंडिया का पर्यावरण 2026)) की रिपोर्ट हैरान कर देने वाली है।

इसके मुताबिक पिछले 10 सालों में जितनी वन भूमि गैर-वानिकी कार्यों के लिए दी गई है, उसमें से 22% हिस्सा सिर्फ मध्यप्रदेश का है। मतलब कि बीते एक दशक में एमपी में 38 हजार 553 हेक्टेयर जंगल को विकास कार्यों के लिए हटा दिया गया। इनमें से 23 हजार 54 हेक्टेयर वन भूमि तो सिर्फ पिछले 5 सालों में ही डायवर्ट की गई हैं।

10 साल में इतनी जमीन का उपयोग

देश में पिछले दस साल में कुल 1 लाख 73 हजार 397 हेक्टेयर वन भूमि को अन्य उपयोग के लिए आवंटित किया गया है। यह हरियाणा राज्य के पूरे वन क्षेत्र और दिल्ली राज्य के कुल क्षेत्रफल से भी ज्यादा है। अकेले 2023-24 में करीब 29 हजार हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन को मंजूरी दी गई थी। देश में जितनी वन भूमि का डायवर्जन हुआ है, उसमें से आधा हिस्सा (49%) सिर्फ मध्य प्रदेश, ओडिशा, तेलंगाना और गुजरात में हुआ है।

जंगलों की घटती संख्या का असर

मध्यप्रदेश में जंगलों की घटती संख्या का असर अब जैव विविधता पर नजर आने लगा है। बांधवगढ़, कान्हा टाइगर रिजर्व और पेंच टाइगर रिजर्व के आसपास अब कई बाघ बाहरी इलाके की लैंटाना झाड़ियों में रहने लगे हैं। ये बाघ अब मवेशियों को शिकार बनाने के लिए इन झाड़ियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे इंसानों और जंगली जानवरों के बीच संघर्ष बढ़ गया है।

मध्य प्रदेश के जंगलों में सूखा

सीएसई के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि मध्य प्रदेश और आसपास के जंगलों में पारिस्थितिक सूखा आ रहा है। इसका मतलब यह है कि ये जंगल अपनी प्राकृतिक स्थिति और कामकाजी क्षमता खोते जा रहे हैं। इसका कारण लंबे समय तक पानी की कमी है।

मध्यप्रदेश के वन विभाग के प्रमुख शुभ रंजन सेन ने बताया कि, विकास कार्यों के लिए जंगल की जमीन को बदलना एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है। ये फैसले केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय लेते हैं। चूंकि देश में सबसे ज्यादा जंगल की जमीन मध्यप्रदेश में है। इसलिए यहां विकास के लिए ज्यादा जमीन का बदलाव होना स्वाभाविक है।

वन भूमि का उपयोग इन कार्यों के लिए सबसे ज्यादा किया जा रहा है।

कारणडायवर्जन प्रतिशत
खनन (Mining)22%
सड़क निर्माण (Road Construction)18%
सिंचाई परियोजनाएं (Irrigation Projects)18%
ट्रांसमिशन लाइनें (Transmission Lines)11%
रक्षा (Defense)9%
रेलवे (Railway)5%
जलविद्युत (Hydropower)5%
अन्य कारण (पेयजल, पुनर्वास, उद्योग आदि)9%

मध्य प्रदेश में पिछले 5 सालों का डायवर्जन (हेक्टेयर में)

वर्ष (Year)भूमि (हेक्टेयर में)
2023-249 हजार 219
2022-232 हजार 045
2021-223 हजार 492
2020-216 हजार 352
2019-201 हजार 946

सर्वाधिक डायवर्जन वाले प्रमुख राज्य

राज्यभूमि हेक्टेयर मेंडायवर्जन प्रतिशत
मध्य प्रदेश38 हजार 55322%
ओडिशा24 हजार 45914%
तेलंगाना11 हजार 4227%
गुजरात9 हजार 9856%

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