समझें क्या है पूरा मामला...
- भाजपा जातीय जनगणना से पहले ओबीसी की मैपिंग करा रही है।
- यह जिम्मा ओबीसी मोर्चा को सौंपा गया है।
- सभी जिलों में मोर्चा प्रभारी 9 बिंदुओं पर डेटा जुटा रहे हैं।
- संगठन और सत्ता में ओबीसी की हिस्सेदारी का ब्योरा तैयार होगा।
- अगले साल के निकाय और पंचायत चुनाव से पहले यह डेटा जरूरी है।
आजादी के बाद देश में पहली बार जाति जनगणना होने जा रही है। इससे पहले भाजपा ने बड़ा कदम उठाया है। पार्टी प्रदेशभर में सत्ता और संगठन में ओबीसी (Other Backward Class) जातियों की हिस्सेदारी की मैपिंग करा रही है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि किस जाति को कितना प्रतिनिधित्व मिला है। इस पूरे काम की जिम्मेदारी पार्टी ने ओबीसी मोर्चा को दी है।
ओबीसी मोर्चा को मिली जिम्मेदारी
मोर्चा ने प्रदेश के सभी जिलों में अपने प्रभारियों को यह काम सौंपा है। हर प्रभारी को 9 बिंदुओं पर जिलावार जानकारी जुटानी है। इसमें ओबीसी जातियों की आबादी शामिल है। साथ ही राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संगठन में मौजूदा भागीदारी की जानकारी भी ली जाएगी। यह डेटा प्रदेश में अगले साल होने वाले नगरीय निकाय चुनाव से पहले जुटाया जा रहा है। त्रि-स्तरीय पंचायत चुनाव भी अगले साल होने हैं।
9 बिंदुओं पर जुटेगा डेटा
यह जातिगत-सामाजिक-राजनीतिक डेटा भाजपा के लिए बहुत अहम माना जा रहा है। दरअसल इस चुनाव से पहले जनगणना के आंकड़े भी सामने आ जाएंगे। पार्टी की रणनीति साफ है। जनगणना के आंकड़े आने से पहले जमीनी स्तर पर सामाजिक प्रतिनिधित्व को न्यायसंगत बनाना है। पार्टी चाहती है कि यह प्रतिनिधित्व सर्वसमावेशी भी हो। इसी वजह से हर जिले में बारीकी से डेटा जुटाया जा रहा है।
केंद्र-राज्य सूची में अंतर
पार्टी सूत्रों के मुताबिक सभी प्रभारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं। उन्हें अपने जिलों में ओबीसी की जनसांख्यिकीय स्थिति का विस्तृत अध्ययन करना है। यह अध्ययन तथ्यात्मक आधार पर होना चाहिए। एक खास निर्देश यह भी है कि उन ओबीसी जातियों की अलग सूची बनाई जाए, जो राज्य की ओबीसी सूची में तो दर्ज हैं। लेकिन केंद्र सरकार की सूची में उन्हें अभी तक हिस्सेदारी नहीं मिली है। इस अंतर को दूर करने के लिए अलग से डिटेल तैयार करने को कहा गया है।
हर जाति के नेताओं की सूची
प्रदेश स्तर से लेकर जिला स्तर तक भाजपा में ओबीसी नेताओं की सूची भी बनाई जा रही है। इसमें यह देखा जाएगा कि हर नेता किस जाति और उपजाति से आता है। इसके अलावा यह भी जांचा जाएगा कि कौन सी जाति या उपजाति पूरी तरह छूट गई है। यानी ऐसी जातियां जिनका कोई भी नेता फिलहाल पार्टी में सक्रिय नहीं है। इस जानकारी से पार्टी को कमजोर कड़ियों का पता चलेगा।
दूसरी पार्टियों पर भी नजर
भाजपा सिर्फ अपने संगठन तक सीमित नहीं रहेगी। दूसरी पार्टियों में सक्रिय ओबीसी के बड़े नेताओं की जातियों का भी ब्योरा जुटाया जाएगा। इससे यह पता लगाया जाएगा कि किन जातियों में भाजपा की राजनीतिक पकड़ मजबूत है। साथ ही यह भी साफ होगा कि किन जातियों तक पार्टी संगठन की पहुंच अभी कमजोर है। स्थानीय स्तर पर सक्रिय सामाजिक चेहरों की जानकारी भी इकट्ठा की जाएगी। ओबीसी की हर छोटी-बड़ी जाति की आबादी के आंकड़े भी जुटाए जाएंगे। इसके साथ ही उनकी परंपराओं की जानकारी भी ली जाएगी।
सांस्कृतिक धरोहर की सूची भी
इस पूरी कवायद में सिर्फ आंकड़े ही नहीं जुटाए जा रहे। पार्टी संगठन में किन-किन जातियों को जगह मिली है, इसका ब्योरा भी तैयार होगा। यह भी देखा जाएगा कि किन जातियों को अब तक कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है। हर जिले में यह भी पता लगाया जाएगा कि सांसद, विधायक और अन्य ओबीसी जन प्रतिनिधि किन जातियों से हैं। जिन सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला, उनकी पहचान की जाएगी। ओबीसी जातियों से जुड़े महापुरुषों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। साथ ही उनकी सांस्कृतिक धरोहरों की सूची भी तैयार की जाएगी।
चुनाव से पहले क्यों जरूरी
यह पूरी मैपिंग भाजपा के लिए आगामी चुनावों के लिहाज से बड़ी अहमियत रखती है। जनगणना के बाद जातीय समीकरण बदल सकते हैं। ऐसे में पार्टी पहले से ही अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है। संगठन में कमजोर जातियों को जोड़ने की कोशिश हो सकती है। साथ ही जिन जातियों तक पहुंच कमजोर है, वहां नए प्रयास किए जा सकते हैं। यह पूरी कवायद आने वाले निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारी का हिस्सा मानी जा रही है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर सीधे तौर पर लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय से जुड़ी है। भारतीय संविधान पिछड़े वर्गों के उचित प्रतिनिधित्व की बात करता है। ऐसे में किसी राजनीतिक दल का ओबीसी जातियों की मैपिंग करना नागरिकों के लिए जानना जरूरी है। इससे पता चलता है कि सत्ता और संगठन में किन जातियों की भागीदारी है और किनकी नहीं।
यह जानकारी नागरिकों को सूचित मतदाता बनने में मदद करती है। खबर में किसी जाति विशेष के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं है। यह पूरी तरह तथ्यात्मक और सार्वजनिक हित की जानकारी है, जो पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देती है।
FAQ
Q. भाजपा ओबीसी मैपिंग क्यों करा रही है? A. भाजपा जातीय जनगणना से पहले यह जानना चाहती है कि सत्ता और संगठन में किस ओबीसी जाति को कितना प्रतिनिधित्व मिला है। इससे पार्टी अगले साल होने वाले निकाय और पंचायत चुनाव से पहले सामाजिक प्रतिनिधित्व को संतुलित करने की रणनीति बना सकेगी।
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