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कैंसर इंस्टीट्यूट जबलपुर का खुलासा, बिना स्मोकिंग के भी हो सकता है फेफड़ों का कैंसर

कैंसर इंस्टीट्यूट जबलपुर का खुलासा, बिना स्मोकिंग के भी हो सकता है फेफड़ों का कैंसर

World Lung Cancer Day: क्या आप जानते हैं कि बिना स्मोकिंग किए भी लंग कैंसर हो सकता है? यह बात हम नहीं, बल्कि स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की नई रिसर्च बता रही है। आज (1 अगस्त) वर्ल्ड लंग कैंसर डे पर बेहद चौंकाने वाली स्टडी सामने आई है।

यह स्टडी मध्य प्रदेश जबलपुर के स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में पांच सालों तक चली। इसमें लंग कैंसर के 546 मरीजों के डेटा की जांच की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, 60% मरीज यानी 328 लोग स्मोकिंग करते थे। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि 218 मरीज बिल्कुल नॉन स्मोकर थे। यानी उन्होंने कभी सिगरेट या बीड़ी को हाथ भी नहीं लगाया था। फिर भी वे फेफड़ों के कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए। रिसर्च से पता चला कि पैसिव स्मोकिंग इसका एक बहुत बड़ा कारण है।

अगर आपके आसपास कोई स्मोकिंग करता है, तो धुएं से आपको खतरा है। इस धुएं के संपर्क में आकर महिलाएं सबसे ज्यादा बीमार हो रही हैं। इसके अलावा हवा में मौजूद प्रदूषण और PM 2.5 भी फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जागरूकता की कमी के कारण लोग इसे सामान्य बीमारी या टीबी समझ लेते हैं। समय पर जांच न होने से बीमारी शरीर में फैल जाती है।

57% मरीजों को देरी से पता चला

जबलपुर के स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के स्टडी में एक बहुत ही डरावनी तस्वीर सामने आई है। लगभग 57% मरीजों को सीधे स्टेज-4 में बीमारी का पता चला। स्टेज-4 का मतलब है कैंसर पूरे शरीर में फैल चुका था।

जागरूकता और जांच की कमी से यह देरी हो रही है। गांवों में सही हेल्थ केयर सुविधाएं न होना भी बड़ी वजह है। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों की संख्या 68.5% रही।

पैसिव स्मोकिंग बनी बड़ी वजह

नॉन स्मोकर मरीजों में 58 लोग पैसिव स्मोकिंग का शिकार थे। वे खुद कभी बीड़ी या सिगरेट नहीं पीते थे। लेकिन दूसरों के छोड़े धुएं के संपर्क में रोजाना आते थे।

इस सेकंड हैंड स्मोकिंग से फेफड़ों में कैंसर की शुरुआत हुई। धुएं में मौजूद जहरीले तत्व फेफड़ों की सेल्स को नष्ट करते हैं। इसकी चपेट में आने वालों में सबसे ज्यादा महिलाएं शामिल हैं।

प्रदूषण भी बढ़ा रहा है कैंसर

सिर्फ धूम्रपान ही नहीं, जहरीली हवा भी बड़ा खतरा बन गई है। हवा में मौजूद PM 2.5 और हानिकारक केमिकल फेफड़ों को खराब कर रहे हैं। WHO ने खराब हवा को कैंसर फैलाने वाले कारकों में रखा है।

लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से कैंसर हो सकता है। शहरों और कस्बों में बढ़ता पॉल्यूशन नॉन स्मोकर्स को बीमार बना रहा है। सीनियर डॉक्टरों का मानना है कि हवा की क्वालिटी सुधारना बहुत जरूरी है।

लंग कैंसर के मुख्य लक्षण

स्टडी के मुताबिक, मरीजों में कई आम लक्षण पाए गए हैं। सबसे पहला और आम लक्षण लगातार खांसी होना है। लगभग 61.7% मरीजों में लंबे समय से खांसी की दिक्कत थी।

दूसरा बड़ा लक्षण सांस का बार-बार फूलना देखा गया है। लगभग 57.1% मरीजों को सांस लेने में भारी तकलीफ होती थी। सीने में दर्द की शिकायत 51.3% मरीजों में पाई गई। अचानक बिना वजह वजन घटना भी एक बड़ा चेतावनी संकेत है।

टीबी का इलाज और कैंसर का भ्रम

लंग कैंसर और टीबी के लक्षण काफी मिलते-जुलते होते हैं। स्टडी में 49 मरीजों को पहले टीबी की बीमारी रह चुकी थी। वहीं 17 मरीज ऐसे थे जिन्हें पहले टीबी मानकर इलाज दिया गया।

बाद में जब एडवांस टेस्ट हुए तो फेफड़ों का कैंसर निकला। गलत इलाज की वजह से कैंसर का सही समय पर पता नहीं चला। डॉक्टरों ने बिना पुष्टि के लंबे समय तक टीबी इलाज से बचने को कहा।

कौन से एज ग्रुप को ज्यादा खतरा

रिसर्च डेटा के मुताबिक 50 से 70 साल के बुजुर्ग ज्यादा प्रभावित हैं। कुल मरीजों में 80% संख्या पुरुषों की दर्ज की गई है। एमपी कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार हर साल केस बढ़ रहे हैं।

राज्य में हर एक लाख की आबादी पर 12.1 लोग मरीज हैं। कैंसर के मामलों में हर साल 0.3% का इजाफा हो रहा है। समय रहते लक्षण पहचान कर डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरूरी है।

वर्ल्ड लंग कैंसर डे के बारे में

वर्ल्ड लंग कैंसर डे (World Lung Cancer Day) हर साल एक अगस्त को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को लंग कैंसर की बीमारी, इसके खतरों और बचाव के तरीकों के बारे में जागरूक करना है।

इस दिन की शुरुआत सबसे पहले साल 2012 में इन्टरनेशनल एसोसिएशन फॉर द स्टडी ऑफ लंग कैंसर (IASLC) द्वारा अमेरिकन कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियन्स और अन्य इंटरनेशनल कैंसर ऑर्गनाइजेशन्स के सहयोग से की गई थी।

इस ग्लोबल मुहीम को शुरू करने का विचार सबसे पहले लंग कैंसर के बढ़ते मामलों और इससे जुड़ी गलतफहमियों को दूर करने के लिए आया था। लंग कैंसर का सबसे बड़ा कारण धूम्रपान और बढ़ता प्रदूषण है।

इस दिन डॉक्टर्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स लोगों को बताते हैं कि शुरुआती स्टेज में बीमारी की पहचान से मरीज की जान बचाई जा सकती है। यह दिन सभी को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और स्मोकिंग छोड़ने के लिए प्रेरित करता है।


FAQ
Q. क्या बिना धूम्रपान किए भी लंग कैंसर हो सकता है? A. हां, बिना धूम्रपान किए भी लंग कैंसर हो सकता है। पैसिव स्मोकिंग (दूसरों के धुएं के संपर्क में आना) और हवा में मौजूद जहरीले प्रदूषण (PM 2.5) के कारण नॉन स्मोकर्स को भी फेफड़ों का कैंसर हो सकता है। Q. लंग कैंसर के सबसे शुरुआती और मुख्य लक्षण क्या हैं? A. लंग कैंसर के मुख्य लक्षणों में लगातार खांसी होना (61.7%), सांस फूलना (57.1%), सीने में दर्द होना (51.3%) और बिना किसी कारण के अचानक तेजी से वजन घटना (48.7%) शामिल हैं। Q. पैसिव स्मोकिंग से किसे सबसे ज्यादा खतरा होता है? A. जो लोग खुद बीड़ी या सिगरेट नहीं पीते हैं, लेकिन स्मोकिंग करने वाले लोगों के आसपास रहते हैं, वे पैसिव स्मोकिंग का शिकार होते हैं। स्टडी के अनुसार इसमें महिलाओं को सबसे ज्यादा खतरा होता है।

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