News In Short
- मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अपनी सरकार से नाराज बताए जा रहे हैं।
- इंदौर के जलूद में उनके विभाग का कार्यक्रम था, फिर भी वे वहां नहीं पहुंचे।
- भाजपा के प्रशिक्षण वर्ग में CM आने से पहले ही कार्यक्रम छोड़ गए थे।
- एक वायरल वीडियो में विजयवर्गीय ने खुद को टेम्परेरी मंत्री बताया था।
- कांग्रेस भी मंत्री की नाराजगी को मुद्दा बनाकर सरकार पर निशाना साध रही है।
News In Detail
मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार (एमपी बीजेपी) के अंदर कुछ सब ठीक नहीं लग रहा है। नगरीय प्रशासन (Urban Administration) मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बीच दूरियों की चर्चा एक बार फिर सियासी गलियारों में तेज हो गई है। बुधवार को इंदौर के जलूद में एक सरकारी कार्यक्रम हुआ। यह कार्यक्रम सीधे विजयवर्गीय के अपने विभाग से जुड़ा था, फिर भी वे वहां नजर नहीं आए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम में पहुंचे। इंदौर के तमाम बड़े नेता भी मौजूद थे। लेकिन जिस मंत्री का विभाग था, वही गायब रहे। सूत्रों के मुताबिक विजयवर्गीय उस दिन इंदौर में ही थे।
देरी से मिली सूचना बनी नाराजगी की वजह
बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम की सूचना विजयवर्गीय को काफी देरी से और बेमन से दी गई। इसी से वे नाराज हो गए और कार्यक्रम से दूरी बना ली। यह कोई पहली बार नहीं हुआ। इससे पहले भाजपा के एक प्रशिक्षण वर्ग में भी ऐसा ही हुआ था। उस निजी स्कूल में आयोजित प्रशिक्षण में मंत्री पहुंचे थे, लेकिन जैसे ही मुख्यमंत्री के आने का वक्त हुआ, वे वहां से निकल गए।
जलूद में हुए सोलर प्लांट (Solar Plant) के लोकार्पण कार्यक्रम में उनकी अनुपस्थिति ने एक बार फिर यही सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सरकार के अंदर सब कुछ ठीक क्यों नहीं दिख रहा।
कैबिनेट से भी रहते हैं नदारद
विजयवर्गीय की नाराजगी सिर्फ एक- दो कार्यक्रमों तक नहीं रही है। मोहन कैबिनेट (Cabinet) की बैठकों में भी उनकी कई बार अनुपस्थिति देखी गई है। राजनीतिक जानकार इसे भी उनकी कथित नाराजगी का हिस्सा मानते हैं। बुधवार के घटनाक्रम के बाद यह चर्चा और तेज हो गई है।
वायरल वीडियो ने बढ़ाई हलचल
बुधवार को हुई घटना के बाद अब इस नाराजगी को सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पुराना वीडियो से भी जोड़ा जा रहा है। इस वीडियो में विजयवर्गीय ने गायक द्वारका मंत्री के सामने कहा था, "ये तो स्थायी मंत्री हैं और मैं टेम्परेरी मंत्री हूं। ये हमेशा मंत्री रहेंगे और मैं कभी भी 'भूतपूर्व' बन सकता हूं।"
यह बयान अब नए सिरे से चर्चा में है। लोग यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इस बयान के पीछे कोई गहरा राजनीतिक संकेत है। क्या वे सच में खुद को सरकार से बाहर होता देख रहे हैं, या यह महज एक हल्की-फुल्की बात थी जिसे अब बड़ा बनाया जा रहा है।
कांग्रेस ने भी कसा तंज
Minister Kailash Vijayvargiya और सरकार के बीच की खींचतान का फायदा उठाने में कांग्रेस (Congress) भी पीछे नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पहले भी इस पर तंज कस चुके हैं। मास्टर प्लान (Master Plan) जारी न होने पर पटवारी ने कहा था कि नगरीय प्रशासन मंत्री (indore politics) के दोनों हाथ शोले के ठाकुर जैसे कटे हुए हैं। यानी विपक्ष की नजर में विजयवर्गीय कुछ करने की स्थिति में ही नहीं हैं।
भाजपा में खुलकर बात नहीं
इस पूरे मामले पर भाजपा (BJP) की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। न विजयवर्गीय ने अनुपस्थिति पर कुछ कहा, न सरकार के किसी प्रवक्ता ने सफाई दी। यह चुप्पी खुद में बहुत कुछ कह रही है।
अभी तक की घटनाओं को देखें तो एक बात साफ है कि विजयवर्गीय और सरकार के बीच सब कुछ सामान्य नहीं है। यह असामान्यता (मध्यप्रदेश राजनीति) कहां तक जाएगी, यह देखने वाली बात होगी।
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