समझें क्या है पूरा मामला
- CBI ने श्रवण सूर्यवंशी की मौत के मामले में हत्या की FIR दर्ज की।
- सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जांच शुरू हुई है।
- 13 अक्टूबर तक CBI को कोर्ट में जांच रिपोर्ट देनी है।
- न्यायिक जांच में सिर की चोट को मौत की वजह बताया गया था।
- परिजनों को 25 लाख रूपए का अंतरिम मुआवजा मिलेगा।
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जनवरी 2024 में हुई श्रवण सूर्यवंशी उर्फ सरवन तामरे की हिरासत में मौत का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 12 अगस्त 2026 के आदेश के बाद हुई है।
CBI ने 30 जुलाई 2026 को सिविल लाइंस थाने में दर्ज FIR नंबर 1036 को अपनी जांच का मुख्य आधार बनाया है। फिलहाल FIR में आरोपियों के नाम की जगह अज्ञात व्यक्ति लिखा गया है।
13 अक्टूबर से पहले CBI को देनी होगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया है कि वह 13 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे। कोर्ट यह पता लगाना चाहता है कि श्रवण की हिरासत में मौत किन परिस्थितियों में हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर जांच में कोई पुलिस या अन्य अधिकारी हिरासत में हिंसा के लिए जिम्मेदार पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही उन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो रही है, जिन्होंने न्यायिक जांच में सामने आई बातों के बाद उचित कार्रवाई नहीं की।
कौन था श्रवण सूर्यवंशी?
श्रवण सूर्यवंशी बिलासपुर के ग्राम मोहरा का रहने वाला था और खेती-किसानी करता था। उसकी उम्र करीब 35 साल थी।
परिजनों के मुताबिक, जनवरी 2024 में पुलिस उसे अपने साथ लेकर गई थी। पुलिस ने बाद में दावा किया कि उसे महुआ शराब के मामले में पकड़ा गया और उसके खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई।
इसके बाद श्रवण को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
जेल पहुंचने के बाद बिगड़ी तबीयत
परिजनों के अनुसार, जेल जाने के बाद जब वे श्रवण से मिलने पहुंचे तो उन्हें उससे मिलने नहीं दिया गया। इसी दौरान जेल में उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।
पहले उसका इलाज जेल अस्पताल में किया गया। हालत गंभीर होने पर उसे सिम्स अस्पताल भेजा गया, जहां उसकी मौत हो गई।
जेल प्रबंधन की ओर से बताया गया था कि श्रवण को सांस लेने में परेशानी हो रही थी और इसी वजह से उसे अस्पताल भेजा गया था।
न्यायिक जांच में सिर की चोट का जिक्र
इस मामले की न्यायिक जांच भी हुई थी। 22 जुलाई 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी निकसन डेविड लकड़ा ने अपनी रिपोर्ट सौंपी।
रिपोर्ट में पोस्टमॉर्टम, मेडिकल, हिस्टोपैथोलॉजी और FSL समेत कई दस्तावेजों की जांच की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, शरीर में किसी तरह का रासायनिक जहर नहीं मिला।
वहीं मेडिकल रिपोर्ट में मौत की वजह सिर में लगी चोट के बाद कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट बताई गई थी। उपलब्ध दस्तावेजों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जांच में सिर की चोट को मौत से जुड़ा अहम कारण माना गया।
पत्नी और पिता ने क्या बताया?
श्रवण की पत्नी लहराबाई सूर्यवंशी ने न्यायिक जांच के दौरान बताया था कि घटना के दिन थाना सीपत के पुलिसकर्मी श्रवण को अपने साथ लेकर गए थे। बाद में उन्हें फोन से पता चला कि श्रवण को सिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके अगले दिन उसकी मौत की जानकारी मिली।
श्रवण के पिता अमृतलाल ताम्र ने भी बताया कि पुलिस उसे शराब के मामले में लेकर गई थी। बाद में उन्हें जेल से अस्पताल भेजे जाने की जानकारी मिली और अगले दिन बेटे की मौत की खबर मिली।
हालांकि, परिवार को यह स्पष्ट जानकारी नहीं थी कि श्रवण की मौत आखिर किन परिस्थितियों में हुई।
बिलासपुर पहुंची CBI टीम
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CBI की टीम 15 अगस्त को बिलासपुर पहुंची थी। SP रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम ने सिविल लाइन थाने से केस डायरी और दूसरे जरूरी दस्तावेज लिए।
इसके बाद टीम सेंट्रल जेल भी पहुंची और जेल अधीक्षक समेत अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की।
अब CBI केस डायरी, न्यायिक जांच रिपोर्ट, मेडिकल दस्तावेज और दूसरे रिकॉर्ड के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है।
परिजनों को 25 लाख रूपए का अंतरिम मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने मृतक के परिवार को 25 लाख रूपए का अंतरिम मुआवजा देने का भी आदेश दिया है। अंतिम मुआवजे की राशि बाद में तय की जाएगी।
अब सबकी नजर CBI की जांच रिपोर्ट पर है। 13 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में पेश होने वाली रिपोर्ट से यह साफ होने की उम्मीद है कि श्रवण की मौत के पीछे आखिर क्या परिस्थितियां थीं और क्या इसके लिए कोई अधिकारी जिम्मेदार था।
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