NEWS IN SHORT
- खाद की कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई हैं
- सरकार ने खाद की कमी को लेकर किसानों को आश्वस्त किया हैं
- खरीफ 2026 की तैयारियों पर लगातार नजर रखेगी सरकार
- विकसित भारत संकल्प अभियान से किसानों को मिलेगा लाभ
- मखाना और सिंघाड़ा खेती को बढ़ावा देने की खास योजना हैं
NEWS IN DETAIL
Raipur। छत्तीसगढ़ में अब खाद की कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने साफ कहा है कि जमाखोरी या ज्यादा दाम पर खाद बेचने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि गड़बड़ी मिलने पर सीधे जेल होगी। सरकार ने यह भी कहा है कि प्रदेश में खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी।
युद्ध संकट के बीच सरकार अलर्ट
मंत्री नेताम ने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे हालात का असर खाद की सप्लाई पर पड़ सकता है। इसे देखते हुए सरकार पहले से सतर्क है। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि राज्य में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध रहेगी। किसी भी तरह की अफवाह में आने की या घबराने की जरूरत नहीं है।
खरीफ 2026 की तैयारी पर खास फोकस
सरकार खरीफ सीजन 2026 की तैयारियों में जुट गई है। खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। जिलों के अधिकारियों को नियमित और अचानक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी सामने आते ही तुरंत कार्रवाई हो सके।
जैविक खेती और विकल्पों को बढ़ावा
सरकार अब केवल पारंपरिक खाद पर निर्भर नहीं रहना चाहती। पिछले साल डीएपी की कमी को देखते हुए इस बार एनपीके, एसएसपी जैसे वैकल्पिक खादों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही जैविक खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि खेती ज्यादा सुरक्षित और टिकाऊ बन सके।
गांव-गांव पहुंचेगा विकसित भारत संकल्प अभियान
राज्य में 5 मई से 20 मई तक विकसित भारत संकल्प अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान कृषि वैज्ञानिक और विभागीय अधिकारी गांवों में जाकर किसानों से बात-चित करेंगे। किसानों को नई तकनीक, बेहतर खेती के तरीके और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। साथ ही मौके पर ही समस्याओं का समाधान भी किया जाएगा।
योजनाओं का लाभ हर किसान तक पहुंचेगा
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस अभियान को गंभीरता से चलाया जाए। कोशिश यह रहे कि ज्यादा से ज्यादा किसान योजनाओं से जुड़ सकें। सरकार चाहती है कि सिर्फ जानकारी ही नहीं, बल्कि किसानों को मौके पर ही योजना का लाभ भी मिले।
फसल पैटर्न बदलने की तैयारी
सरकार अब धान के साथ-साथ दलहन, तिलहन और मक्का जैसी फसलों को बढ़ावा दे रही है। इससे किसानों की लागत कम होगी और आय बढ़ेगी। धमतरी जिले में दलहन-तिलहन के बढ़ते रकबे को उदाहरण स्वरुप बताया है। अन्य जिलों को भी इसी दिशा में काम करने के निर्देश दिए गए हैं।
फार्मर आईडी और पंजीयन पर जोर
बैठक में एग्रीस्टैक पोर्टल पर किसानों के पंजीयन की समीक्षा भी की गई। निर्देश दिए गए हैं कि एक सप्ताह के भीतर सभी बचे हुए किसानों का पंजीयन पूरा किया जाए। ताकि कोई भी किसान पीएम किसान योजना के लाभ से वंचित न रहे।
दूरदराज इलाकों में पहले से भंडारण
सरकार ने दूरस्थ इलाको में पहले से खाद भंडारण करने के निर्देश दिए हैं। इसका मकसद यह है कि सीजन के समय किसानों को खाद के लिए भटकना न पड़े। समय पर और आसान उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
मखाना-सिंघाड़ा और मछली पालन पर जोर
बैठक में नई संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। जल स्रोतों में मखाना और सिंघाड़ा की खेती को बढ़ावा देने की योजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही मछली पालन को भी जोड़ने की बात कही गई है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे।
समन्वय बढ़ाने के निर्देश
पीएम आशा योजना की समीक्षा में कुछ जिलों में प्रगति कम पाई गई। इस पर मंत्री ने मार्कफेड, नाफेड और अन्य संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय के निर्देश दिए। ताकि दलहन-तिलहन की खरीदी को बढ़ाया जा सके।
सरकार का स्पष्ट संदेश
कुल मिलाकर सरकार ने साफ संकेत दिया है कि खाद की कालाबाजारी अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होगी। साथ ही किसानों को बेहतर सुविधा, आधुनिक खेती और आय बढ़ाने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। आने वाले समय में खेती को ज्यादा मजबूत और फायदेमंद बनाने पर सरकार का पूरा फोकस रहेगा।
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