समझें क्या है पूरा मामला
- अमूल ने FY26 में 1 लाख करोड़ रुपए का ब्रांड टर्नओवर पार किया।
- यह करने वाली वह भारत की पहली FMCG कंपनी बन गई है।
- GCMMF (Gujarat Co-operative Milk Marketing Federation) ने 5 अप्रैल 2026 को यह घोषणा की।
- यह कंपनी किसी अरबपति की नहीं, बल्कि 36 लाख किसानों की है।
- 1946 में गुजरात के 247 किसानों की हड़ताल से यह सफर शुरू हुआ था।
अमूल ने रचा इतिहास
5 अप्रैल 2026 को GCMMF ने एक बड़ा ऐलान किया। अमूल ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1 लाख करोड़ रुपए (1 lakh crore revenue) का ब्रांड टर्नओवर पार कर लिया। यह HUL (Hindustan Unilever Limited), नेस्ले या ITC में से किसी ने नहीं किया था। यह कारनामा किया एक किसान सहकारी संस्था ने, जो गुजरात के एक छोटे से कस्बे से शुरू हुई थी। यह सिर्फ एक कंपनी की जीत नहीं है। यह उन लाखों किसानों की जीत है जिन्होंने दशकों पहले एक बड़े सपने की नींव रखी थी।
1946: जब किसानों ने कहा 'बस, अब नहीं'
बात 1946 की है। गुजरात के आनंद में पोलसन डेयरी का एकछत्र राज था। किसानों से एक लीटर दूध 20 पैसे में लो और बंबई में 80 पैसे में बेचो। किसान मेहनत करें, मुनाफा बिचौलिया ले जाए। यह शोषण सालों से चल रहा था।
फिर त्रिभुवनदास पटेल के नेतृत्व में किसानों ने 15 दिन की दूध हड़ताल कर दी। आनंद से बंबई तक एक बूँद दूध नहीं गया। पोलसन डेयरी की सांसें अटक गईं। सरदार वल्लभभाई पटेल ने किसानों को एक ही सलाह दी कि बिचौलिया हटाओ और खुद बेचो। बस यहीं से जन्म हुआ कैरा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ का। कोई वेंचर कैपिटल नहीं, कोई बैंक लोन नहीं। सिर्फ 247 किसान और उनका जज्बा।
Photograph: (the sootr)डॉ. कुरियन: वो इंजीनियर जिसने सब बदल दिया
उस दौर में एक युवा डेयरी इंजीनियर अमेरिका की मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी से पढ़कर लौटा था। नाम था डॉ. वर्गीज कुरियन। सरकारी पोस्टिंग पर आनंद आए थे, लेकिन त्रिभुवनदास ने उन्हें रुकने के लिए मना लिया।
26 साल के इस इंजीनियर के उस फैसले ने भारत की डेयरी इंडस्ट्री की तस्वीर हमेशा के लिए बदल दी। उस वक्त पश्चिम के डेयरी उद्योग में गाय के दूध का ही बोलबाला था। भैंस के दूध को घटिया माना जाता था क्योंकि उसमें चर्बी ज्यादा होती है। कुरियन ने इस सोच को चुनौती दी।
1955 में उन्होंने दुनिया का पहला भैंस के दूध से बना स्प्रे-ड्राइड स्किम्ड मिल्क पाउडर तैयार किया। पश्चिमी दुनिया कहती थी यह नहीं हो सकता, लेकिन कुरियन ने कर दिखाया। इस तकनीक का पेटेंट किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी के पास नहीं गया। यह पेटेंट भारत के किसानों का था।
अमूल बटर और वो नीली परी
Photograph: (the sootr)1955 में अमूल बटर बाजार में आया। उसने आते ही सारे आयातित मक्खन ब्रांड की हवा निकाल दी। सस्ता, स्वादिष्ट और अपना। 70 साल बाद भी अमूल बटर भारत में नंबर एक है। यह रिकॉर्ड आज तक किसी ने नहीं तोड़ा।
फिर 1966 में एक विज्ञापन एजेंसी ने एक गोल-मटोल, नीले बालों वाली कार्टून लड़की बनाई। टैगलाइन थी "Utterly Butterly Delicious।" किसी को नहीं पता था कि यह लड़की 60 साल बाद भी भारत के होर्डिंग्स पर राज करेगी। इमरजेंसी हो, 1983 का वर्ल्ड कप हो, नोटबंदी हो या कोविड, अमूल गर्ल ने हर बड़े मौके पर अपना चुटीला कमेंट किया। इस आउटडोर एडवर्टाइजिंग कैंपेन को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दुनिया का सबसे लंबे समय तक चलने वाला अभियान दर्ज किया गया है।
ऑपरेशन फ्लड: जब भारत दूध में आत्मनिर्भर हुआ
1970 तक भारत दूध के मामले में दूसरे देशों पर निर्भर था। कुरियन ने इसे एक अवसर की तरह देखा। उन्होंने ऑपरेशन फ्लड (Operation Flood) की शुरुआत की। यह दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी विकास कार्यक्रम था।
योजना सरल थी लेकिन क्रियान्वयन बड़ा था। आनंद का सहकारी मॉडल पूरे भारत में फैलाना था। गाँव दर गाँव, जिला दर जिला। 1990 के दशक तक भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन गया। अमेरिका और पूरे यूरोप को पीछे छोड़कर। कुरियन ने ऑपरेशन फ्लड के तीन चरण सफलतापूर्वक चलाए।
36 लाख किसानों की कंपनी
दुनिया की बड़ी कंपनियाँ किसी अमीर परिवार की होती हैं, या शेयर बाजार की। अमूल का मालिक कोई उद्योगपति नहीं है। 36 लाख किसान इसके असली मालिक हैं।
हर किसान जो दूध देता है उसे अमूल की कमाई में हिस्सा मिलता है। बटर हो, चीज हो, आइसक्रीम हो या चॉकलेट, सबका फायदा सीधे किसानों तक पहुँचता है। यही अमूल की सबसे बड़ी ताकत है। 36 लाख लोग जिनकी रोजी-रोटी अमूल से जुड़ी है, वही इसके सबसे वफादार रक्षक भी हैं।
अमूल हर दिन दो बार अपनी 18,600 से ज्यादा ग्राम सोसाइटियों से दूध इकट्ठा करता है। 365 दिन, बिना रुके। हर दिन 2.6 करोड़ लीटर से ज्यादा दूध। यह मात्रा 10 ओलिंपिक स्विमिंग पूल भरने के बराबर है।
कोल्ड चेन: वो नेटवर्क जो कोई नहीं बना सकता
अमूल की दूसरी बड़ी ताकत है उसका कोल्ड चेन नेटवर्क। 78 साल में बना यह नेटवर्क उन गाँवों तक रेफ्रिजरेटेड ट्रक पहुँचाता है जो गूगल मैप्स पर भी मुश्किल से दिखते हैं। कोई भी FMCG दिग्गज या स्टार्टअप 100 मिलियन डॉलर लगाकर भी इसे नहीं बना सकता। यह नेटवर्क मुनाफे के लिए नहीं, लोगों के लिए बना है।
और सबसे अहम बात यह कि अमूल ने कभी अमीरों का ब्रांड बनने की कोशिश नहीं की। 20 रुपए का बटर, 5 रुपए की छाछ, हर घर के लिए दूध। यह 1 लाख करोड़ रुपए का टर्नओवर महँगे पैकेजिंग से नहीं आया। यह 1.4 अरब लोगों की सुबह में रोज शामिल होने से आया।
अमूल आज: नंबरों में
अमूल के पास आज 1,200 से ज्यादा प्रोडक्ट हैं। बटर, दूध, चीज, आइसक्रीम, घी, पनीर, दही, चॉकलेट, लस्सी, बेबी फूड, हेल्थ ड्रिंक और फ्रोजन स्नैक्स। अमूल आइसक्रीम भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाली आइसक्रीम ब्रांड है। यह Kwality Walls और Baskin-Robbins को मिलाकर भी पीछे छोड़ देती है। ICA (International Cooperative Alliance) ने अमूल को दुनिया की नंबर एक सहकारी संस्था का दर्जा दिया है। अमूल 50 से ज्यादा देशों में निर्यात करता है।
डॉ. कुरियन ने एक बार कहा था कि मैं ऐसी संस्थाएं बनाने के काम में हूँ जो मेरे जाने के बाद भी चलती रहें। 2012 में उनका निधन हुआ। 2026 में अमूल ने 1 लाख करोड़ रुपए का टर्नओवर पार किया। डॉ. कुरियन जीत गए।
यह खबर क्यों जरूरी है?
यह खबर इसलिए जरूरी है क्योंकि अमूल की यह उपलब्धि सिर्फ एक व्यावसायिक मील का पत्थर नहीं है। यह भारत के सहकारी आंदोलन की जीत है। यह खबर बताती है कि जब आम लोगों को संगठित किया जाए और उन्हें उनकी मेहनत का सही मूल्य मिले, तो वे दुनिया की किसी भी बहुराष्ट्रीय कंपनी को मात दे सकते हैं। भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची में सहकारी समितियों को विशेष स्थान दिया गया है। अमूल उसी भावना का जीवंत उदाहरण है। सामाजिक न्याय की दृष्टि से यह खबर लाखों ग्रामीण परिवारों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। डिजिटल और मीडिया एथिक्स के नजरिए से यह तथ्यों पर आधारित, स्रोत-सत्यापित और किसी भी तरह के भ्रामक दावे से मुक्त खबर है।
FAQ
प्रश्न 1: अमूल 1 लाख करोड़ रुपए कमाने वाली पहली भारतीय FMCG कंपनी क्यों है?
उत्तर: HUL, नेस्ले और ITC जैसी बड़ी कंपनियाँ भारत में दशकों से काम कर रही हैं, लेकिन अपने FMCG कारोबार में किसी ने अब तक 1 लाख करोड़ रुपए का आँकड़ा नहीं छुआ था। अमूल ने FY26 में यह उपलब्धि हासिल की। इसकी सबसे बड़ी वजह है अमूल का विशाल उत्पाद पोर्टफोलियो, 36 लाख किसानों का मालिकाना नेटवर्क, और हर आय वर्ग के उपभोक्ता तक पहुँच। GCMMF ने 5 अप्रैल 2026 को इसकी आधिकारिक घोषणा की।
प्रश्न 2: अमूल का मालिक कौन है और किसानों को इससे क्या फायदा होता है?
उत्तर: अमूल किसी एक व्यक्ति या परिवार की कंपनी नहीं है। यह एक सहकारी संस्था है जिसके मालिक 36 लाख किसान हैं। ये किसान 18,600 से ज्यादा ग्राम सोसाइटियों के जरिए दूध देते हैं। अमूल जो भी कमाता है, उसका एक हिस्सा सीधे इन किसानों तक पहुँचता है। बटर, चीज, आइसक्रीम या चॉकलेट जो भी बिके, उसका फायदा किसानों को मिलता है। यही इसे दुनिया के सबसे अनोखे व्यावसायिक मॉडल में से एक बनाता है।
प्रश्न 3: ऑपरेशन फ्लड क्या था और इसने भारत को कैसे बदला?
उत्तर: ऑपरेशन फ्लड 1970 में डॉ. वर्गीज कुरियन द्वारा शुरू किया गया दुनिया का सबसे बड़ा डेयरी विकास कार्यक्रम था। इसका मकसद आनंद के सहकारी मॉडल को पूरे भारत में फैलाना था। गाँव-गाँव, जिला-जिला सहकारी डेयरियाँ बनाई गईं। इसके तीन चरण चले। नतीजा यह हुआ कि 1990 के दशक तक भारत दूध की कमी वाले देश से दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन गया। अमेरिका और पूरे यूरोप को पीछे छोड़कर।
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