UDISE Plus Report: देश की स्कूली शिक्षा को लेकर एक बड़ी और चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। शिक्षा मंत्रालय ने हाल ही में अपनी ताजा यूडीआईएसई प्लस (UDISE Plus 2025-26) रिपोर्ट जारी की है।
इस रिपोर्ट में देश के स्कूलों को लेकर कई अच्छे और कुछ चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं। सबसे बड़ा बदलाव स्कूलों के पढ़ने और पढ़ाने के तरीके में हुआ है। देश में अब पुरानी 10+2 वाली व्यवस्था को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है।
इसकी जगह अब नया 5+3+3+4 का मॉडल लागू कर दिया गया है। इस नए मॉडल के तहत अब तीन साल की उम्र से ही बच्चे स्कूल के स्ट्रक्चर का हिस्सा बन रहे हैं। आइए जानें क्या है ये मॉडल...
भारत का नया स्कूल मॉडल क्या है
नया मॉडल (New Education Model) बच्चों की नींव को मजबूत करने के लिए बनाया गया है। इसमें फाउंडेशनल, प्रिपरेटरी, मिडिल और सेकेंडरी स्टेज (Foundational, Preparatory, Middle, and Secondary) शामिल किए गए हैं।
अब बच्चों को खेल-खेल में और प्रैक्टिकल मेथड्स से पढ़ाया जाएगा। इसका उद्देश्य रटने की आदत को खत्म करना और बच्चों का सही डेवलपमेंट करना है। इस नई व्यवस्था से स्कूलों में बेसिक एमेनिटीज भी पहले से काफी बेहतर हुई हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अब 99.5% स्कूलों में पीने के साफ पानी की व्यवस्था है। इसके साथ ही 95% स्कूलों में बिजली का कनेक्शन पहुंच चुका है। छात्राओं की सुविधा के लिए 98.5% स्कूलों में अलग से टॉयलेट बने हैं।
आपको बता दें कि, यूडीआईएसई प्लस (UDISE Plus) भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय का एक ऑनलाइन डेटाबेस पोर्टल है, जो देश के सभी स्कूलों की जरूरी जानकारी जुटाता है। इसका मुख्य काम स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों और छात्रों के आंकड़ों पर नजर रखकर शिक्षा नीति को बेहतर बनाना है।
टीचर और स्टूडेंट का रेश्यो सुधरा
देश के स्कूलों में अब शिक्षकों की कमी को काफी हद तक दूर किया गया है। अब औसतन हर 24 छात्रों को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक मौजूद है। इससे शिक्षक और छात्र का रेश्यो पहले से बहुत बेहतर हो गया है। क्लास में अब हर बच्चे पर अच्छे से ध्यान दिया जा सकता है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश के 14.67 लाख स्कूलों में कुल 24.72 करोड़ छात्र पढ़ रहे हैं। इनमें 12.75 करोड़ लड़के और 11.96 करोड़ लड़कियां शामिल हैं। इन सभी बच्चों को पढ़ाने के लिए देश में 1.02 करोड़ शिक्षक काम कर रहे हैं। डिजिटल सुविधाओं के मामले में अभी थोड़ा काम होना बाकी है।
डिजिटल सुविधाओं में अभी है कमी
भले ही स्कूलों में पानी और बिजली पहुंच गई हो लेकिन डिजिटल इंडिया अभी दूर है। करीब 30 से 32 प्रतिशत स्कूल अब भी डिजिटल सुविधाओं से वंचित हैं। इन स्कूलों में कंप्यूटर, इंटरनेट और स्मार्ट क्लास जैसी मॉडर्न कन्वेनियंसेस मौजूद नहीं हैं। सरकार इन्हें सुधारने का लगातार प्रयास कर रही है।
इस रिपोर्ट का सबसे परेशान करने वाला हिस्सा बच्चों का स्कूल छोड़ना यानी ड्रॉपआउट रेट है। जैसे-जैसे बच्चे आगे की क्लास में जाते हैं, उनकी संख्या कम होने लगती है। पहली से पांचवीं क्लास तक स्कूल में टिके रहने की दर 91.1% है। लेकिन इसके बाद यह आंकड़ा लगातार गिरता चला जाता है।
12वीं तक आते-आते गायब हो जाते हैं बच्चे
छठी से आठवीं क्लास तक स्कूल में टिके रहने की दर 83.7% रह जाती है। नौवीं और दसवीं क्लास तक आते-आते ये रेट केवल 69.8% बचती है। सबसे खराब स्थिति 11वीं और 12वीं क्लास में देखने को मिलती है। हायर सेकेंडरी स्तर पर यह दर घटकर केवल 51.9% रह जाती है।
इसका सीधा मतलब यह हुआ कि पहली क्लास में आने वाले हर सौ बच्चों को देखें। उनमें से लगभग 48 बच्चे 12वीं कक्षा पूरी करने से पहले ही स्कूल छोड़ देते हैं। दसवीं क्लास पास करने वाले बच्चों में से केवल 78.1% बच्चे ही आगे बढ़ते हैं। बाकी बच्चे बीच में ही अपनी पढ़ाई बंद कर देते हैं।
राज्यों में स्कूलों और छात्रों का गणित
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 2 लाख 65 हजार 278 स्कूल हैं जहां 16.42 लाख शिक्षक पढ़ा रहे हैं। महाराष्ट्र के 1 लाख 8 हजार 139 स्कूलों में 7.50 लाख शिक्षक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। बिहार के 95 हजार 285 स्कूलों में 7.28 लाख शिक्षक बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी स्कूलों की संख्या एक लाख से अधिक है।
इस पूरी रिपोर्ट में लड़कियों के प्रदर्शन ने सबको हैरान और खुश किया है। स्कूली शिक्षा में लड़कियों की भागीदारी लड़कों की तुलना में बहुत शानदार रही है। सभी स्तरों पर जेंडर पैरिटी इंडेक्स यानी जीपीआई-1 से अधिक दर्ज किया गया है। इसका मतलब है कि स्कूलों में लड़कियों की संख्या बढ़ रही है।
MP के स्कूलों की रिपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश के स्कूलों में बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर का कवरेज तो काफी अच्छा है। लेकिन कई जरूरी इंडीकेटर्स में राज्य अभी भी राष्ट्रीय औसत से पीछे चल रहा है।
सैनिटेशन, इलेक्ट्रिसिटी और डिजिटल रिसोर्सेज की स्थिति
रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, एमपी के 98.2% स्कूलों में लाइब्रेरी या रीडिंग कॉर्नर और 94.6% स्कूलों में खेल के मैदान मौजूद हैं, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर हैं। हालांकि, फंक्शनल सैनिटेशन और डिजिटल रिसोर्सेज के मामले में राज्य को काफी सुधार की जरूरत है।
सैनिटेशन (Sanitation): एमपी के स्कूलों में लड़कियों के लिए 91.3% और लड़कों के लिए 90.8% ही फंक्शनल टॉयलेट्स हैं, जबकि इसका नेशनल एवरेज क्रमश: 95.1% और 92.3% है।
बिजली (Electricity): राज्य के 93.6% स्कूलों में बिजली उपलब्ध है, लेकिन केवल 90.7% स्कूलों में ही फंक्शनल बिजली है, जो राष्ट्रीय स्तर (93.5%) से कम है।
डिजिटल और सोलर गैप (Digital & Solar Gap): एमपी के केवल 2.4% स्कूलों में डिजिटल लाइब्रेरी है (नेशनल एवरेज 7.1%), और सिर्फ 5.6% स्कूलों में ही सोलर पैनल लगे हैं (नेशनल एवरेज 11.4%)।
एजुकेशन एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन गैप्स के कारण राज्य में डिजिटल क्लासरूम और ग्रीन-एनर्जी को बड़े पैमाने पर लागू करने में दिक्कत आ सकती है। राज्य के कुल एक लाख 19 हजार 694 स्कूल पूरे देश के कुल स्कूलों का लगभग 8.2% हिस्सा हैं।
मार्जिनलिज्ड सेक्शंस की भागीदारी बढ़ी
स्कूलों (New Education Policy) में अब 11.09 करोड़ ओबीसी बच्चे अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं। इनके साथ ही 4.38 करोड़ एससी और 2.46 करोड़ एसटी बच्चे पढ़ रहे हैं। मार्जिनलिज्ड सेक्शंस (School Education) के बच्चों का स्कूल पहुंचना देश के लिए एक अच्छा संकेत है। सरकार का फोकस अब इन बच्चों को स्कूल में रोके रखने पर है और ड्रॉपआउट दर खत्म करना है।
पहली कक्षा में दाखिला लेने वाले 1.93 करोड़ बच्चों में से ज्यादातर आंगनवाड़ी से आए हैं। प्री-स्कूल से आने वाले इन बच्चों के लिए नया मॉडल बहुत मददगार साबित होगा। अब देखना होगा कि नया 5+3+3+4 मॉडल ड्रॉपआउट रेट को कितना कम कर पाता है।
FAQ
Q. देश के स्कूलों में लागू नया 5+3+3+4 मॉडल क्या है? A. यह स्कूली शिक्षा का नया ढांचा है जिसने पुरानी 10+2 व्यवस्था को बदला है। इसमें 3 साल की उम्र से बच्चों की पढ़ाई शुरू होती है। इसे फाउंडेशनल, प्रिपरेटरी, मिडिल और सेकेंडरी चरणों में बांटा गया है। Q. यूडीआईएसई प्लस रिपोर्ट में 12वीं तक कितने बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं? A. रिपोर्ट के मुताबिक कक्षा 1 से 12वीं तक आते-आते करीब 48 प्रतिशत बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं। हायर सेकेंडरी स्तर पर बच्चों के स्कूल में टिके रहने की दर घटकर केवल 51.9 प्रतिशत ही रह जाती है। Q. स्कूलों में छात्र और शिक्षक का नया अनुपात क्या है? A. देश के स्कूलों में अब शिक्षक और छात्र के अनुपात में काफी सुधार हुआ है। अब औसतन हर 24 छात्रों को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक उपलब्ध है। देश में कुल 1.02 करोड़ शिक्षक पढ़ा रहे हैं।
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