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क्या सेहत के लिए जहर बन रहा है दूध? सोशल मीडिया के दावों का सच

क्या सेहत के लिए जहर बन रहा है दूध? सोशल मीडिया के दावों का सच

समझें क्या है पूरा मामला

  • सोशल मीडिया पर एक दावा तेजी से वायरल हो रहा है।

  • दावा है कि गाय-भैंस का दूध पीने से कैंसर होता है।

  • वजह बताई जा रही है दूध बढ़ाने के लिए दिया जाने वाला ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन।

  • कई लोग इसे थायरॉइड और जल्दी बड़े होने की वजह भी मान रहे हैं।

  • हलांकि वैज्ञानिक शोध इन दावों का समर्थन नहीं करते।

क्या है ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन

ऑक्सीटोसिन एक प्राकृतिक हार्मोन है। यह सभी स्तनधारियों के शरीर में बनता है। यह कुल प्रजनन दर और दूध उतरने की प्रक्रिया में मदद करता है। कुछ लोग कृत्रिम ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का गलत इस्तेमाल करते हैं। इससे पशुओं का दूध जल्दी और ज्यादा निकाला जाता है।

सोशल मीडिया पर दावों की बाढ़

हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें दावा किया गया कि दूध से कैंसर होता है। वजह बताई गई ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन वाले पशुओं का दूध। इसके बाद कई लोग दूध छोड़ने की सलाह देने लगे। कुछ का मानना है कि इसी वजह से बच्चे जल्दी बड़े हो रहे हैं।

WHO की गाइडलाइन क्या कहती है

WHO ने ऑक्सीटोसिन को लेकर एक गाइडलाइन जारी की है। यह गाइडलाइन सिर्फ महिलाओं के इलाज के लिए है। पशुओं में ऑक्सीटोसिन को लेकर WHO की कोई गाइडलाइन नहीं है। साथ ही ऐसा कोई प्रमाण भी नहीं मिला जो कैंसर से इसका संबंध जोड़े।

भारत में सख्त नियम

FSSAI के नियमों के अनुसार दूध बढ़ाने के लिए ऑक्सीटोसिन देना गैरकानूनी है। यह दवा सिर्फ रजिस्टर्ड पशु चिकित्सक ही दे सकते हैं। वह भी केवल चिकित्सकीय जरूरत होने पर ही दी जा सकती है। इसका किसी भी अन्य उद्देश्य से इस्तेमाल नियमों का उल्लंघन माना जाता है।

भारतीय शोध में क्या मिला

लखनऊ की इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टॉक्सिकोलॉजी रिसर्च (IITR - Indian Institute of Toxicology Research) ने 2014 में एक अध्ययन किया। वैज्ञानिकों ने बाजार से 55 दूध के नमूने जांचे। कुछ नमूनों में ऑक्सीटोसिन के अंश मिले। लेकिन कैंसर से इसका कोई संबंध साबित नहीं हुआ।

हैदराबाद की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (ICMR - Indian Council of Medical Research) ने भी 2014 में शोध किया। शोध में पाया गया कि दूध गर्म करने पर ऑक्सीटोसिन टूट जाता है। पाचन के दौरान भी यह हार्मोन नष्ट हो जाता है। इस अध्ययन में भी कैंसर या हार्मोनल गड़बड़ी का कोई प्रमाण नहीं मिला।

पाकिस्तान के शोध में भी संकेत

पाकिस्तान की सिंध यूनिवर्सिटी ने 2015 में एक अध्ययन किया। इसमें दूध के 84 नमूने जांचे गए। बिना ब्रांड वाले दूध में ऑक्सीटोसिन की मात्रा ज्यादा पाई गई। हालांकि शोधकर्ताओं ने भी कहा कि इस पर और शोध जरूरी है।

फिर इतनी सख्ती क्यों जरूरी

पशु चिकित्सकों के अनुसार ऑक्सीटोसिन का ज्यादा इस्तेमाल पशुओं के लिए हानिकारक है। इससे उनके प्रजनन तंत्र पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से इसका अवैध इस्तेमाल कानून के खिलाफ माना जाता है। एक्सपर्ट डेयरी सेक्टर पर सख्त निगरानी की सलाह देते हैं।

एक्सपर्ट क्या कहते हैं

एंडोक्राइनोलॉजी एक्सपर्ट डॉ. संदीप खर्ब के अनुसार ऑक्सीटोसिन एक पेप्टाइड हार्मोन है। यह पेट में एसिड और एंजाइम से टूट जाता है। यह सीधे खून में नहीं पहुंचता। उनके मुताबिक जल्दी बड़े होने या हार्मोनल समस्या का कोई ठोस प्रमाण नहीं है।

अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार भी दूध में ऑक्सीटोसिन से कैंसर होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। कर्नाटक की वेटरनरी यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ प्रकाश नादूर के मुताबिक पशु चिकित्सक इसे बहुत सीमित मात्रा में इस्तेमाल करते हैं। यह दवा लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए नहीं बनी है।

1991 में जर्नल ऑफ डेयरी साइंस में छपे एक अध्ययन में भी अहम बात सामने आई। गायों को लंबे समय तक ऑक्सीटोसिन देने पर भी थन की सूजन नहीं बढ़ी। हालांकि लगातार इस्तेमाल से पशु इस हार्मोन के आदी हो सकते हैं।

असली खतरा है मिलावट में

डॉ. संदीप खर्ब के अनुसार असली चिंता ऑक्सीटोसिन नहीं, बल्कि मिलावटी दूध है। दूध में एंटीबायोटिक या रासायनिक अवशेष ज्यादा खतरनाक हो सकते हैं। इनसे पेट की समस्या और एलर्जी हो सकती है। FSSAI भी इन मिलावटों पर लगातार निगरानी रखता है।

क्या करें आम लोग

हमेशा लाइसेंस प्राप्त डेयरी से ही दूध खरीदें। खुला दूध लेते समय उसके स्रोत की जानकारी जरूर रखें। कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे तो खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचित करें। सोशल मीडिया के दावों पर बिना जांचे भरोसा न करें।

एक्सपर्ट कोट्स

  • डॉ. संदीप खर्ब, सीनियर कंसल्टेंट, एंडोक्राइनोलॉजी - उनके अनुसार ऑक्सीटोसिन एक पेप्टाइड हार्मोन है जो पेट में ही टूट जाता है और सीधे खून में नहीं पहुंचता, इसलिए इससे बच्चों में जल्दी बड़े होने या हार्मोनल गड़बड़ी का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिलता।
  • प्रकाश नादूर, पशु चिकित्सा औषधविज्ञानी, कर्नाटक वेटरनरी यूनिवर्सिटी - उनका कहना है कि पशु चिकित्सक ऑक्सीटोसिन का इस्तेमाल बहुत सीमित और खास स्थितियों में करते हैं, और यह दवा लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए नहीं बनी है।


FAQ
Q. क्या गाय-भैंस का दूध पीने से कैंसर होता है? A. अब तक के वैज्ञानिक शोध इस दावे का समर्थन नहीं करते। भारतीय और विदेशी अध्ययनों में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला। ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन का कैंसर से सीधा संबंध साबित नहीं हुआ है। Q. क्या ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन से बच्चे जल्दी बड़े होते हैं? A. एक्सपर्ट के अनुसार इसका कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ऑक्सीटोसिन पेट में ही टूट जाता है। यह सीधे खून में नहीं पहुंचता। Q. दूध से जुड़ा असली खतरा क्या है? A. एक्सपर्ट के मुताबिक असली चिंता मिलावटी दूध है। इसमें एंटीबायोटिक और रासायनिक अवशेष हो सकते हैं। इसलिए हमेशा लाइसेंस प्राप्त डेयरी से ही दूध खरीदें।

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