समझें क्या है पूरा मामला...
- लाड़ली बहना योजना में ढाई साल में सात लाख से ज्यादा लाख से ज्यादा नाम कटे हैं।
- अब पात्र महिलाओं की संख्या घटकर एक करोड़ 25 लाख रह गई है।
- पहले महिलाओं को 1250 रुपए मिलते थे, अब 1500 रुपए मिल रहे हैं।
- नए पंजीयन बीते तीन सालों से बंद पड़े हैं।
लाड़ली बहना योजना का लाभ ले रही मध्यप्रदेश की महिलाओं के लिए एक बड़ी खबर आई है। योजना की 39वीं किस्त कभी भी जारी की जा सकती है।
वहीं इस बार लगभग सात लाख से ज्यादा महिलाओं को बड़ा झटका लगा है। सरकार ने इन महिलाओं के नाम लाभार्थी सूची से हटा दिए हैं।
इसका सीधा मतलब यह है कि अब इनके बैंक खाते में योजना का पैसा नहीं आएगा। बता दें कि सीएम मोहन यादव (cm mohan yadav) ने योजना की 38वीं किस्त 12 जून को जारी की थी।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर इस बार इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं के नाम क्यों काटे गए हैं।
किन कारणों से कटे नाम
फिलहाल योजना में नए नाम नहीं जोड़े जा रहे हैं। इसके उलट, उम्र और अन्य शर्तों के आधार पर पुराने नाम लगातार कट रहे हैं। यही वजह है कि लाभार्थियों की संख्या हर साल बढ़ने की बजाय घटी है।
बता दें कि जब योजना शुरू हुई थी, तब कुल एक करोड़ 31 लाख 35 हजार 985 आवेदन आए थे। इसके बाद आपत्तियों के आधार पर 2 लाख 18 हजार 858 नाम काटे गए थे। तब संख्या घटकर एक करोड़ 29 लाख 5 हजार 457 रह गई थी। अब यह आंकड़ा एक करोड़ 25 लाख के करीब पहुंच गया है।
इंदौर का हाल सबसे अलग
इंदौर जिले में शुरुआत में 4 लाख 57 हजार 742 महिलाओं ने आवेदन किया था। वहीं अब सिर्फ 4 लाख 38 हजार 88 महिलाओं के खातों में ही हर महीने राशि पहुंच रही है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिन्हा का कहना है कि, तय मापदंडों के तहत पात्र महिलाओं को लगातार लाभ दिया जा रहा है। जो महिलाएं शर्तों से बाहर हो रही हैं, सिर्फ उन्हीं के नाम हटाए जा रहे हैं।
60 साल की उम्र बनी सबसे बड़ी वजह
इंदौर में नाम कटने की सबसे बड़ी वजह उम्र सीमा है। पिछले साढ़े तीन सालों में 60 साल की उम्र पूरी होने पर 14 हजार151 महिलाएं योजना से बाहर हुईं।
इसके अलावा जांच में 452 महिलाएं अपात्र पाई गईं। 973 महिलाओं ने खुद लाभ छोड़ा। 763 महिलाओं का निधन हो गया। समग्र आईडी से जुड़ी समस्या के कारण दो हजार 406 नाम हटे। वहीं आधार और समग्र डाटा न मिलने से 903 महिलाओं के नाम कटे।
पिछड़ी जनजातियों की महिलाएं भी योजना से बाहर
इसके अलावा बड़ी बात ये भी है कि राज्य की सबसे पिछड़ी जनजातियों की महिलाएं भी इस योजना से बाहर हो गई हैं। सहरिया, बैगा और भारिया समुदाय की करीब पांच लाख बहनें इस योजना की हकदार नहीं मानी जा रहीं है। वजह चौंकाने वाली है। इन महिलाओं को सरकार पहले से ही एक और योजना के तहत पैसा दे रही है।
विवाद की वजह क्या है
बता दें कि मध्य प्रदेश में सहरिया, बैगा और भारिया खास तौर पर पिछड़ी जनजाति यानी पीवीटीजी (Particularly Vulnerable Tribal Groups) में गिनी जाती हैं। इन समुदायों में कुपोषण की समस्या काफी गंभीर रही है।
इसी वजह से साल 2017 में जनजातीय कार्य विभाग ने आहार अनुदान योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत परिवार की महिला मुखिया को हर महीने पैसा दिया जाता है। शुरुआत में यह राशि 1000 रुपए थी। बाद में इसे बढ़ाकर 1500 रुपए प्रति माह कर दिया गया।
कैसे बनीं अपात्र
अब यही राशि इन महिलाओं के लिए मुसीबत बन गई है। सरकार का कहना है कि इन बहनों को पहले से 1500 रुपए मिल रहे हैं। इसलिए उन्हें लाड़ली बहना योजना का पैसा नहीं दिया जा सकता। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना 2023 के नियमों में एक शर्त है।
इस शर्त के मुताबिक यदि परिवार के किसी भी सदस्य को किसी सरकारी योजना से 1500 रुपए या उससे ज्यादा मिल रहे हैं, तो वह महिला इस योजना के लिए अपात्र होगी।
आहार अनुदान योजना की राशि भी इसी दायरे में आ गई। यही तकनीकी पेंच सहरिया, बैगा और भारिया महिलाओं पर भारी पड़ गया।
मंत्री ने क्या कहा
महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने इस नियम की पुष्टि की है। उनके अनुसार लाड़ली बहना योजना के पात्रता नियमों के पैरा 4.4 में यह शर्त साफ लिखी है। मंत्री का कहना है कि यह नियम सभी महिलाओं पर समान रूप से लागू होता है।
कौन सी शर्तें लागू नहीं
- पहली शर्त है कि परिवार की सालाना आय दो लाख 50 हजार रुपए से ज्यादा हो।
- दूसरी शर्त में परिवार का कोई सदस्य आयकर देता हो।
- तीसरी शर्त सरकारी नौकरी, निगम या मंडल में काम करने या पेंशन लेने से जुड़ी है।
- चौथी शर्त के तहत परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम या मंडल का सदस्य होना चाहिए।
सहरिया, बैगा और भारिया परिवारों पर इनमें से कोई शर्त लागू नहीं होती है। इसके बावजूद सिर्फ आहार अनुदान की राशि के आधार पर उन्हें बाहर कर दिया गया।
कितना पैसा बंटा अब तक
बता दें कि जून 2023 से जून 2026 तक सरकार ने महिलाओं के खातों में 56 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा भेजे हैं। यह पूरी राशि डीबीटी के जरिए सीधे बैंक खातों में गई है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने इस योजना (Ladli bahna yojna) पर 23 हजार 882.81 करोड़ रुपए खर्च करने का बजट रखा है। अक्टूबर 2025 तक हर महीने करीब 1500 करोड़ रुपए ट्रांसफर होते थे। दिसंबर 2025 में यह राशि बढ़कर 1800 करोड़ रुपए से ज्यादा हो गई।
राशि बढ़ी, पर नए नाम नहीं जुड़े
योजना की शुरुआत में महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपए मिलते थे। बाद में यह राशि बढ़ाकर 1,250 रुपए की गई। नवंबर 2025 से इसे और बढ़ाकर 1,500 रुपए कर दिया गया।
राशि बढ़ने से मौजूदा लाभार्थियों को फायदा तो मिल रहा है। वहीं पेंशन और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं की तरह इसमें नए रजिस्ट्रेशन शुरू नहीं हुए हैं। इस वजह से हजारों पात्र महिलाएं अब भी इंतजार में हैं।
योजना की शुरुआत कैसे हुई
बता दें कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 4 मार्च 2023 को भोपाल में एक कार्यक्रम में इस योजना का ऐलान किया था। उन्होंने बताया था कि यह योजना उन्हें रात में अचानक सूझी थी।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि सुबह चार बजे उन्होंने अपनी पत्नी को जगाकर यह विचार बताया। साल में एक बार पैसा देने से बात नहीं बनेगी, इसलिए हर महीने राशि देने का फैसला लिया गया। यही सोच लाड़ली बहना योजना की नींव बनी।
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