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मध्य प्रदेश के 62 बड़े प्रोजेक्ट्स अटके, 12 हजार करोड़ से ज्यादा महंगा हुआ विकास

मध्य प्रदेश के 62 बड़े प्रोजेक्ट्स अटके, 12 हजार करोड़ से ज्यादा महंगा हुआ विकास

समझें पूरा मामला...

  • मध्य प्रदेश में 125 सरकारी प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिनमें 62 देरी से चल रहे हैं।

  • इन प्रोजेक्ट्स में से 28 का बजट भी बढ़ चुका है।

  • 1 केंद्रीय प्रोजेक्ट्स में से 53 लेट हैं और 10 का बजट बढ़ा है।

  • देरी की वजह से राज्य में 12 हजार 874 करोड़ रुपए की अतिरिक्त लागत आई।

  • शभर में सरकारी प्रोजेक्ट्स की देरी से कुल 5.65 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

MP में 125 प्रोजेक्ट, आधे से ज्यादा लेट

भोपाल। मध्य प्रदेश के लिए यह आंकड़े चिंताजनक हैं। राज्य में कुल 125 बड़े सरकारी प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इनमें से 62 प्रोजेक्ट तय समय से पीछे हैं। 28 प्रोजेक्ट्स का बजट भी बढ़ चुका है।

केंद्र सरकार की निगरानी में चल रहे 81 प्रोजेक्ट्स का हाल और भी बुरा है। इनमें से 53 लेट हैं और 10 का बजट बढ़ा है। प्रदेश में इन प्रोजेक्ट्स की कुल लागत 3 लाख 9 हजार 604 करोड़ रुपए है।

शुरुआत में यह लागत 3 लाख 22 हजार 478 करोड़ रुपए थी। देरी की वजह से 12 हजार 874 करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च हो चुके हैं। इसके अलावा 1 लाख 24 हजार 126 करोड़ रुपए की लागत और बढ़ने की आशंका है।

MP के 4 बड़े प्रोजेक्ट जो लेट हैं

रतलाम-महू-खंडवा-अकोला गैस पाइपलाइन का मामला सबसे पुराना है। 1963 में इस परियोजना की शुरुआत हुई थी। 472 किमी लंबी इस लाइन का काम 2010 में शुरू हुआ।

अब तक 5 साल में पूरी होने वाली इस परियोजना की लागत 1 लाख 421.25 करोड़ रुपए से बढ़कर 5,499.86 करोड़ रुपए हो गई है। यह परियोजना अब डेडलाइन 31 दिसंबर 2028 तक खिंच गई है।

रामगंजमंडी-भोपाल रेल लाइन परियोजना की कहानी भी लंबी है। राजस्थान के रामगंजमंडी और मध्य प्रदेश के भोपाल के बीच 262 किमी रेल लाइन बिछाई जानी है। यह काम 1989 में शुरू हुआ और 2000 में पूरा होना था।

फिर 512 करोड़ रुपए की लागत से 2000 में पूरा होना था। लेकिन यह काम अब भी अधूरा है। लागत बढ़कर 3,032 करोड़ रुपए हो गई और काम 2025 तक खिंचा, जो अब 5 हजार 73 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है।

देशभर में 1 हजार 981 प्रोजेक्ट, नुकसान 5.65 लाख करोड़

यह समस्या सिर्फ मध्य प्रदेश की नहीं है। केंद्र सरकार के 1 हजार 981 प्रोजेक्ट पूरे देश में चल रहे हैं। इनकी कुल अनुमानित लागत 42 लाख 78 हजार 402 करोड़ रुपए है। इन प्रोजेक्ट्स पर अब तक 20 लाख 36 हजार 163 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।

इन 1 हजार 981 प्रोजेक्ट्स की कुल लागत शुरुआती अनुमान से 37 लाख 12 हजार 662 करोड़ रुपए ज्यादा हो गई है। यानी करीब 5.65 लाख करोड़ रुपए सिर्फ देरी और खराब प्लानिंग की भेंट चढ़ गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस मुद्दे पर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने 9 राज्यों के मुख्यमंत्रियों और 7 बड़े मंत्रालयों के अधिकारियों को समझाया कि प्रोजेक्ट की देरी न केवल लागत बढ़ाती है, बल्कि जनता का भरोसा भी तोड़ती है।

राजस्थान रिफाइनरी: 2022 से 2026 तक खिंचा

राजस्थान रिफाइनरी देरी का एक बड़ा उदाहरण है। 43 हजार 129 करोड़ रुपए की लागत से 31 अक्टूबर 2022 तक पूरी होनी थी। लेकिन काम 30 जून 2026 तक के लिए खिसका दिया गया। लागत 84.23% यानी 79,459 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है।

रेल मंत्रालय की भारी लेटलतीफी

रेल मंत्रालय से जुड़े प्रोजेक्ट भी बड़े पैमाने पर देरी का शिकार हैं। 261 रेल लाइन परियोजनाओं में से 279 किमी काम पूरा नहीं हो पाया। बजट 2 हजार 438 करोड़ से बढ़कर 7 हजार 844 करोड़ रुपए पहुंच गया। 2024 तक पूरा होना था लेकिन लागत 2 हजार 478 करोड़ से 4 हजार 127.23 करोड़ रुपए हो गई।

मुंबई-नागपुर जशपुरनगर पाइपलाइन का काम 14 मई 2023 से शुरू हुआ था। 30 जुलाई 2026 तक पूरा होना था। लागत 7 हजार 26 करोड़ से बढ़कर 8 हजार 255 करोड़ रुपए तक जा पहुंची।

देरी की बड़ी वजहें क्या हैं?

सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक देरी के पीछे कई कारण हैं। जमीन अधिग्रहण में अड़चन, पर्यावरण मंजूरी में देरी, फंड की कमी और ठेकेदारों की लापरवाही इनमें प्रमुख हैं। मोदी सरकार ने साफ कहा है कि अब देरी करने वाले ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। लेकिन जमीन पर यह बदलाव कितना दिखेगा, यह देखना बाकी है।

MP के नागरिकों पर असर

मध्य प्रदेश में रेल, गैस, हाईवे और बिजली से जुड़े प्रोजेक्ट लटकने से सबसे ज्यादा नुकसान आम जनता को होता है। रोजगार देर से मिलता है, कनेक्टिविटी पिछड़ती है और विकास की रफ्तार धीमी होती है। राज्य में 12 हजार 874 करोड़ रुपए की अतिरिक्त लागत का बोझ अंततः करदाताओं की जेब पर पड़ता है।

यह खबर क्यों जरूरी है?

सरकारी परियोजनाओं में देरी सिर्फ एक प्रशासनिक विफलता नहीं है, यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 से जुड़ा मुद्दा भी है। नागरिकों को समय पर सुविधाएं मिलना उनका अधिकार है। मध्य प्रदेश में 62 प्रोजेक्ट लेट होने का सीधा असर लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है।

रेल, गैस और सड़क प्रोजेक्ट की देरी से रोजगार, कनेक्टिविटी और जीवन स्तर प्रभावित होता है। 12 हजार 874 करोड़ रुपए की अतिरिक्त लागत जनता के टैक्स के पैसे से ही आती है।

यह खबर नागरिकों को जागरूक करती है कि वे अपने जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगें। डिजिटल और सामाजिक नैतिकता के नजरिए से भी यह खबर इसलिए जरूरी है क्योंकि पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतंत्र की नींव हैं।

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