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मध्यप्रदेश की 96 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का एरियर संकट में, जानें वजह

मध्यप्रदेश की 96 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का एरियर संकट में, जानें वजह

मझें क्या है पूरा मामला...

  • आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के एरियर पर सरकार जाएगी सुप्रीम कोर्ट।
  • हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देगी मोहन सरकार!
  • 96 हजार महिला कर्मियों के हक पर अब SC में लड़ाई।
  • मानदेय कटौती मामले में सरकार का नया दांव।
  • जबलपुर हाई कोर्ट के आदेश पर अब सुप्रीम कोर्ट की बारी।

मध्य प्रदेश सरकार बड़ा कानूनी कदम उठाने जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के एरियर भुगतान के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

यह आदेश हाई कोर्ट जबलपुर ने दिया था। हाई कोर्ट की युगलपीठ ने भुगतान का फैसला बरकरार रखा था। सरकार अब शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाएगी।

क्या था पूरा विवाद

यह मामला आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय से जुड़ा है। केंद्र सरकार की योजना में राज्य सरकार का 50 प्रतिशत अंशदान रहता है। आरोप था कि केंद्र ने 2018 में मानदेय बढ़ाया था। लेकिन राज्य सरकार ने अपना हिस्सा बाद में कम कर दिया था।

केंद्र सरकार ने 2018 में मानदेय में 1500 रुपए की बढ़ोतरी की थी। इससे कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़कर 10 हजार रुपए और सहायिकाओं का 7 हजार रुपए हो गया था। 2019 में राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ। नई सरकार ने राज्य के हिस्से का अंशदान घटा दिया, जिससे मानदेय घटकर करीब 5500 रुपए रह गया।

हाई कोर्ट की एकल पीठ का आदेश

आंगनबाड़ी संगठन ने इस कटौती को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। एकल पीठ ने 3 फरवरी 2026 को अहम आदेश दिया। कोर्ट ने कटौती को अवैध बताया।

जून 2019 से जून 2023 तक के 48 महीने का एरियर छह प्रतिशत ब्याज सहित देने का निर्देश दिया गया था। यह राशि करीब 1400 करोड़ रुपये बताई गई थी। कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को ग्रेच्युटी का लाभ देने का आदेश भी दिया गया था।

युगलपीठ ने क्या कहा

राज्य सरकार ने एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी थी। जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा की युगलपीठ ने इस अपील पर सुनवाई की। युगलपीठ ने मानदेय बहाली और एरियर भुगतान के मूल आदेश को सही ठहराया।

हालांकि, कोर्ट ने ब्याज वाले हिस्से में राहत दी। भुगतान अब बिना छह प्रतिशत ब्याज के करना होगा। इससे राज्य सरकार को करीब 300 करोड़ रुपये की बचत होगी।

सुप्रीम कोर्ट क्यों जाएगी सरकार

युगलपीठ ने एरियर भुगतान वाला मूल आदेश बरकरार रखा है। सरकार को अब भी करीब 1400 करोड़ रुपए का भुगतान करना है। सरकार इसी भुगतान वाले आदेश को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में है। इससे प्रदेश की करीब 96 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का इंतजार और बढ़ सकता है।

आगे क्या होगा

सुप्रीम कोर्ट में यह मामला पहुंचने के बाद अंतिम फैसला आना बाकी रहेगा। तब तक कार्यकर्ताओं को एरियर भुगतान में देरी हो सकती है। ग्रेच्युटी के लाभ पर हाई कोर्ट का आदेश फिलहाल बरकरार है। आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट का रुख इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा।


FAQ
Q. सरकार सुप्रीम कोर्ट क्यों जा रही है A. सरकार हाई कोर्ट के एरियर भुगतान वाले आदेश को चुनौती देना चाहती है। युगलपीठ ने यह आदेश बरकरार रखा था। इसलिए सरकार अब शीर्ष अदालत का रुख कर रही है। Q. हाई कोर्ट ने कितनी राशि के भुगतान का आदेश दिया था A. हाई कोर्ट ने करीब 1400 करोड़ रुपए के एरियर भुगतान का आदेश दिया था। यह राशि 2019 से 2023 के बीच के 48 महीनों की है। ग्रेच्युटी का लाभ देने का आदेश भी शामिल है। Q. ब्याज को लेकर क्या फैसला हुआ A. युगलपीठ ने छह प्रतिशत ब्याज देने के निर्देश को हटा दिया। एकल पीठ ने पहले ब्याज सहित भुगतान का आदेश दिया था। इस राहत से राज्य सरकार को करीब 300 करोड़ रुपए कम चुकाने होंगे।

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