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महंगाई की मार: फरवरी में क्यों बढ़ी खुदरा महंगाई, इस बार कहां पड़ रहा ज्यादा असर

महंगाई की मार: फरवरी में क्यों बढ़ी खुदरा महंगाई, इस बार कहां पड़ रहा ज्यादा असर

द सूत्र 2 months ago

News In Short

  • फरवरी में भारत की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.2% तक पहुंच गई है।

  • जनवरी के महीने में यह महंगाई दर केवल 2.7% के स्तर पर थी।

  • खाने-पीने की वस्तुओं की महंगाई दर 2.1% से बढ़कर 3.5% हो गई है।

  • पर्सनल केयर उत्पादों की कीमतों में 19.6% की भारी वृद्धि दर्ज हुई है।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई शहरों के मुकाबले ज्यादा यानी 3.4% रही है।

News In Detail

भारत में महंगाई एक बार फिर से बढ़ने लगी है। नेशनल स्टैटिस्टिकल ऑफिस यानी NSO ने नए आंकड़े जारी किए हैं। इनके अनुसार फरवरी में खुदरा महंगाई दर 3.2% पर पहुंच गई है। जनवरी में यह दर 2.7% के निचले स्तर पर दर्ज की गई थी। केवल एक महीने में महंगाई में 47 बेसिस पॉइंट की बढ़त हुई।

फरवरी में महंगाई का नया आंकड़ा

विशेष रूप से खाने-पीने की चीजों ने घरेलू बजट को बिगाड़ दिया है। खाद्य सूचकांक जनवरी के 2.1% से बढ़कर अब 3.5% हो गया है। इस साल सरकार ने गणना के लिए नया आधार वर्ष अपनाया है। अब साल 2024 को महंगाई मापने का नया आधार वर्ष माना गया है। नए आधार वर्ष के कारण भोजन के कुल वजन को कम किया गया है। इसके बावजूद भोजन की कीमतों में तेजी से महंगाई ऊपर चली गई है।

दूसरी ओर कोर इन्फ्लेशन यानी मुख्य महंगाई दर (Retail Inflation) स्थिर बनी हुई है। इसमें भोजन और ईंधन की कीमतों को शामिल नहीं किया जाता है। फरवरी में कोर इन्फ्लेशन की दर 3.4% पर बनी रही। नीचे दी गई तालिका से आप विभिन्न श्रेणियों का अंतर समझ सकते हैं।

महंगाई दर

महंगाई की श्रेणीजनवरी दर (%)फरवरी दर (%)
खुदरा महंगाई (कुल)2.73.2
भोजन और पेय पदार्थ2.13.5
कोर इन्फ्लेशन3.43.4
ग्रामीण महंगाई3.4
शहरी महंगाई3.0

बढ़ती कीमतों के कारण आम आदमी की रसोई का खर्च बढ़ गया है। अब लोगों को अपनी थाली के लिए ज्यादा पैसे चुकाने होंगे। ग्रामीण और शहरी इलाकों के बीच का अंतर भी चिंता पैदा करता है।

कहां ज्यादा महंगी हुई जिंदगी?

महंगाई की मार गांव और शहर में एक जैसी नहीं है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक ताजा आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण भारत में महंगाई 3.4% दर्ज की गई। वहीं शहरी इलाकों में यह दर केवल 3.0% के स्तर पर रही। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर आर्थिक बोझ ज्यादा पड़ा है। वहां दैनिक जरूरतों के सामान की कीमतें तेजी से ऊपर गई हैं।

ग्रामीण बाजारों में आपूर्ति की कमी इसका एक बड़ा कारण हो सकती है। शहरों में महंगाई की रफ्तार फिलहाल थोड़ी धीमी बनी हुई है। गांवों में महंगाई दर का अधिक होना ग्रामीण खपत को प्रभावित करेगा। इससे छोटे कस्बों में सामान की मांग कम हो सकती है। अब हम उन खास श्रेणियों की चर्चा करेंगे जहां सबसे अधिक तेजी दिखी।

सोने-चांदी और पर्सनल केयर ने सबको चौंकाया

इस बार केवल भोजन की थाली ही महंगी नहीं हुई है। पर्सनल केयर और विविध वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल आया। इस श्रेणी में महंगाई दर 19.6% के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इसकी सबसे मुख्य वजह सोने और चांदी की बढ़ती कीमतें हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार के कारण घरेलू बाजार में कीमती धातुएं महंगी हुई हैं।

हैरानी की बात यह है कि ट्रांसपोर्ट सेक्टर में महंगाई घटी है। ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन की दर शून्य से नीचे -0.1% दर्ज हुई। यह आम आदमी के लिए यात्रा के लिहाज से राहत की खबर है। हालांकि पर्सनल केयर पर होने वाला खर्च काफी बढ़ गया है।

महंगाई वाली टॉप 3 श्रेणियां इस प्रकार हैं-

  • पर्सनल केयर और अन्य सामान: 19.6%

  • पान, तंबाकू और नशीले पदार्थ: 3.5%

  • भोजन और पेय पदार्थ: 3.4%

रसोई गैस की कीमतों में हुए बदलाव ने महंगाई को और हवा दी है।

रसोई गैस का गणित और घरेलू बजट पर चोट

HDFC बैंक के विशेषज्ञों ने एक महत्वपूर्ण आर्थिक विश्लेषण पेश किया है। बैंक की अर्थशास्त्री साक्षी गुप्ता और दीपाली मैथ्यू ने अपनी रिपोर्ट दी। उनके अनुसार रसोई गैस की कीमतों में 60 रुपए की बढ़ोतरी हुई। यह बढ़ोतरी 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर हुई है।

इस वृद्धि का असर मार्च 2026 से महंगाई के आंकड़ों पर दिखेगा। इससे हेडलाइन सीपीआई महंगाई में 14 बेसिस पॉइंट की बढ़ोत्तरी होगी। एक बेसिस पॉइंट का मतलब प्रतिशत का सौवां हिस्सा होता है। इस बढ़ोतरी से मध्यम वर्गीय परिवारों की मासिक बचत कम हो जाएगी। घर चलाने का खर्च बढ़ने से अन्य खर्चों में कटौती करनी होगी। भविष्य की राह अब कई वैश्विक और मौसमी खतरों पर टिकी है।

भविष्य में मौसम और युद्ध का डर

आने वाले समय में महंगाई के मोर्चे पर चुनौतियां और बढ़ेंगी। केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने इस पर राय दी है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2027 में अल नीनो का खतरा है। अल नीनो के कारण मौसम खराब हो सकता है और फसलें बर्बाद होंगी। यदि बारिश कम हुई तो भोजन की कीमतें फिर से बढ़ सकती हैं।

इसके अलावा पश्चिम एशिया का संघर्ष भी एक बड़ी चिंता है। युद्ध के कारण कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हो सकती है। यदि तेल महंगा हुआ तो हर चीज की कीमत बढ़ जाएगी। एचडीएफसी बैंक के अनुसार वित्त वर्ष 2027 में औसत महंगाई 4.2% रहेगी। यह पिछले साल के 2.1% के अनुमान से बहुत ज्यादा है।

भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने फिलहाल रेपो रेट को नहीं बदला। वर्तमान में रेपो रेट 5.25% के स्तर पर स्थिर रखा गया है। RBI का लक्ष्य महंगाई को 4% के आसपास बनाए रखना है। जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती ब्याज दरों में कमी मुश्किल है। हमें आने वाले महीनों में कीमतों को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।

FAQ
Q. खुदरा महंगाई दर बढ़ने का आम आदमी की बचत पर क्या असर होता है? A. जब खुदरा महंगाई दर बढ़ती है तो वस्तुओं के दाम बढ़ जाते हैं। आम आदमी को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए अधिक पैसा खर्च करना पड़ता है। इससे महीने के अंत में हाथ में बचने वाली राशि कम हो जाती है। महंगाई बढ़ने से निवेश करने की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है। विशेष रूप से कम आय वाले परिवारों के लिए बचत करना कठिन हो जाता है। Q. महंगाई मापने के लिए नया आधार वर्ष क्या होता है और यह क्यों बदला गया? A. सरकार समय-समय पर महंगाई मापने का आधार वर्ष बदलती रहती है। अब साल 2024 को नया आधार वर्ष या बेस ईयर माना गया है। आधार वर्ष बदलने से वस्तुओं की नई सूची तैयार की जाती है। इसमें लोगों की बदलती आदतों के अनुसार सामान का वजन तय होता है। नए आधार वर्ष में भोजन के महत्व को थोड़ा कम किया गया है। यह डेटा को अधिक सटीक और आधुनिक बनाने के लिए किया जाता है। Q. RBI का रेपो रेट क्या है और यह महंगाई को कैसे नियंत्रित करता है? A. रेपो रेट वह दर है जिस पर बैंक RBI से कर्ज लेते हैं। वर्तमान में यह दर 5.25% पर स्थिर रखी गई है। जब महंगाई बढ़ती है तो RBI अक्सर रेपो रेट बढ़ा देता है। इससे बाजार में कर्ज लेना महंगा हो जाता है और नकदी कम होती है। नकदी कम होने से लोग कम खरीदारी करते हैं और कीमतें घटती हैं। फिलहाल महंगाई को देखते हुए RBI ने दरें नहीं घटाई हैं।

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