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मानसून की कमजोर शुरुआत से बढ़ी चिंता: अल-नीनो के साये में भारत, कम बारिश का अनुमान

मानसून की कमजोर शुरुआत से बढ़ी चिंता: अल-नीनो के साये में भारत, कम बारिश का अनुमान

द सूत्र 3 months ago

समझें क्या है पूरा मामला

  • साल 2026 में भारत में मानसून की शुरुआत उम्मीद से काफी कमजोर रही है।

  • मौसम विभाग के अनुसार आने वाले महीने देश के लिए और मुश्किल हो सकते हैं।

  • इस साल देश भर में सामान्य या औसत से कम बारिश होने का अनुमान है।

  • जुलाई से सितंबर के दौरान प्रशांत महासागर में अल-नीनो का प्रभाव सबसे ज्यादा रहेगा।

  • कम बारिश से अनाज उत्पादन घटने और बाजार में महंगाई बढ़ने का बड़ा खतरा है।

मानसून 2026 की शुरुआत कमजोर रही है और आने वाले महीने और मुश्किल हो सकते हैं। IMD यानी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department) ने इस साल औसत से कम बारिश का अनुमान लगाया है। अल-नीनो जुलाई से सितंबर के बीच अपने चरम पर होगा। मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है। खाद्यान्न उत्पादन 10 से 15 फीसदी तक घट सकता है जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा है।

मानसून 2026 की कमजोर शुरुआत

दक्षिण-पश्चिम मानसून इस साल केरल में सामान्य से थोड़ी देरी से पहुंचा। जून के पहले दो हफ्तों में कई राज्यों में बारिश सामान्य से काफी कम रही। महाराष्ट्र में 70 से 80 फीसदी तक की कमी दर्ज हुई। मध्य भारत और उत्तरी हिस्सों में भी यही हाल रहा।

IMD के अनुसार इस पूरे मानसून सीजन में बारिश LPA (Long Period Average) यानी दीर्घकालीन औसत का सिर्फ 90 से 92 फीसदी रह सकती है। यानी देश के बड़े हिस्से में इस साल पानी कम पड़ेगा।

क्या होता है अल-नीनो

अल-नीनो एक जलवायु घटना है। इसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी असामान्य रूप से गर्म हो जाता है। इससे हवाओं की दिशा बदल जाती है। भारत की ओर आने वाली नमी वाली हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं।

नतीजा यह होता है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून कमजोर पड़ जाता है। भारत की कुल सालाना बारिश का करीब 70 फीसदी हिस्सा मानसून से आता है। अगर यह कम हुआ तो खेती, पानी और बिजली - सब पर असर पड़ता है।

जुलाई से होगा असली इम्तिहान

वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी अल नीनो का पूरा असर नहीं दिखा है। जून में यह अभी विकसित हो रहा है। NOAA (National Oceanic and Atmospheric Administration) और IMD दोनों के अनुसार जुलाई-अगस्त में अल-नीनो के मजबूत होने की संभावना 80 से 90 फीसदी से ज्यादा है।

2009 में कमजोर अल-नीनो के बावजूद देश में बारिश सिर्फ 78 फीसदी रही थी। यह 37 साल का सबसे कम स्तर था। 2015 में मजबूत अल-नीनो ने भारी सूखे की स्थिति बनाई थी। 2026 में सुपर अल-नीनो की आशंका है जो अक्टूबर-फरवरी तक बना रह सकता है।

किसानों पर सबसे बड़ा खतरा

खरीफ सीजन यानी जून से सितंबर में धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और दालें बोई जाती हैं। कम बारिश से इन फसलों की पैदावार घट सकती है। अगर बारिश 90 फीसदी या उससे कम रही तो खाद्यान्न उत्पादन में 10 से 15 फीसदी की कमी आ सकती है।

पिछले अल-नीनो वर्षों में सूखे से किसानों की आय घटी और कर्ज बढ़ा। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा नहीं है वे सबसे ज्यादा परेशान होंगे। पशुपालन भी प्रभावित होगा क्योंकि चारे की कमी हो सकती है।

MP, राजस्थान और छत्तीसगढ़ पर क्या होगा असर

मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना - ये छह राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। इन इलाकों में वर्षा आधारित खेती ज्यादा है। सिंचाई के साधन कम हैं।

मध्यप्रदेश और राजस्थान में सोयाबीन और दलहन की खेती बड़े पैमाने पर होती है। कम बारिश से यहां का किसान सीधे मार खाएगा। छत्तीसगढ़ में धान की खेती पर खतरा है।

महंगाई और अर्थव्यवस्था पर असर

फसल उत्पादन घटने से सब्जी, अनाज और दालों की कीमतें बढ़ सकती हैं। खाद्य महंगाई बढ़ने से RBI (Reserve Bank of India) की मौद्रिक नीति प्रभावित होगी। GDP ग्रोथ पर भी दबाव पड़ेगा। अगर यह 7 फीसदी के लक्ष्य से नीचे गई तो रोजगार पर असर होगा।

सरकार को अनाज आयात बढ़ाना पड़ सकता है जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ेगा।

सरकार की तैयारियां और उम्मीद

सरकार ने 200 से ज्यादा जिलों में सूखा राहत कार्यों की योजना बनाई है। फसल बीमा योजना PMFBY (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) को मजबूत किया जा रहा है। बेहतर मौसम पूर्वानुमान और सैटेलाइट मॉनिटरिंग से किसानों को समय पर सलाह देने की कोशिश है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर पॉजिटिव IOD (Indian Ocean Dipole) यानी हिंद महासागर द्विध्रुव विकसित हुआ तो यह अल-नीनो का कुछ असर कम कर सकता है। अभी IOD न्यूट्रल है लेकिन बाद में पॉजिटिव होने की उम्मीद है।

जल संकट और बिजली पर भी खतरा

कम बारिश का मतलब है जल संकट गहराना। कई शहरों और गांवों में पहले से पानी की समस्या है। हाइड्रो पावर प्लांट पानी पर निर्भर हैं इसलिए बिजली उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है। गर्मी पहले से रिकॉर्ड तोड़ रही है। अल-नीनो से लू की लहरें और लंबी हो सकती हैं।

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