समझें क्या है पूरा मामला
मौसम विभाग ने इस साल मानसून में कम बारिश का अनुमान लगाया है।
देश में इस बार औसतन केवल 90% बारिश होने की संभावना है।
मानसून अपनी तय तारीख 26 मई को केरल भी नहीं पहुंच पाया है।
अब इसके 2 से 4 जून के बीच केरल पहुंचने की उम्मीद है।
कम वर्षा से खेती, बिजली और पानी की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
मौसम विभाग का मानसून को लेकर बड़ा अपडेट
देशभर में लोग जिस मानसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। उसने इस बार शुरुआत में ही सबकी चिंता को बहुत बढ़ा दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी ने नया पूर्वानुमान जारी किया है।
इसके अनुसार इस साल देशभर में सामान्य से कम पानी बरसने वाला है। यह खबर हमारे देश के किसानों के लिए बहुत बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है। आम जनता के बजट पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है।
देरी से पहुंचेगा केरल में मानसून
मौसम विभाग को पहले उम्मीद थी कि मानसून 26 मई तक केरल पहुंच जाएगा। इससे लग रहा था कि भीषण गर्मी से लोगों को जल्दी राहत मिल जाएगी। लेकिन अब यह बड़ी उम्मीद पूरी तरह से डर में बदल चुकी है।
मानसून अपनी तय तारीख पर केरल के तट तक नहीं पहुंच पाया है। अब इसके 2 से 4 जून के बीच केरल में दस्तक देने की बात कही जा रही है। इस देरी ने मौसम के पूरे चक्र को प्रभावित कर दिया है।
इस सीजन में देश में होगी इतनी बारिश?
आईएमडी के अनुसार जून से सितंबर के बीच कम बारिश की आशंका है। इस साल देश में औसतन केवल 90% बारिश होने की ही संभावना है। यानी इस बार सूखे जैसे हालात का सामना भी करना पड़ सकता है।
उत्तर-पश्चिम भारत में स्थिति और भी ज्यादा खराब दर्ज की जा सकती है। वहां सामान्य से कम यानी 92% से भी कम बारिश का अनुमान है। मध्य और दक्षिण भारत में भी बादल कम ही बरसेंगे।
जून के महीने में कैसा रहेगा तापमान?
मौसम विभाग ने जून के महीने के लिए विशेष चेतावनी जारी की है। इस महीने में देशभर में सामान्य से बहुत कम बारिश देखने को मिलेगी। ज्यादातर राज्यों में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य से काफी ऊपर रहेगा।
रात का न्यूनतम तापमान भी कई राज्यों में बढ़ा हुआ दर्ज होगा। हालांकि मध्य और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है। वहां का तापमान सामान्य या उससे कम रहने की उम्मीद है।
खेती और फसलों पर पड़ेगा मौसम का सीधा असर
भारत में मानसून सिर्फ एक मौसम नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। देश के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में कम बारिश होने की पूरी आशंका है। इसे मौसम की भाषा में मानसून कोर ज़ोन कहा जाता है।
इस क्षेत्र में कम पानी गिरने से खरीफ की फसलें खराब हो सकती हैं। विशेष रूप से धान, सोयाबीन, कपास और दलहन की खेती पर संकट आ सकता है। पानी की कमी से फसलों का उत्पादन घट सकता है।
कृषि विशेषज्ञों की राय
हालात को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सावधान किया है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे कम पानी वाली फसलें चुनें। उन्हें अपने खेतों में सिंचाई के वैकल्पिक साधन तैयार रखने चाहिए।
अंधाधुंध पानी चाहने वाली फसलों से इस बार बचना ही समझदारी होगी। सही समय पर सही फैसले लेकर ही नुकसान को कम किया जा सकता है। सरकार भी इस स्थिति पर लगातार अपनी नजर बनाए हुए है।
पानी संकट से बढ़ सकती है आफत
कम बारिश का असर सिर्फ खेतों तक ही सीमित नहीं रहेगा। शहरों में रहने वाले आम लोगों को भी इसका नुकसान उठाना पड़ेगा। फसलों का उत्पादन कम होने से खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं।
इसके अलावा देश के बड़े बांधों में पानी का स्तर घट जाएगा। इससे बिजली उत्पादन और पीने के पानी की किल्लत बढ़ सकती है। आने वाले दिन देश के प्रबंधन के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।
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