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माशिमं को स्थापित करने वाले रिटायर्ड आईएएस बीकेएस रे नहीं रहे, छत्तीसगढ़ ने खोया अनुभवी प्रशासक

माशिमं को स्थापित करने वाले रिटायर्ड आईएएस बीकेएस रे नहीं रहे, छत्तीसगढ़ ने खोया अनुभवी प्रशासक

द सूत्र 4 months ago

छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक दुनिया से दुखद खबर आई है। वरिष्ठ रिटायर्ड आईएएस बीकेएस रे का निधन हो गया। वे लंबे समय से बीमार थे। रायपुर एम्स में उनका इलाज चल रहा था। देर रात इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली।

उनके निधन से प्रशासनिक जगत में शोक है। पूर्व और वर्तमान अफसरों ने दुख जताया। शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने भी शोक व्यक्त किया। कई लोगों ने इसे अपूरणीय क्षति बताया।

1972 बैच के वरिष्ठ अधिकारी

बीकेएस रे भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1972 बैच के अधिकारी थे। उनका लंबा प्रशासनिक अनुभव था। वे गंभीर सोच के लिए जाने जाते थे। प्रशासनिक मामलों पर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती थी। उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।

राज्य गठन के दौर में अहम भूमिका

छत्तीसगढ़ के शुरुआती वर्षों में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा। राज्य गठन के बाद प्रशासनिक ढांचा तैयार करना बड़ी चुनौती थी। उस दौर में उन्होंने कई जिम्मेदारियां निभाईं। संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दिया। उनकी कार्यशैली की सराहना होती रही।

गृह से विमानन तक संभाले विभाग

अपने सेवा काल में उन्होंने कई बड़े विभाग संभाले। गृह विभाग में जिम्मेदारी निभाई। परिवहन विभाग का काम देखा। विमानन क्षेत्र से जुड़े मामलों को भी संभाला। नीतिगत निर्णयों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। प्रशासनिक नेतृत्व उनकी पहचान बना।

शिक्षा और प्रशिक्षण पर खास फोकस

बीकेएस रे ने केवल प्रशासन तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर भी काम किया। वे प्रशासन अकादमी के महानिदेशक रहे। अधिकारियों के प्रशिक्षण को नई दिशा दी। प्रशासनिक गुणवत्ता सुधारने पर जोर दिया।

बोर्ड और मंडलों का संभाला नेतृत्व

उन्होंने माध्यमिक शिक्षा मंडल का नेतृत्व किया। व्यावसायिक परीक्षा मंडल के अध्यक्ष भी रहे। शिक्षा से जुड़े कई निर्णयों में उनकी भूमिका रही। संस्थाओं को मजबूत करने का प्रयास किया। यही वजह है कि उन्हें संस्थान निर्माता भी कहा जाता था।

रिटायरमेंट के बाद भी रहे सक्रिय

सेवानिवृत्ति के बाद भी उनका सार्वजनिक जीवन जारी रहा। वे लगातार लिखते रहे। विभिन्न मंचों पर व्याख्यान देते रहे। प्रशासन और सुशासन पर उनके विचार चर्चा में रहते थे। युवा अधिकारी भी उनसे मार्गदर्शन लेते थे।

किताबों और लेखन से छोड़ी छाप

बीकेएस रे अध्ययनशील अधिकारी माने जाते थे। उन्हें पढ़ने और लिखने का शौक था। उन्होंने कई पुस्तकों का लेखन किया। अखबारों और पत्रिकाओं में लेख लिखे। सार्वजनिक नीति पर उनके विचारों को गंभीरता से सुना जाता था।

सुशासन के पक्षधर थे रे

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार रे हमेशा सुशासन के पक्ष में रहे। वे व्यवस्था सुधार के समर्थक थे। पारदर्शिता पर जोर देते थे। संस्थागत विकास को प्राथमिकता देते थे। यही उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी।

अफसरों के लिए थे प्रेरणा

कई युवा अफसर उन्हें आदर्श मानते थे। उनका अनुभव व्यापक था। उनका व्यवहार सरल था। वे संवाद में विश्वास रखते थे। प्रशासनिक सेवा में आने वाले नए अधिकारियों को प्रेरित करते थे। उनकी सलाह को महत्व दिया जाता था।

एक युग का अंत

बीकेएस रे का जाना केवल एक अधिकारी का निधन नहीं है। यह प्रशासनिक अनुभव की बड़ी क्षति है। उन्होंने शासन को नई सोच दी। संस्थाओं को मजबूती दी। सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई। उनकी विरासत लंबे समय तक याद की जाएगी।

TIMELINE

  • प्रारंभिक सेवाकाल: भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयन और छत्तीसगढ़/अविभाजित मध्य प्रदेश में विभिन्न प्रशासनिक पदों पर सेवाएं।

  • ऐतिहासिक कार्यकाल: छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) की स्थापना में मुख्य भूमिका निभाई और पहले अध्यक्ष/अधिकारी के रूप में इसकी नींव रखी।

  • सेवानिवृत्ति: प्रशासनिक सेवाओं से ससम्मान रिटायरमेंट।

  • हाल ही में: लंबी बीमारी या उम्र संबंधी कारणों के चलते अनुभवी पूर्व आईएएस अधिकारी का निधन; छत्तीसगढ़ ने खोया एक कुशल प्रशासक।

निष्कर्ष

कोयला हब से सोलर हब बनने की दिशा में छत्तीसगढ़ का यह राष्ट्रीय सम्मान राज्य की मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी को दर्शाता है। डबल इंजन सरकार की भारी सब्सिडी और महिला समूहों को रोजगार से जोड़कर राज्य ने देश के सामने हरित विकास और ग्रामीण सशक्तिकरण का एक बेहतरीन मॉडल पेश किया है।


FAQ
Q. किस वरिष्ठ पूर्व अधिकारी का निधन हुआ है? A. A. छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल (CGBSE) की स्थापना करने वाले एक अनुभवी सेवानिवृत्त IAS अधिकारी का। Q. छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास में उनका क्या योगदान था? A. A. उन्होंने राज्य गठन के बाद स्कूल शिक्षा की नींव रखी और माध्यमिक शिक्षा मंडल को स्थापित किया। Q. उनके निधन पर राज्य की क्या प्रतिक्रिया है? A. A. पूरे प्रदेश में शोक की लहर है; छत्तीसगढ़ ने एक बेहद कुशल और मार्गदर्शक प्रशासक खो दिया है।

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