छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले से सरकारी तंत्र को शर्मसार करने वाला एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना' (PMMVY) में करीब 60 लाख रुपये का संगठित घोटाला उजागर हुआ है।
योजना के तहत स्थानीय जरूरतमंद गर्भवती और धात्री (शिशुवती) माताओं को मिलने वाली पोषण सहायता राशि को विभागीय अधिकारियों और कर्माचारियों की मिलीभगत से बिहार और झारखंड के करीब 1,400 अज्ञात बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया।
यह पूरा फर्जीवाड़ा साल 2025 से लगातार चल रहा था, लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग की मॉनिटरिंग और ऑडिट विफलता के कारण किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। अब मामला सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारी अपनी गर्दन बचाने के लिए सरकारी आईडी और पासवर्ड हैक होने का बहाना बना रहे हैं।
कटेकल्याण ब्लॉक बना फर्जीवाड़े का मुख्य केंद्र
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस सुनियोजित घोटाले को अंजाम देने के लिए पोर्टल पर 1,400 से अधिक फर्जी हितग्राहियों का नया पंजीयन किया गया। इन फर्जी नामों के साथ छत्तीसगढ़ से बाहर यानी बिहार और झारखंड के बैंक खातों को लिंक कर दिया गया और सरकारी खजाने से सीधे राशि निकाल ली गई।
इस भ्रष्टाचार का मुख्य केंद्र कटेकल्याण ब्लॉक है, जहां सबसे ज्यादा अवैध प्रविष्टियां (फर्जी एंट्री) पाई गई हैं। इसके अलावा बड़े बचेली, पालनार, बारसूर, पुरनतराई, बंगापाल, सरपंच पारा, गाटम डोंगरीपारा और गाटम पटेल पारा सहित दर्जनों आंगनबाड़ी केंद्र अब जांच के दायरे में आ गए हैं।
सत्यापन दावों की खुली पोल, जनता में आक्रोश
नियमतः इस योजना में किसी भी हितग्राही को राशि जारी करने से पहले ऑनलाइन एंट्री के साथ-साथ कड़ाई से पहचान सत्यापन और प्रत्यक्ष बैंक खाता जांच की त्रि-स्तरीय अनिवार्य प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके बावजूद इतनी बड़ी संख्या में बाहरी राज्यों के फर्जी खातों का सिस्टम में आसानी से स्वीकृत हो जाना, जिले की संपूर्ण विभागीय निगरानी प्रक्रिया के खोखलेपन को उजागर करता है। इस घटना के बाद स्थानीय आदिवासियों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
बाबू की भूमिका संदिग्ध, पर अब तक FIR नहीं
योजना के मुख्य पोर्टल और आईडी-पासवर्ड की पहुंच केवल अधिकृत अफसरों और कर्मियों तक ही सीमित होती है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बाहरी ठगों तक यह गोपनीय पासवर्ड कैसे पहुंचा? मामले में विभाग के ही एक बाबू की भूमिका को बेहद संदिग्ध माना जा रहा है, जिसके पास लंबे समय से मुख्य पोर्टल संचालन की कमान थी। हैरान करने वाली बात यह है कि इतना बड़ा गबन उजागर होने के बाद भी खबर लिखे जाने तक विभाग द्वारा कोई पुलिस एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं कराई गई है।
बस्तर में कुपोषण और स्वास्थ्य के चिंताजनक आंकड़े
यह घोटाला ऐसे समय में हुआ है जब बस्तर संभाग पहले से ही कुपोषण और खराब स्वास्थ्य सुविधाओं की मार झेल रहा है। सरकारी रिकॉर्ड (NHFR और HMIS) के अनुसार स्थिति बेहद गंभीर है:
कुपोषण : दंतेवाड़ा में 32-34% और बीजापुर-सुकमा में 35-38% आबादी कुपोषण से पीड़ित है। लगभग 21% लोग इसके चलते बीमारियों का दंश झेल रहे हैं।
एनीमिया : दंतेवाड़ा की 55-58% आबादी एनीमिया (खून की कमी) से प्रभावित है।
शिशु व मातृ मृत्यु दर : दंतेवाड़ा में सालाना 110 शिशुओं की मौत हो जाती है, जबकि वर्ष 2024 में प्रसव के दौरान 7 माताओं की मौत दर्ज की गई।
अधिकारियों का पक्ष
"शुरुआती जांच में तकनीकी प्रविष्टियों में लापरवाही और गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। सभी संदिग्ध खातों की सूची बनाई जा रही है ताकि रिकवरी की जा सके। जांच समिति की अंतिम रिपोर्ट आते ही भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारी-कर्मचारी या बाहरी तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्हें बर्खास्त कर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।"
— जयंत नाहटा, सीईओ
निष्कर्ष
दंतेवाड़ा का यह योजनाबद्ध घोटाला प्रशासनिक विफलता और त्रि-स्तरीय सत्यापन प्रक्रिया के खोखलेपन को उजागर करता है। कुपोषण से जूझते बस्तर में गरीब माताओं के हक की राशि बाहरी राज्यों के फर्जी खातों में जाना बेहद गंभीर है। मामले में लीपापोती करने के बजाय दोषियों पर तत्काल एफआईआर और कड़ी कार्रवाई जरूरी है।
FAQ
Q. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) क्या है? A. उत्तर: यह केंद्र सरकार द्वारा संचालित एक महत्वाकांक्षी कल्याणकारी योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य पहली बार मां बनने वाली गर्भवती और धात्री (शिशुवती) महिलाओं को पोषण सहायता के रूप में सीधे उनके बैंक खाते में नकद राशि प्रदान करना है, ताकि वे गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त आराम और सही पोषण ले सकें। Q. दंतेवाड़ा में हुआ 'मातृ वंदना योजना घोटाला' क्या है? A. उत्तर: दंतेवाड़ा जिले में स्थानीय गरीब और जरूरतमंद आदिवासी महिलाओं के हक की लगभग 60 लाख रुपये की राशि को विभागीय मिलीभगत से अन्य राज्यों (बिहार और झारखंड) के लगभग 1,400 अज्ञात और फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। यह घोटाला साल 2025 से लगातार चल रहा था। Q. इस घोटाले का मुख्य केंद्र (Hotspot) कौन सा क्षेत्र है? A. उत्तर: इस सुनियोजित फर्जीवाड़े का मुख्य केंद्र दंतेवाड़ा जिले का कटेकल्याण ब्लॉक है। इसके अलावा बड़े बचेली, पालनार, बारसूर, पुरनतराई, बंगापाल, सरपंच पारा, गाटम डोंगरीपारा और गाटम पटेल पारा के आंगनबाड़ी केंद्र भी जांच के दायरे में हैं। Q. नियमों के अनुसार राशि जारी करने से पहले क्या प्रक्रिया अनिवार्य है? A. उत्तर: नियमों के मुताबिक, किसी भी हितग्राही के खाते में राशि भेजने से पहले पोर्टल पर ऑनलाइन एंट्री, कड़ाई से पहचान पत्र (आधार) सत्यापन और प्रत्यक्ष बैंक खाता जांच (त्रि-स्तरीय भौतिक सत्यापन) की अनिवार्य प्रक्रिया होती है। इस मामले में इसी सुरक्षा प्रणाली की नाकामी सामने आई है।
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